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जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में चार्जशीट पर दिल्ली सरकार एक माह में करेगी फैसला

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 5 2019 4:53PM
जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में चार्जशीट पर दिल्ली सरकार एक माह में करेगी फैसला
- कोर्ट को बताया- दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जल्दबाजी में और गोपनीय तरीके से चार्जशीट दाखिल की नई दिल्ली, 05 अप्रैल (हि.स.) । जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने के मामले में आज दिल्ली सरकार ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जल्दबाजी में और गोपनीय तरीके से चार्जशीट दाखिल किया। दिल्ली सरकार ने कहा कि वे एक महीने में इस संबंध में फैसला कर लेंगे। तीन अप्रैल को दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा था कि इस मामले में अनुमति देने के मामले पर फैसला लेने में एक महीने का वक्त लग सकता है। तब चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक सहरावत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वे यह बताएं कि आखिर कब तक इस मामले पर आप फैसला कर लेंगे। 30 मार्च को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कहा था कि इस मामले में केस चलाने के लिए अनुमति देना एक प्रशासनिक कार्य है और ये दिल्ली सरकार के पास लंबित है। तब चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक सहरावत ने कहा था कि आपका काम खत्म हो गया, हम दिल्ली सरकार से पूछेंगे कि देर क्यों हो रहा है। 29 मार्च को स्पेशल सेल के डीसीपी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे, जिससे कोर्ट नाराज हो गई थी और उन्हें 30 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। 11 मार्च को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि केस चलाने के लिए जरूरी अनुमति मिलने में दो-तीन महीने का समय लग सकता है। इस पर कोर्ट नाराज हो गया और कहा कि बिना अनुमति मिले चार्जशीट दाखिल करने की क्या हड़बड़ी थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी से केस का अपडेट दाखिल करने का निर्देश दिया था। 11 मार्च को दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया था कि इस मामले के जांच अधिकारी उपस्थित नहीं हैं, क्योंकि वो हादसे के शिकार हो गए हैं। कोर्ट को बताया गया था कि दिल्ली सरकार ने चार्जशीट को पढ़ने के लिए दो-तीन महीने का समय मांगा है। 28 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा था कि दिल्ली सरकार ने अब तक केस चलाने की अनुमति नहीं दी है । तब कोर्ट ने कहा था कि हम वीडियो देखेंगे और अगर सरकार अनुमति नहीं देगी, तो भी हम सबूत का वीडियो देखकर कार्रवाई करेंगे। छह फरवरी को ने कोर्ट दिल्ली पुलिस के चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि अभी चार्जशीट के लिए ज़रूरी मंजूरी दिल्ली सरकार से नहीं मिली है। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दायर करने से पहले अनुमति ले लेनी चाहिए थी। अब दिल्ली सरकार से कहिए वो जल्द मंजूरी दे। अनिश्चित समय तक ऐसे फ़ाइल को लटकाया नहीं जा सकता। 14 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। करीब 12 सौ पेजों के इस चार्जशीट में सीट में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को आरोपित बनाया गया है । चार्जशीट में सात अन्य कश्मीरी छात्रों के भी नाम शामिल हैं। चार्ज शीट में देशद्रोह, धोखाधड़ी,इलेक्ट्रॉनिक धोखाधड़ी , गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होना, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाया गया है। नौ फरवरी, 2016 को जेएनयू केपस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में कन्हैया कुमार , उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया गया था । फिलहाल यह तीनों जमानत पर हैं। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/दधिबल
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