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लेखक के बोलने का सबसे अच्छा तरीका उसका लेखन: अल्पना मिश्रा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 1 2019 8:38PM
लेखक के बोलने का सबसे अच्छा तरीका उसका लेखन: अल्पना मिश्रा
नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स)। चर्चित लेखिका अल्पना मिश्रा ने कहा की ''अस्थि के फूल'' उपन्यास को लिखने के बाद मैंने महसूस किया कि लेखक के बोलने का सबसे अच्छा तरीका उसका लेखन होता है। यह बात उन्होंने हिंदी भवन में आयोजित ''अस्थि के फूल'' उपन्यास के परिचर्चा के अवसर पर कही। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड की जिन लड़कियों की कहानी पर यह उपन्यास आधारित है, उनकी दिक्कतों को देखकर मैंने निश्चय किया कि मैं उनकी कहानी जरूर कहूंगी। इसके लिये चाहे जितनी भी यातनाएं और कठिनाईयां सहनी पड़ें। आलोचक संजीव कुमार ने कहा कि इस उपन्यास को लिखने के लिए लेखिका के साहस को सलाम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “ इसे पढ़ते हुए यह पता लगता है कि यह ना जाने कौन सी संस्कृति है इस देश की जो औरतों को इतना रौंदती है।” लेखक एवं संपादक अभय कुमार दुबे ने उपन्यास की उपयोगिता पर बात करते हुए कहा कि इसमें 4 तरह के समय और 3 तरह की यथार्थ को दर्शाए गया है। इन सारे समय को स्पष्ट करना और इसे कलात्मक तरीके से लिखना इस उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड आंदोलन की बुनियाद और आदिवासी समाज के सपने के टुटने की दास्तान पर आधारित यह उपन्यास, साहित्य में अपनी एक विशेष पहचान बनाता है। कार्यक्रम के अंत में अपने अध्यक्षीय वक्तव्य को रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर निर्माला जैन ने कहा, “इस उपन्यास को लिखना अपने आप में एक चुनौती है ,इस पढ़ते हुए पता लगता है कि लेखिका ने इस उपन्यास पर कितनी मेहनत की है।” उल्लेखनीय है कि राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित अस्थि फूल उपन्यास आंदोलन और विस्थापन के बहुपरतीय सवालों से जूझता, झारखंड आंदोलन और वहां की औरतों के बाजार में बेचे जाने की दारुण कथा है। हिन्दुस्थान समाचार / रवि
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