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पादरियों को मैदान में उतारकर ईसाई वोटों की फसल काटने को तैयार भाजपा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 3 2018 12:32PM
पादरियों को मैदान में उतारकर ईसाई वोटों की फसल काटने को तैयार भाजपा

संजीव 

आईजोल। ईसाई बहुल मिजोरम में किसकी सरकार बनेगी, यह यहां के ईसाई धर्मावलम्बी वोटर तय करते हैं। यहां की 87 फीसदी आबादी ईसाई है। यही कारण है कि यहां की राजनीति में चर्च की भूमिका अहम हो जाती है। चर्च का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कांग्रेस को मिलता रहा है, लेकिन अब भाजपा भी ईसाई वोटर को लुभाने के लिए हर पैंतरे आजमा रही है।

छवि सुधारने की कोशिश

यहां पांच बार चुनाव लडऩे के बाद भाजपा अब तक एक सीट भी नहीं जीत सकी है। वह इलाके को कांग्रेस मुक्त करने के अपने अभियान के तहत अपनी हिंदूवादी छवि सुधारने की कोशिश भी कर रही है। यही कारण है कि पार्टी ने 28 नवंबर को होने जा रहे विधानसभा चुनाव में दो पादरियों को टिकट दिया है। इनमें आईजोल पश्चिम-2 से एल आर कोलनी और लुंगलेई पूर्व सीट से एच लालरुआता को उतारा गया है। ये दोनों उम्मीदवार चर्च में पादरी हैं। स्थानीय स्तर पर इनका अच्छा खासा प्रभाव है। 

वोटर्स को लुभाने की ये कवायद

 इनके माध्यम से भाजपा ने ईसाई आबादी को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। दरअसल, राज्य में लंबे समय से काबिज कांग्रेस लोगों में भ्रम फैला रही है कि यदि भाजपा राज्य में सत्ता में आ गई तो ईसाइयत खतरे में आ जाएगी। चर्च भी भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार में पीछे नहीं हैं। चर्च द्वारा लोगों को बताया जा रहा है कि भाजपा सत्ता में आने के बाद जनता को धर्मांतरित कर हिन्दू बना देगी। इस दुष्प्रचार के कारण भाजपा को राज्य में अपना आधार बनाना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।

हालांकि भाजपा के स्थानीय नेता लोगों को भरोसा दे रहे हैं कि भाजपा शासित राज्यों में सभी धर्म, जाति और भाषा-भाषी को समान महत्व दिया जाता है। पार्टी धार्मिक भेदभाव न करके विकास को महत्व देती है। पड़ोसी नगालैंड भी ईसाई बहुल है। इस साल फरवरी में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 20 सीटों पर चुनाव लड़कर 12 सीटों पर विजय हासिल की थी।  दुष्प्रचार के कारण ही भाजपा ने नगालैंड से मंत्रियों और विधायकों को मिजोरम में चुनाव प्रचार के लिए भेजा है। ये सभी ईसाई हैं। इन सभी ने जनता को आश्वस्त किया है कि नगालैंड सरकार के तौर तरीके से किसी भी धर्म की जनता को कोई भी परेशानी नहीं है। सभी धर्मों को लोग वहां सुरक्षित हैं। 

भाजपा ने कीं जबरदस्त तैयारियां

इन चुनावों में भाजपा ने अपनी ओर से जबरदस्त तैयारियां की हैं। बूथ लेवल कमेटियों के गठन के साथ-साथ छोटे-छोटे शहरों में बूथ सम्मेलन का आयोजन किया गया है। संगठन स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाया गया है। भाजपा अपनी रणनीति में कितनी सफल रही, ये तो आने वाले चुनाव परिणाम बताएंगे। लेकिन एक बात तो तय है कि चुनाव के बहाने भाजपा की विचारधारा उत्तरपूर्व के इस राज्य के लोगों तक पहुंचने लगी है। 

कांग्रेस हारी तो हो जाएगा पूर्वोत्तर से सफाया

वहीं, पूर्वोत्तर का यह एकमात्र राज्य है, जहां पर कांग्रेस सत्ता में है।  अगर पार्टी विधानसभा चुनाव हार जाती है, तो पूर्वोत्तर से उसका सफाया हो जाएगा। कांग्रेस भी चुनाव में विजय के लिए फुलप्रूफ रणनीति में जुटी हुई है। पार्टी सीएम लालथनहवाला की अगुवाई में मैदान में उतरी है। पार्टी नेताओं का दावा है कि मिजोरम की जनता भाजपा के शासन को देख चुकी है। विभिन्न मोर्चों पर सरकार विफल रही है। महंगाई चरम पर है। कांग्रेस के लिए सबसे सुकून भरी बात यह है कि चर्च भी उसका समर्थन कर रहा है।

-हिन्दुस्थान समाचार

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