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वर्तमान को किसी पुल की तरह जोड़ती है 'धूप की मुंडेर'

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 4 2019 10:28AM
वर्तमान को किसी पुल की तरह जोड़ती है 'धूप की मुंडेर'
नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स)। राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में बुधवार को अनघ शर्मा की ''धूप की मुंडेर'' कहानी संग्रह पर परिचर्चा एवं अंशपाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अनघ से जो बातचीत हुई, उससे पुस्तक का सार यह हैकि एक बदले जमाने और बदले परिवेश में कुछ ऐसा भी होता है जो उसे पूरी तरह अजनवी नहीं होने देता, बल्कि पूर्व से वर्तमान को किसी पुल की तरह जोड़ता प्रतीत होता है। ऐसा जिन रचनाकारों को पढ़कर, उनसे बात करते या उनका कहा सुनते लगा है, उनमें अनघ महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में जाने-माने लेखक प्रभात रंजन ने अनघ शर्मा से उनकी किताब के बारे में पूछा कि कहानी संग्रह में आगरा का जिक्र कई बार होने का कारण क्या है? इसके जवाब में अनघ ने कहा कि आगरा से मेरा भावनात्मक लगाव है। अनघ ने कहा कि जब मैंने इस किताब को लिखना शुरू किया तब तक मैंने आगरा और फिरोजाबाद शहर ही देखा था। यही दो जगहों को एक्सप्लोर किया था। यही कारण है कि मेरी कहानियों में आगरा है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रिय लेखक कुर्तुलुन हैदर जी हैं। मैं उनसे बहुत प्राभावित हूं। कुछ लोग मेरी कहानियों को पढ़ते हैं तो कहते हैं कि तुम्हारे लेखन में उनकी झलक दिखती है। मैंने उनकी आग का दरिया को गयारह से बारह बार पढ़ा है। प्रभात रंजन ने ''धूप की मुंडेर'' के बारे में अनघ से कहा कि आप युवा लेखक हैं। इसके बावजूद आपकी कहानियों में आपके जमाने की झलक नहीं दिखती। इसलिए मैं आपसे बहुत प्रभावित हूं। कार्यक्रम के अंत में नेहा और अभिनव सब्यसाची ने ''धूप की मुंडेर'' का अंशपाठ किया। उल्लेखनीय है अनघ शर्मा की किताब ''धूप की मुंडेर'' राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा एक जनवरी को प्रकशित की गई है। अनघ की यह पहली किताब है जो राजकमल से प्रकाशित की हुई है। अनघ ने होटल मैनेजमेंट में एमबीए किया है। वह वर्तमान में मस्कट में अध्यापक हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुभाषिनी/प्रभात
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