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प्रदेश के पिछड़ेपन को लेकर कमलनाथ ने दागा शिवराज सरकार पर चौथा सवाल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 23 2018 1:40PM
प्रदेश के पिछड़ेपन को लेकर कमलनाथ ने दागा शिवराज सरकार पर चौथा सवाल

 भोपाल, 23 अक्टूबर (हि.स.)। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के शिवराज सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया के जरिए किए जा रहे हमले जारी हैं। कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे 40 दिन 40 सवाल कैंपेन के चौथे दिन कमलनाथ ने शिवराज सरकार पर प्रदेश के पिछड़ेपन और बढ़ रही गरीबी के ग्राफ को लेकर चौथा सवाल दागा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर शिवराज सरकार पर कटाक्ष करते हुए लिखा ‘सवाल नंबर चार- ‘वो ही फैला रहे हैं स्वर्णिम से समृद्धि का झूठ, जिन्होंने लिया मध्यप्रदेश को लूट’ मामा जी,क्या समृद्धि का नारा भाजपा नेताओं और मंत्रियों के लिए गढ़ा? तो फिर बताओ मध्यप्रदेश की गरीबी का ग्राफ़ लगातार क्यों बढ़ा? 40 दिन 40 सवाल- मोदी सरकार के मुँह से जानिए, मामा सरकार की बदहाली का हाल। ‘हार की कगार पर,मामा सरकार’।

मोदी सरकार ही खोल रही है ‘स्वर्णिम से सम्रद्धि’ की पोल, बता रही है मामा जी का फूटा हुआ है ढोल। कमलनाथ ने एक के बाद एक ट्वीट करके अपने सवाल के समर्थन में तर्क और तथ्य दिए हैं।

1 ) मोदी सरकार ने राज्यों का संपत्ति सूचकांक जारी किया है, जिसमें मप्र के सिर्फ़ 15.8त्न परिवार ही इसके दायरे में आते हैं। इतनी खराब स्थिति बड़े राज्यों में छत्तीसगढ़ और बिहार की है।

जहाँ चंडीगढ के 78.5प्रतिशत, पंजाब के 60.7 प्रतिशत, हिमाचल जैसे राज्य के 31प्रतिशत परिवार संपन्न हैं। (लोकसभा - प्रश्न 174- 2/2/2018 )

2) मोदी सरकार की सितम्बर 2017 (एनएफएचएस) में जारी रिपोर्ट बताती है कि 2006 से 2016 के बीच मध्यप्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की जनसंख्या 27 प्रतिशत बढ़ गई है।

3)केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वे (2016) में मप्र में सिर्फ 36 प्रतिशत लोग पक्के घरों में रहते हैं।

4)मप्र में सिर्फ 23 प्रतिशत घरों में नल द्वारा पीने का पानी आता है(शहरों में 51 प्रतिशत और गांवों मे 11 प्रतिशत)।

5)मप्र के सिर्फ 30 प्रतिशत लोग खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते है।

6)मध्यप्रदेश में 57 प्रतिशत परिवार अभी भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं।

7) मोदी सरकार का नीति आयोग कहता है कि मध्यप्रदेश के 45 लाख़ 82 हज़ार 607 (40.33 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में बिजली नहीं है । (30 /4/2017)

8) हैंडबुक ऑफ स्टेटिस्टिक्स (आर बी आई) के अनुसार यू पी और बिहार के बाद सबसे ज़्यादा गरीब लोग मध्यप्रदेश में हैं - 2 करोड़ 34 लाख 6 हजार।

9) केंद्र की कृषि लागत और मूल्य आयोग की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट: मध्यप्रदेश में कृषि मजदूरी सबसे कम ,मात्र 210 रुपये है। बिहार में 251रु प्रति दिन, आंध्रप्रदेश में 291रु., महाराष्ट्र में 269 रु, पश्चिम बंगाल में 232रु कृषि मजदूर को मिलते हैं। पिछले 15सालों से मप्र में सबसे कम मजदूरी मिलती है।

10) मप्र में मनरेगा में दर्ज परिवार -68.25 लाख अर्थात मध्यप्रदेश की लगभग आधी आबादी मज़दूरी के लिए बाध्य।

2014-15 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,58,776(2.33 प्रतिशत )

2015-16 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-2,25,502(3.30 प्रतिशत)

2016-17 में 100दिन का पूरा रोजगार पाने वाले परिवार-1,40,990(2.1प्रतिशत)

2017-18 में 100 दिन का पूरा रोजग़ार पाने वाले परिवार - 1,34,724 (1.97 प्रतिशत)।

11)मोदी सरकार के नीति आयोग के सीईओ अमिताभकांत मध्यप्रदेश के विकास पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करते हुए अप्रैल 2018 में कहते हैं कि मध्यप्रदेश जैसे पिछड़े राज्यों के कारण देश पिछड़ गया।

हिन्दुस्थान समाचार/ नेहा/केशव

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