Hindusthan Samachar
Banner 2 रविवार, अप्रैल 21, 2019 | समय 21:50 Hrs(IST) Sonali Sonali Sonali Singh Bisht

आप'' ने लैंडफिल साइट के विरोध में की एनजीटी से शिकायत

By HindusthanSamachar | Publish Date: Mar 27 2019 7:24PM
आप' ने लैंडफिल साइट के विरोध में की एनजीटी से शिकायत

रवि

नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में लैंडफिल साइट के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (आप) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का रुख किया है। आप ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम (इडीएमसी) द्वारा सोनिया विहार और घोंडा-गुजरान में लैंडफिल साइट बनाने के प्रस्ताव को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताते हुए बुधवार को इसके खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में शिकायत दर्ज करवायी है।

आप द्वारा एनजीटी को दी गई शिकायत में कहा गया है कि प्रस्तावित लैंडफिल साइट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 का उल्लंघन है। लैंडफिल साइट सोनिया विहार, पश्चिमी करावल नगर, सभापुर गांव, चौहानपट्टी, दयालपुर, अंकुर विहार और घोंडा जैसे घने आबादी वाले क्षेत्र इसके प्रभाव में आ रहे हैं। आप नेता और उत्तर-पूर्वी दिल्ली से लोकसभा उम्मीदवार दिलीप पांडे ने कहा कि 26 अप्रैल, 2018 को भी जब यह मुद्दा उठा था तब आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध किया था। पार्टी ने इसके खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन उस वक्त मामला रफा दफा कर दिया गया।

दिलीप पांडे ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा लैंडफिल साइट बनाने का आदेश जारी करना एनजीटी के 9 मार्च, 2016 के जारी आदेश के खिलाफ है, जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) एनजीटी की स्वीकृति के बिना नदी किनारे या बाढ़ प्रभावित इलाके में लैंडफिल साइट बनाने का आदेश नहीं दे सकता। पांडे ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नियम के मुताबिक उस क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित नहीं माना जाता, जहां पिछले सौ साल तक बाढ़ नहीं आयी हो। हालांकि वहां साल 2008, 2010 और 2013 में भी बाढ़ आ चुकी है।

ऐसे में डीडीए द्वारा जमीन दिया जाना कानून का उल्लंघन है। पांडे ने कहा कि जब पार्टी यह मामला लेकर एनजीटी के पास गई तब ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट मे भी चल रहा था। इसलिए एनजीटी ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में भेज दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए इसे वापस एनजीटी के पास भेजा कि ये एनजीटी द्वारा पारित नियमों का उल्लंघन है। ऐसे में इसकी सुनवाई एनजीटी ही करेगी। अब यह मामला फिर से एनजीटी के पास आ गया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि उन्हें यह कहा जा रहा है कि इस मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने इजाज़त दे दी है, जो गलत है। पार्टी के मुताबिक नीरी ने लैंडफिल साइट बनाने की अनुमति नही दीं बल्कि मृदा परीक्षण कर केवल इतना बताया था कि वहां लैंडफिल साइट बनाने पर जमीन पर दबाव बढ़ेगा, जिससे जमीन कितना नीचे धंस सकती है। इसी निर्देश को आदेश मानते हुए लैंडफिल साइट बनाने की अनुमति दे दी गई।

हिन्दुस्थान समाचार

लोकप्रिय खबरें
फोटो और वीडियो गैलरी
image