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थानों में भेज रहे संदेश...मेरे खिलाफ क्या-क्या मामले हैं..?

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 26 2018 8:35PM
थानों में भेज रहे संदेश...मेरे खिलाफ क्या-क्या मामले हैं..?
भोपाल/उज्‍जैन, 26 अक्‍टूबर (हि.स.)। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव में खड़े होने वाले प्रत्याशियों को लेकर जो निर्देश जारी किए गए हैं, उन निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रत्याशी तीन बार मीडिया में अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक प्रकरणों की जानकारी मतदाताओं के लिए सार्वजनिक करेंगे। इसी के चलते जिले की सातों सीटों से वे दावेदार जो मानकर चल रहे हैं कि उनका टिकट पक्का है, अपने खिलाफ पुलिस थानों में दर्ज आपराधिक प्रकरणों की जानकारी लेने में जुट गए हैं। 
 
पुलिस सूत्रों के अनुसार जिले के शहरी और देहात के थानों में ऐसे दावेदारों के संदेशवाहक चक्कर लगाने लग गए हैं। वे थाने आकर दीवानजी, मुंशीजी से मिल रहे हैं और कह रहे हैं कि पिछले 20 सालों के भिया के रिकार्ड खोज लो। कहीं कोई प्रकरण दर्ज हुआ हो तो उसकी जानकारी दे दो।  ऐसे संदेशवाहकों में कुछ कानून के जानकार भी शामिल हैं। वहीं कुछ वे हैं जो दावेदार के बहुत करीबी तथा राजदार हैं। वे इस जुगत में हैं कि दो-चार दिन में थानों से जानकारी जुट जाए ताकि निश्चिंतता बनी रहे। टिकट घोषित होते ही दूसरे कामों पर ध्यान दें। थाने के चक्कर न लगाना पड़े। 
 
इन्हें कुछ नहीं पता, क्या करें
ऐसे ही एक दावेदार जो सत्ता पार्टी की ओर से टिकट मांग रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्हें ऊपर से हरी झंडी मिल गई है, के समर्थक परेशान हैं। समर्थकों का कहना है कि भिया से कई बार पूछ लिया कि कोई आंदोलन, अनशन, काले झंडे दिखाने, थाने का घेराव करने, मारपीट या आर्थिक अपराध ध्यान में आता हो तो बता दो। ताकि अभी से थाने से जानकारी प्राप्त कर लें। टिकट मिलने के बाद यदि चूक हो गई तो समझो जमा जमाया खेल खतम हो जाएगा। समर्थकों के अनुसार भिया को कुछ भी याद नहीं है। उनका कहना है कि थाने जाकर तुम ही पूछ आओ। बता दें तो ठीक वरना कोई बात नहीं। 
 
अपने तो बहुत सारे अपराध हैं..
जिले की एक विधानसभा से टिकट मांग रहे एक दावेदार से जब इस प्रतिनिधि ने थानों में दर्ज प्रकरण को लेकर पूछताछ की तो उन्होंने जवाब दिया- अपने तो बहुत सारे अपराध हैं। जितना याद रहेगा बता देंगे, बाकी पुलिस वालों पर छोड़ दिया है। कोई अपराध बाद में ध्यान आएगा तो उसे भी जोड़ लेंगे। नियम-कानून की बात पर संबंधित का कहना था कि राजनीति की दुनिया में प्रकरण तो दर्ज हो ही जाते हैं। फिर मगजमारी भी बहुत सारी रहती है। ऐसे में क्या करें, जो होगा देखा जाएगा। 
 
हमारे खिलाफ एक भी प्रकरण नहीं
जिले में कुछ दावेदार ऐसे भी हैं जिनका चर्चा में कहना है कि उनके खिलाफ एक भी आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। उनके अनुसार चूंकि साफ-सुथरी राजनीति की है इसलिए थानों के चक्कर नहीं लगाना पड़े। इस प्रश्न पर कि ऐसी छवि के कारण आपका टिकट तो पक्का समझें? उनका जवाब था- टिकट मिलने पर यह पैमाना होता तो शायद ही चुनाव आयोग इस प्रकार की शर्त आचार संहिता में दर्ज करवाता। 
 
वो खुश हैं..क्यों, पता नहीं...
जिले के एक निवृत्तमान विधायक के प्रबल विरोधी इन दिनों खुश हैं। उनके अनुसार चुनाव आयोग के निर्देश का पालन सभी को करना होगा। अपने विरोधी की ओर इशारा करते हुए वे बताते हैं कि उन्हें टिकट मिला तो इस बार जनता के सामने कलाई खुल जाएगी। सारे मामले सामने होंगे। टिप्पणी करते हैं कि हमने कई बार आला कमान को बहुत सारी बातें बताई, हमें डांट दिया जाता था कि अच्छे आदमी के खिलाफ क्यों आरोप लगाते हो। अब यदि उनको टिकट मिल गया और मीडिया में छप गया तब क्या करेंगा आलाकमान..?
 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार/ललित/राजू 
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