Hindusthan Samachar
Banner 2 मंगलवार, नवम्बर 13, 2018 | समय 03:30 Hrs(IST) Sonali Sonali Sonali Singh Bisht

एक बार फिर होगा धार में रोचक मुकाबला, नीना वर्मा और गौतम हो सकते हैं आमने-सामने

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 27 2018 3:37PM
एक बार फिर होगा धार में रोचक मुकाबला, नीना वर्मा और गौतम हो सकते हैं आमने-सामने

ज्ञानेंद्र

धार। अगले माह होने जा रहे विधानसभा चुनाव मद्देनजर जहां प्रशासन ने पूरी तैयारियां जोर शोर से प्रारंभ कर दी है तो वहीं सियासी दलों ने अपने अपने स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है जिले में आदर्श आचार संहिता प्रभावशील हो गई है।

 प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस में अटकलों का बाजार भी गर्म हो रहा है। धार विधानसभा क्षेत्र मध्य प्रदेश व जिले की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला होता आया है। लगातार तीन बार से भाजपा ही यहां पर जीत का परचम लहरा रही है। इस चुनाव में सपाक्स व जयस भी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है किंतु वह अपनी उपस्थिति किस हद तक दर्ज करा पाएगा या भविष्य के गर्त में है।

 पिछले दो चुनाव भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य रह चुके विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा व जिला कांग्रेस के अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम की बीच हुए हैं। रोचक बात यह है कि दोनों ही चुनाव जीत-हार के मसले को लेकर कोर्ट में पहुंच चुके हैं। 2008 के चुनाव में एक वोट से नीना वर्मा जीती थीं। विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के एक माह पहले ही नीना वर्मा का निर्वाचन कोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया। गौतम को विधायक का दर्जा दिया गया। उन्हें विधानसभा में सदस्य के रूप में शपथ भी दिलाई गई। 2013 के चुनाव में नीना वर्मा 11 हजार से अधिक मतों से विजयी हुईं लेकिन इस बार कर सलाहकार सुरेशचंद्र भंडारी ने एक चुनाव याचिका लगा दी।

नीना वर्मा का निर्वाचन फिर से शून्य घोषित हो गया। हालांकि उन्हें इस मामले में फिलहाल कोर्ट से स्थगन आदेश मिला हुआ है। वर्तमान में दोनों ही पार्टियों में भितरघात की स्थिति बनी हुई है। इस तरह के हालात में 2018 का चुनावी मुकाबला बेहद रोचक होना तय है। इस बार भी भाजपा से नीना वर्मा ही टिकट के लिए प्रबल दावेदार है और वही कांग्रेस से जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम चुनावी समर में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष बन जाने से उनके समर्थक पूर्व विधायक मोहन सिंह बुंदेला के पुत्र कुलदीप सिंह बुंदेला जो कि कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं वह भी अपना पुख्ता कर रहे हैं ।

इसी प्रकार भाजपा से दावेदारों में पूर्व जिला अध्यक्ष दिलीप पटोदिया व कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष राजीव यादव ने भी अपनी दावेदारी की है वहीं भाजपा से बगावत कर गत विधानसभा में निर्दलीय चुनाव लड़े नेता प्रभु राठौड़ व धार नगर पालिका अध्यक्ष पद हेतु निर्दलीय लड़े अशोक जैन की भाजपा में सशर्त वापसी के बाद पुनः दावेदारी कर दी है।

इस सीट पर ज्यादा कश्म कश की स्थिति रही तो पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा को भी मैदान में उतारा जा सकता है। यदि इस मुकाबले में दोनों ही पार्टियों ने उम्मीदवार बदले तो परिदृश्य अलग हो सकता है। वैसे यहां के मतदाता सत्ता के साथ जाने में भरोसा करते हैं। वैसे विधायक नीना वर्मा के कार्यकाल में सड़क पानी व बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से लोगों को निजात मिली है। शिक्षा के क्षेत्र में भी कई विद्यालयों व कॉलेजों का उन्नयन हुआ है। 1952 से लेकर अब तक यह नेता हुए विजयी धार विधानसभा क्षेत्र में 1952 के प्रथम निर्वाचन में कांग्रेस के खत्री विधायक निर्वाचित हुए ।

1957 में हिन्दू महासभा की ओर से बसन्त सदाशिव प्रधान, 1962 में कांग्रेस से कन्हैयालाल जैन, 1967 में जनसंघ से बसन्त सदाशिव प्रधान, 1972 में कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह नीमखेड़ा, 1977 में जनता पार्टी से विक्रम वर्मा, 1980 में भारतीय जनता पार्टी से विक्रम वर्मा, 1985 में कांग्रेस से मोहन सिंह बुंदेला, 1990 में भारतीय जनता पार्टी से विक्रम वर्मा, पुनः 1993 में भारतीय जनता पार्टी के विक्रम वर्मा, 1998 में कांग्रेस से करण सिह पंवार, 2003 में भारतीय जनता पार्टी से जसवंत सिंग राठौड़, 2008 में न्यायालय के आदेश से कांग्रेस के बालमुकुंद सिंह गौतम, 2013 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से नीना विक्रम वर्मा जिनका निर्वाचन न्यायालयीन आदेश से \" शून्य \" घोषित किया गया, किन्तु वर्तमान में स्टे के आदेश है) निर्वाचित हुए।

यहां यह स्पष्ट है कि धार विधानसभा से कोई भी राजनैतिक दल निर्वाचन में जीत की पुनरावर्त्ति केवल 1993 के निर्वाचन को अपवाद मानते हुवे नही कर सका हैं।अब देखना यह है कि इतिहास स्वयं को दोहराता है, या एक नए इतिहास की रचना होती है । हिन्दुस्थान समाचार/बच्चन

image