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11 हजार से ज्यादा मतदाता नहीं करेंगे मतदान

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 18 2018 5:26PM
11 हजार से ज्यादा मतदाता नहीं करेंगे मतदान
आइजोल। देश के पांच राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे हैं। इनमें मिजोरम भी शामिल है। लेकिन हालात ये हैं कि यहां हजारों मतदाता वोट नहीं दे सकेंगे। ब्रू समुदाय के ये हजारों मतदाता वे हैं जो त्रिपुरा के छह राहत कैंपों में रह रहे हैं। पोलिंग बूथ कैंप से काफी दूर होने के कारण 11,000 से ज्यादा ये मतदाता वोट देने नहीं जाएंगे। यही नहीं भूख और खाने की कमी के कारण भी ये मतदाता वोट देने से पीछे हट रहे हैं।
 
गौरतलब है कि ब्रू समुदाय के लोग राज्य की 40 विधानसभा सीटों में से नौ में फैले हैं। त्रिपुरा में रह रहे 11,232 मतदाताओं में से मामित जिले के 8,777 मतदाता, 1732 लोग कोलासिब जिले के और लुगलेई जिले के 723 लोग शामिल हैं। 
 
विस्थापित है ब्रू समुदाय
 
1997 की हिंसा में विस्थापित हुए ब्रू समुदाय के लोग त्रिपुरा के छह राहत कैंपों में वर्षों से जीवन यापन करने को मजबूर हैं। हाल ही में केंद्र सरकार के फैसले के बाद यहां 1 अक्टूबर से खाद्य सामग्रियों की सप्लाई बंद कर दी गई है। इसके बाद यहां रह रहे ये लोग बदतर हालात में जी रह हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि लोग इन कैंपों को छोड़कर अपने घर लौट जाएं।
 
पोस्टल बैलट से वोटिंग की मांग
 
इस समुदाया की संस्था मिजोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) के नेता ब्रूनो म्शा के मुताबिक त्रिपुरा के इन छह कैंपों में रह रहे लोगों के लिए चुनाव आयोग को पोस्टल बैलट से वोटिंग करने की अनुमित देनी चाहिए। उनका कहना है कि यहां से मिजोरम जाकर वोटिंग करने के लिए ज्यादातर मतदाता समर्थ नहीं हैं। भूखे रहने को मजबूर लोगों के लिए इतनी दूर जाकर वोट करना आखिर कैसे संभव हो सकता है। उन्होंने आपत्ति जताई कि समुदाय ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पोस्टल बैलट से ही वोटिंग की थी तो इस बार ऐसा किए जाने में आखिर क्या परेशानी है? जानकारी के मुताबिक पोलिंग बूथ मिजोरम और त्रिपुरा को बांटने वाले गांव कन्हमुन में बनाए जाएंगे। यह बेस कैंप से 20 किलोमीटर और अंतिम कैंप से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। जबकि दूसरी ओर आयोग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इस बार त्रिपुरा में रहे ब्रू समुदाय के लोगों को मिजोरम में पोलिंग बूथ पर ही वोटिंग करनी होगी।
 
घर वापस भेजने की कोशिश नाकाम
 
1997 में हुई हिंसा के बाद मामित, कोलासिब और लुंगलेई जिलों विस्थापित लोगों में से 32,875 लोग त्रिपुरा में बने छह राहत कैंपों में रह रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा इन लोगों को इनके घर वापस भेजने की कोशिश नाकाम रही। केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर से इन कैंपों को मिल रही राहत और खाद्य सामग्री भी रोक दी। पिछले 21 साल से केंद्र सरकार इन लोगों पर वापस जाने और कैंप खाली करने का दबाव बना रही है, लेकिन ये लोग वापस जाने के एवज में जमीन और अच्छे पैकेज की मांग कर रहे हैं। 
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