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'वोट मांग कर शर्मिन्दा ना करें, वोट फोर नोटा...!' जानें क्या है माजरा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 20 2018 3:39PM
'वोट मांग कर शर्मिन्दा ना करें, वोट फोर नोटा...!' जानें क्या है माजरा

भोपाल, 20 अक्टूबर(हि.स.)। प्रदेश में सत्ता पर काबिज बीजेपी की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। अब बीजेपी को उलझन में डाला है केंद्र सरकार के नए एट्रोसिटी एक्ट ने। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 'वोट फोर नोटा' के पोस्टर्स ने सामान्य वर्ग का आक्रोश साफ नजर आ रहा है। प्रदेशभर में दीवारों पर चिपकाए गए इन पोस्टर्स पर लिखा है, 'मैं सामान्य वर्ग से हूं, कृपया कोई भी राजनैतिक दल वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें।' हिन्दी भाषा की इन पंक्तियों के नीचे अंग्रेजी भाषा में 'वोट फोर नोटा' को हाईलाइट किया गया है। यानी राजनीतिक दलों के बजाय नोटों को वोट दिए जानें की अपील की गई है।

 
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति अधियनियम के मामले को लेकर दिए गए फैसले के बाद केंद्र सरकार के नए एट्रोसिटी एक्ट को लेकर इस तरह के हालात पैदा हुए हैं कि यहां जनप्रतिनिधियों का विरोध हो रहा है। ये पोस्टर्स जगह-जगह घरों के बाहर चिपका दिए गए हैं। भोपाल में घरों के बाहर लगे ये पोस्टर्स प्रदेशभर में नजर आ रहे हैं। कुछ पोस्टर्स पर लिखा है यह गांव या घर सामान्य वर्ग का है, कृपया यहां वोट मांगकर शर्मिन्दा न करें। हम अपना वोटा नोटा को देंगे। ये पोस्टर्स, दुकानों, गांव की सरहद पर, घरों की दीवारों पर लगाया गया है।
 
राजनीतिक दलों की बढ़ी मुश्किलें
 
इन पोस्टर्स के बाद अकेली भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। दरअसल सामान्य वर्ग जहां आरक्षण को समाप्त करने की बात करता है, वहीं राजनीति में आरक्षण को ही वोट बैंक का गणित समझा जाता है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने आरक्षण का आधार आर्थिक रूप को बनाकर सत्ता में आने की तैयारी की। लेकिन इस पोस्टर के बाद कांग्रेस का वोट बैंक जीतने का यह आधार भी जनता के विरोध का कारण बना हुआ है। जिससे बीजेपी से नाराज वर्ग मौके को भुनाने का सपना देख रही कांग्रेस के हाथ नहीं आ रहा है।
 
सोशल मीडिया पर सीएम शिवराज भी
 
सोशल मीडिया पर इस पोस्टर के साथ आरक्षण को लेकर प्रदेश के मुखिया सीएम शिवराज का बयान भी छाया हुआ है। दरअसल उन्होंने कहा था कि मेरे रहते कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। इस तरह प्रदेश में गर्माए राजनीतिक माहौल में यह पोस्टर्स और सीएम का बयान राजनीतिक दलों के लिए आग में घी का काम कर रहा है।
 
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