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बिछिया विधानसभा में बगावती बिगाड़ेंगे चुनावी फिजा, दावेदारों की लंबी सूची

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 17 2018 5:31PM
बिछिया विधानसभा में बगावती बिगाड़ेंगे चुनावी फिजा, दावेदारों की लंबी सूची
नीरज
मण्डला। मंडला जिले की बिछिया विधानसभा सीट पर इस बार रोचक मुकाबला दिखाई दे रहा है। भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर कांग्रेस कब्जा जमाने को आतुर है, तो वहीं गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी और आम आदमी पार्टी की दखलअंदाजी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी भी यहां से किस्मत आजमाने के लिए मैदान में कूद चुकी है। सभी दलों के कार्यकर्ता चुनावी रणनीति में काम कर रहे हैं, वहीं किसी एक दल की लहर यहां दिखाई नहीं दे रही है। कहीं कांग्रेस से नाराजगी दिख रही है, तो कहीं पर भाजपा से भी लोग नाराज हैं। वहीं कांग्रेस और भाजपा से दावेदारों की लंबी सूची इस बात की ओर इंगित कर रहीं हैं कि हम भी खेलेंगे या फिर खेल बिगाड़ेंगे। बगावत, भीतरघात और भारी लेन-देन इस विधानसभा चुनाव में यहां दिखाई देगा।
 
बिछिया विधानसभा का इतिहास है कि कभी एक दल का प्रतिनिधित्व दोबारा नहीं रहा है। इस चक्रव्हू को भाजपा कैसे तोड़ेगी? इस पर भी प्रदेश स्तर पर मंथन चल रहा है। मतदान प्रतिशत से लेकर उन कारणों को तलाशा जा रहा है, जिससे यह पता चल सके कि किन कारणों से इस विधानसभा से दूसरी बार प्रत्याशी नहीं चुना जाता। शनै:शनै: नामांकन की तारीख नजदीक आते ही राजनैतिक उठा-पटक दिखाई देने लगी है। वहीं दावेदार थक हारकर बैठ चुके हैं। लगातार बैठकें, प्रदर्शन, धरना ही नहीं दिल्ली, भोपाल, छिंदवाड़ा और जबलपुर के चक्कर काटकर थक चुके प्रत्याशी अब घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
पूरा चुनाव प्रत्याशी की छवि पर केन्द्रित हो गया है, वहीं आम आदमी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित कर चुनाव प्रचार आरंभ कर दिया है। यहां सभा आदि भी आप के द्वारा की जा चुकी है। जनपद सदस्य अशोक शाह धुर्वे को यहां से प्रत्याशी बनाये गए हैं तो वहीं गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी ने इंजी. कमलेश तेकाम को प्रत्याशी बनाया है, ये भी प्रचार-प्रसार में निकल चुके हैं लेकिन इस विधानसभा से प्रबल दावेदार चंद्रप्रकाश सिरसाम बंटी भैया ने बगावती तेवर दिखा दिये हैं। उन्होंने निर्दलीय लडऩे की पेशकश भी की है, अगर वे चुनाव लड़ते हैं तो गोंड़वाना पार्टी को दिक्कत हो सकती है।
 
वहीं, कांग्रेस से पूर्व विधायक नारायण सिंह पट्टा, जनपद अध्यक्ष घुघरी कौशल्या मरावी, मवई जनपद अध्यक्ष राजेश्वरी मनोटिया, जिला पंचायत सदस्य सावित्री धूमकेती के नामों पर पार्टी विचार कर रही है, जबकि भाजपा से जिला पंचायत सदस्य नीरज मरकाम, नगर परिषद् अध्यक्ष बिछिया बिजेन्द्र सिंह कोकडिय़ा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बखत सिंह पाटिया, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती मरावी के नामों पर पार्टी गहरा मंथन कर रही है। इधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय मंत्री संजय कुशराम, सरपंच नीतू मरकाम के साथ वर्तमान विधायक पंडित सिंह धुर्वे टिकिट की दौड़ में जुटे हुए हैं।
वहीं भाजपा कार्यालय में रायशुमारी बैठक आयोजित कर गोपनीय मतदान पदाधिकारियों से कराया गया है। मतदान में किसे कितने मत मिले इसका खुलासा भोपाल में होगा। इस दौड़ में पंडित सिंह धुर्वे काफी पीछे चले गये हैं। सूत्रों का कहना है कि सर्वे आदि में उन्हें काफी कम अंक मिले हैं, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोला है। वहीं राजनैतिक पंडितों का कहना है कि प्राय: सभी दलों ने अपनेे-अपने प्रत्याशी लगभग फाइनल कर लिये हैं लेकिन उनकी अधिकृत घोषणा नहीं कर रही है, जिसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि जितनी देरी से घोषणा की जायेगी उतनी ही कम बगावत होगी।
 
संभवत: 25 अक्टूबर तक प्रत्याशियों की घोषणा होगी लेकिन दलों को जिन्हें चुनाव लड़ाना है उन्हें महत्वपूर्ण निर्देश पार्टी की ओर दिये गये हैं, लिहाजा वे प्रत्याशी तन-मन-धन से जुट चुके हैं और लगातार जनसंपर्क के साथ कार्यक्रमों में आना-जाना कर रहे हैं, उन्हें खामोश रहने निर्देश भी दिये गये हैं। पूरा चुनाव धन और बल पर आकर टिक गया है। किसी पार्टी विशेष की लहर न होने के कारण ऊंट किस करवट बैठता है यह बिछिया विधानसभा में कुछ कहा नहीं जा सकता? गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा और विकास के दंश में समाहित इस विधानसभा का कोई मसीहा ही इस विधानसभा का विकास कर सकता है? वादों की लंबी सूची दिखाई देती है लेकिन उन वादों को पूरा करने में निर्वाचित जनप्रतिनिधि बौने साबित हुए हैं। आज भी मवई जनपद क्षेत्र में बिजली, पानी, रोजगार का अभाव है तो वहीं घुघरी बस स्टेण्ड नवनिर्माण की आस तक रहा है। मार्गों का रोना आम बात है तो वहीं पलायन और धर्म परिवर्तन के अनेक मामले सामने आ चुके हैं। नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में सरकार का ध्यानाकर्षण कराने में स्थानीय जनप्रतिनिधि बौने साबित हुए हैं।
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