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कांग्रेस अब भी नहीं उभर पा रही अपने संकुचन से, टिकट के लिए माथापच्ची

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 14 2018 8:05PM
कांग्रेस अब भी नहीं उभर पा रही अपने संकुचन से, टिकट के लिए माथापच्ची
उज्जैन, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उज्जैन जिले में जन चर्चा है कि कांग्रेस ने भी अच्छा चेहरा उतारा तो जीत-हार के समीकरण बदल जाएंगे। यह चर्चा भी है कि जिले की कुछ विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशी निवृत्तमान विधायकों को ही मौका देती है, तब भी कांग्रेस के एकजुट होने पर कांग्रेस लाभ में रहेगी। हाल ही में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक भोपाल में होने पर जो नए समीकरण बने, उसे आधार बनाकर जिले की सातों विधानसभा सीटों पर दावेदारों की संख्या अचानक बढ़ गई है।
 
पिछले पांच सालों से शहर, जिला और ग्रामीण कांग्रेस में सक्रिय नेताओं की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक थी। ब्लॉक स्तर तक जो नेता सक्रिय रहे, वे भी भोपाल और दिल्ली में बैठे अपने आकाओं की नजर में आने के लिए संघर्ष करते रहे तथा मीडिया में छपी कतरनों को आधार बनाकर अपने नंबर बढ़वाते रहे। भोपाल में पिछले दिनों संपन्न कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजयसिंह, अजयसिंह आदि की उपस्थिति के साथ अरुण यादव और सुरेश पचौरी को महत्व दिए जाने पर अचानक राजनीतिक उबाल आया।
 
जिले में वर्तमान में कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजयसिंह के समर्थक सक्रिय हैं। अब अरुण यादव, सुरेश पचौरी और अजयसिंह के समर्थक जो कि लंबे समय से रूको और देखो की नीति पर चल रहे थे, सक्रिय हो गए हैं। सभी का मानना है कि यदि पट्ठावाद चला तो एक-एक नेता एक-एक समर्थक को टिकट दिलवा ही देंगे। ऐसे में जो दौड़ में नहीं थे, उनका नंबर भी लग जाएगा।
 
भोपाल के सूत्र बताते हैं कि उज्जैन जिले की सातों सीटों की समीक्षा बड़े नेताओं ने एक बार पूरी कर ली है। नामों के जो पैनल बने हैं उनमें तीन या तीन से अधिक नाम नेताओं के सामने हैं। इधर कुछ नए दावेदारों ने भी ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। पीसीसी के सूत्रों के अनुसार सबसे पहले पैनल में जिले की सभी सीटों से तीन-तीन नामों तक सूची को समेटने का काम किया जाएगा। उसके बाद एक सर्वे करवाकर सिंगल नाम तय होगा। इस बीच सभी नेता चाहेंगे कि उनके समर्थकों की संख्या बढ़े।
 
यदि मैदानी स्थिति देखी जाए तो कांग्रेस की नगर, जिला और ग्रामीण इकाई के पुराने कद्दावर नेताओं का कहना है कि सिंधिया और दिग्विजय समर्थक दौड़ में आगे रहेंगे। कमलनाथ के समर्थकों की संख्या टिकट की दावेदारी में तीसरे नंबर पर आएगी। अजयसिंह, पचौरी और अरुण यादव के समर्थक दौड़ में कथित रूप से पिछड़ भी सकते हैं। ऐसे में गुटीय तालमेल किस प्रकार से होगा और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव कैसे लड़ेगी यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो जाएगा। पुराने जानकारों के अनुसार जिले की राजनीति लहर पर अधिक सवार रही है। ऐसे में पट्ठावाद होने पर जिताऊ प्रत्याशी मैदान में टिक पाएगा। आशीर्वाद पाकर पैराशूट से उतरा प्रत्याशी कार्यकर्ताओं में पैठ नहीं बना पाएगा। समर्थक यदि अपने नेताओं के चुनाव क्षेत्रों में चले गए तो कांग्रेस कार्यकर्ताविहीन पार्टी के रूप में नजर आएगी।
 
पार्टी के अनुभवी नेताओं के अनुसार इस बार जिले की सातों सीटों पर टिकट वितरण पट्ठावाद से हटकर पारदर्शिता के साथ किया गया और जीतने वाले चेहरे जनता के समक्ष में रखे गए तो संभव है कि जिले से कांग्रेस के खाते में बड़ी जीत निकलकर आ जाए। बूढ़ी आंखें चर्चा में आशावाद दिखाते हुए कहती हैं- अब बहुत हुआ, कांग्रेसियों को सरकार बनाने के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। यदि इस बार भी पिछड़ गए तो समझो आने वाले पांच सालों में कांग्रेस खड़ी भी नजर नहीं आएगी..?
 
हिन्दुस्थान समाचार / ललित / मुकेश/मयंक 
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