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ऑनलाईन ठगी में फंसा एसएससी छात्र,लाखों गवांए

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 10 2019 8:32PM
ऑनलाईन ठगी में फंसा एसएससी छात्र,लाखों गवांए
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर पश्चिमी जिले के मुखर्जी नगर इलाके में एक एसएससी का छात्र ऑन लाईन ठगी का शिकार हो गया। छात्र से कंपनी चार्ज बताकर कई बार लाखों रुपये बैंक में डलवा लिये। छात्र से करीब चार लाख 89 हजार तीन सौ रुपये ठगे गए। छात्र के बयान पर पुलिस ने बुधवार सुबह केस दर्ज कर लिया है। जिस फोन से पीड़ित को फोन आया था। उसको लेकर पुलिस आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। जानकारी के अनुसार पीड़ित करन सिंह अजमेर राजस्थान का रहने वाला है। मुखर्जी नगर में किराये के घर में रहकर यहां से वह एसएससी की पढ़ाई कर रहा है। करन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया बीते जनवरी महीने में उसे कहीं से पता चला था कि सरकार की ई गर्वनेस के तहत ग्राहक सेवा केन्द्र योजना है, जो स्टार्टअप के लिए काफी लाभदायक है। जिसके बाद 10 जनवरी को वेबसाइड सीएसपी बैंक मिरता डाट इन पर लागइन किया। जिसमें एक फार्म अप्लाई करने का ऑपशन आया। उस फार्म को भरकर भेज दिया। दूसरे ही दिन अंजान नंबर से उसे कॉल आया। कॉलर ने खुद को प्रमोद कुमार बताया। उसने खुद को सीएसपी बैंक का अधिकारी बताया। उसने बताया कि आपने एक फार्म अपलोड किया है। उसी बारे में आपसे बात करना है। कॉलर ने बताया कि अगर आप ब्रांच लेना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले 15 हजार छह सौ रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। यह सिक्योरिटी पांच साल के लिए होगी। इसके बदले कंपनी से आपको वेब कैमरा,फोन,प्रिंटर आदि मिलेगा। 75 सौ रुपये तनख्वाह और 22 सौ रुपये ऑफिस का किराया मिलेगा। इसके साथ इंटरनेट सेवा,बिजली का बिल व अन्य सुविधा हेतु किराया मिलेगा। विश्वास होने पर कंपनी के खाते में 78 सौ रुपये डाल दिये। कंपनी में बाद में एक बैंक खाता उसका खोला। अगले ही दिन कंपनी ने व्हटसअप पर एक एग्रिमेंट पेपर और एक फार्म भेजा। कॉलर ने बताया कि फार्म भरकर कंपनी की ई मेल आईडी पर भेज दो। फार्म को ई मेल पर भेज दिया। बाद में जब फार्म को पढ़ा तो उसमें जमा कराने की रकम डेढ़ लाख रुपये लिखी थी। प्रमोद से संपर्क करने पर इस रकम के बारे में पूछा गया, तो प्रमोद ने उसे रकम वापिस होने की बात कही। उसकी बातों में आकर पचास हजार रुपये और जमा करा दिये। इस तरह से प्रमोद के झांसे में आकर कई बार कंपनी के नामक पर चार लाख रुपये से ज्यादा जमा करा दिये। बाद में शक होने पर जब वेबसाइड पर दिये कलकत्ता पते पर गया तो पाया वहां पर ऐसा कोई ऑफिस ही नहीं है। आसपास के लोगों ने बताया कि करीब दो साल पहले ऑफिस बंद करके चले गए हैं। जब प्रमोद के एक अन्य साथी श्रीकांत को फोन पर संपर्क कर पैसे वापिस मांगे, तो श्रीकांत ने कहा ये राजस्थान नहीं बंगाल है। यहां पर जान से मार दिया जाता है। चुपचाप अपने घर चले जाओं। पीड़ित करन ने पुलिस को बताया कि गैंग इस तरह से ऑनलाईन ठगी कर सैकेंड़ों लोगों को बेवकूफ बनाकर करोड़ों रुपये ठग चुके हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी शर्मा
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