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भाजपा के लिए आसान नहीं है लथनहवला का वर्चस्व तोडऩा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 20 2018 1:37PM
भाजपा के लिए आसान नहीं है लथनहवला का वर्चस्व तोडऩा
संजीव
आईजोल, (हि.स.) मिजोरम के विधानसभा चुनाव के माध्यम से पूर्वाेत्तर में अपनी दमदार मौजूदगी दिखाने की कोशिशें कर रही भाजपा के लिए सीएम लथनहवला का वर्चस्व तोडऩा इतना आसान नहीं है। वे चार बार सीएम और नौ बार विधायक रह चुके हैं। जानें हर बार चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज कराने वाले लथनहवला का राजनीतिक कॅरियर... 

ऐसे जुड़े भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से
 
1942 में जन्में लथनहवला का ने 1964 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्कूल निरीक्ष के ऑफिस में रिकॉर्डर के रूप में अपने कॅरियर की शुुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कोऑपरेटिव बैंक में असिस्टेंट के तौर पर भी काम किया। बाद में वे मिजो नेशनल फ्रंट के आंदोलन से जुड़ गए। यह एक भूमिगत आंदोलन था और वे इसके विदेश सचिव बने। लथनहवला को गिरफ्तार कर लिया गया। 1967 में जेल से छूटने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए। पार्टी ने उन्हें आईजोल जिले का मुख्य संगठनकर्ता बना दिया।
 
जानें ये भी 
 
- 1973 में वह मिजोरम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चुने जाने के बाद से वे लगातार इस पद पर बने हुए हैं। 
- 1978 और 1979 में वह केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव में विधायक चुने गए।
- 1984 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत की हासिल की और वह राज्य के मुख्यमंत्री बन गए।
- 1986 में भारत और मिजोरम नेशनल फ्रंट के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया ताकि एमएनएफ के नेता पी. लालडेंगा को राज्य का सीएम बनाया जा सके। दरअसल यह प्रक्रिया समझौते का ही हिस्सा थी। इस दौरान लथनहवला को उप मुख्यमंत्री बनाया गया।
- मिजोरम को भारत का पूर्ण राज्य घोषित कर दिया गया।
- राज्य का पहला विधानसभा चुनाव 1987 में संपन्न हुआ। एक बार फिर वे विधायक चुने गए, लेकिन लालडेंगा की सरकार दलबदल की वजह से गिर गई और 1988 में वह राज्य के मुख्यमंत्री बने।
- 1989 और 1993 तक लगातार राज्य के मुख्यमंत्री बने रहे।
- 1998 में वह चुनाव हार गए। अपने राजनीतिक कॅरियर में यह उनकी पहली हार थी। 
- 2008 में एक बार फिर उनकी अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी। कांग्रेस ने इनकी अगुवाई में जबरदस्त जीत दर्ज की थी। 
- 2008 से लेकर अभी तक वह लगातार राज्य के मुख्यमंत्री बने हुए हैं।
- इसके पहले भी वह 1984 से लेकर 1986 तक और फिर 1989 से लेकर 1998 तक राज्य मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
- चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके लथनहवला 9 बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं।
- 2013 के चुनाव में मिजोरम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनकी अगुवाई में 40 सीटों में से 34 सीटों पर अपनी जीत दर्ज कराई थी।
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