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चुनाव में दोनों पार्टियों के लिए कड़कनाथ कितना करेगा कमाल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 31 2018 7:42PM
चुनाव में दोनों पार्टियों के लिए कड़कनाथ कितना करेगा कमाल

आलोक द्विवेदी 

झाबुआ। मध्यप्रदेश का झाबुआ जिला जहां अपनी लोक सांस्कृतिक भगोरिये के कारण पहचाना जाता था, लेकिन वर्तमान में भगोरिये के साथ ही अब झाबुआ जिले की पहचान विशेष जाति के मुर्गे कड़कनाथ के कारण भी होने लगी है। हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और चुनाव बगैर कड़कनाथ के हो जाये ऐसा संभाव नही दिखाई दे रहा, क्योंकि चुनाव के समय में झाबुआ में दस्तक देने वाले हर आम से लेकर खास तक कड़कनाथ के स्वाद को चखना चहाते हैं और इसी कराण चुनाव के साथ ही कड़कनाथ मुर्गा की भी खूब डिमांड में है। यानी की झाबुआ जिले में चुनाव में कड़नकनाथ भी किल्लत का समना कडकनाथ के शोकिनों को करना पडेगा।

 
कड़कनाथ और भगोरियो है झाबुआ की पहचान
मध्यप्रदेश का झाबुआ जिला झाबुआ को भगौरिया और कड़कनाथ की वजह से पहचाना जाता है। कड़कनाथ एक विशेष प्रजाति का मुर्गा होता है। जो पूरी तरह से काला होता है। यहां तक की खून और मांस भी है। कम फैट और हाई प्रोटीन के साथ-साथ अपने लजीज स्वाद के कारण ये हमेशा डिमांड में रहता है। कड़कनाथ मुर्गे की डिमांड सर्दियों बढ़ जाती है, लेकिन इस बार की सर्दियां कड़कनाथ पर भारी पड़ने वाली हैं। सर्दियों के साथ इस बार चुनावी सरगर्मियां भी हैं। ऐसे कड़कनाथ मुर्गे के चाहने वाले खींचे चले आते हैं। सालों से कड़कनाथ मुर्गो लोगों को परोसने वाले कालम बताते हैं कि पिछले चुनावों की तरह इस बार भी कड़कनाथ की विशेष डिमांड है। डिमांड के साथ-साथ इसके दामों में भी खासा इजाफा होगा।

चुनाव के समय मुनाफा भी बढेगा
कड़कनाथ मुर्गों का व्यवसाय करने वाले अजय डामोर भी मानते हैं कि चुनाव में विशेष मांग के चलते इस बार मुनाफा अच्छा होगा। अभी 1000-1500 तक बिकने वाला मुर्गा चुनाव के वक्त 2500-3000 तक बिक सकता है। इसके कई और इस व्यवसाय से जुड़े लोग भी चुनाव में इसकी खपत में इजाफा होने की बात कह रहे हैं।

अधिकारी भी मानते है चुनाव के समय बढेगी मांग
झाबुआ समेत पूरे देश भर में जहां भी कड़कनाथ पहुंचता है उसकी अधिकर पूर्ति झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गी पालन केन्द्र से होती है। यहां कि यूनिट की उत्पादन क्षमता मांग के मुकाबले कम हैं। यही वजह है कि मांग बढ़ने पर उसकी पूर्ति संभव नहीं हो पाती और कड़कनाथ मुर्गे के दाम बढ़ जाते हैं।
 
कड़कनाथ मुर्गी पालन केन्द्र के डॉ दिवाकर भी मानते हैं कि सर्दियों में इस काले मुर्गे की खपत बढ़ती है, लेकिन चुनाव की वजह से इस बार मांग और बढ़ेगी। तो कषि विज्ञान केद्र के अधिकारी आई एस तोमर बताते है कि इन दिनों सर्दी का समय भी है और ऐसे मे चुनाव का बिगुल भी बज चुका है ऐसे में जिले में कई लोग बहार से आने वाले रहते जो कड़कनाथ मुर्गे के स्वाद से शोकिन होते है और इसी कारण जो कडकनाथ मुर्गा आम दिनो में महज दो या तीन नग बिकता है वह अब बीस से पच्चीस हो चुका है और आने वाले दिनो एक दिन मे पचास से सौ भी बिकेगे।
हमारा काम है लोन देना
 
जिला सहकारी बैक के महा प्रबंधक से पी एन यादव से बात की तो उन्होने बताया की सहकारी बैक के माध्यम 17 समितियों को पंजीयन किया था, लेकिन हमने दो समिति को लोन दिया है और दोनों पर कड़कनाथ पालकन का काम किया जा रहा है। ऐप्स के माध्यम से भी बुकिंग होती है और बुकीग के बाद कड़कनाथ समिति ही बेचती है। बैक का काम है उन्हे आर्थिक रूप से मदद करना।

चुनावी दोर में कड़कनाथ करेगा कमाल
 
झाबुआ का चुनाव कड़कनाथ के बिना सुना है कोई सा भी चुनाव को यहां पर आने वाले आम और खास सब को कड़कनाथ स्वाद अपनी ओर खिचता है और यही कारण है। चुनाव के समय तो कड़कनाथ की पहले से ही बुकीग हो जाती है। जहां तक कडकनाथ की बात करे तो कडकनाथ अपनी काले रंग, मांस और लजीज स्वाद के कारण कड़कनाथ मुर्गे की 12 महीनों मांग बनी रहती है। नॉनवेज के शौकीनों की कड़कनाथ की इस चुनाव में विशेष मांग है।
 
-हिन्दुस्थान समाचार
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