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कैलाश सत्यार्थी पर डाक्यूमेंट्री “द प्राइस ऑफ फ्री” का ट्रेलर रिलीज

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 14 2018 4:24PM
कैलाश सत्यार्थी पर डाक्यूमेंट्री “द प्राइस ऑफ फ्री” का ट्रेलर रिलीज

सुभाषिनी

नई दिल्ली। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म “द प्राइस ऑफ फ्री” का पहला ट्रेलर आज पार्टिसिपेंट मीडिया, कनकोर्डिया स्टूडियो और यू-ट्यूब द्वारा जारी किया गया। यह डाक्यूमेंट्री फिल्म कैलाश सत्यार्थी के बाल मजदूरी और ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को छुड़ाने के “रेड एंड रेस्क्यू आपरेशन” पर आधारित है। इसमें सत्यार्थी 'बचपन बचाओ आंदोलन' के कार्यकर्ताओं के साथ ट्रैफिकिंग के शिकार गुमशुदा बच्चों को सीक्रेट छापेमारी अभियान के जरिए मुक्त कराते हैं।

फिल्म में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी लोगों से बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने की अपील करते हुए कहते हैं कि किसी न किसी को तो इन बच्चों की आजादी की कीमत चुकानी पड़ेगी। फिल्म समाज के वंचित, कमजोर और हाशिए पर खड़े बच्चों के अधिकारों की रक्षा की न केवल वकालत करती है, बल्कि लोगों को बच्चों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित भी करती है। उल्लेखनीय है कि “द प्राइस ऑफ फ्री” विश्व प्रसिद्ध “सनडांस फिल्म फेस्टिवल-2018” में चयनित हुई थी।

फिल्म को अपार सराहना के साथ-साथ यूएस डाक्यूमेंट्री ग्रांड जूरी पुरस्कार भी मिला है। इस फिल्म का निर्माण पार्टिसिपेंट मीडिया और कनकोर्डिया स्टूडियो ने किया है। डेरेक डोनीन फिल्म के निर्देशक हैं। डेविस गुगेनहिम फिल्म के निर्माता और सारा एंटोनी सह निर्माता हैं। 90 मिनट की इस फिल्म को 27 नवंबर, 2018 को सॉल पैनकेक यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज की जाएगी।

“द प्राइस ऑफ फ्री” के बारे में बात करते हुए कैलाश सत्यार्थी कहते हैं, “यह फिल्म बाल मजदूरी, बाल दुर्व्यवहार (ट्रैफिकिंग), बाल दासता और शोषण के असली चेहरे और संकट को उजागर करती है, जो लाखों बच्चों के बचपन को लील कर उनके सपनों को बेरहमी से कुचल रही है। यह फिल्म उन वंचित और हाशिए के बच्चों की कहानी बयां करती है, जिनके लिए मैं जीवन भर लड़ता रहा हूं और अंतिम सांस तक लड़ता रहूंगा। मैं सभी से इस फिल्म को देखने की गुजारिश करता हूं और साथ ही एक ऐसी दुनिया के निर्माण में सहयोग की अपील भी करता हूं जिसमें सभी बच्चे आजाद, स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षित हों। एक ऐसी दुनिया जहां हर बच्चा, बच्चा होने के लिए आजाद हो। यदि दुनिया का एक भी बच्चा गुलाम है तो सही मायने में हम में से कोई भी आजाद नहीं है।” 

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