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फर्जी सिमकार्ड गिरोह का पर्दाफाश

By HindusthanSamachar | Publish Date: Mar 29 2019 9:33PM
फर्जी सिमकार्ड गिरोह का पर्दाफाश
नई दिल्ली, 29 मार्च (हि.स.)। गैरकानूनी काम करना है तो मात्र छह सौ से लेकर चार हजार रुपये में फर्जी सिमकार्ड टेलिकॉम कंपनी के डिस्ट्रिब्यूटर और उनके साथियों से आसानी से मिल सकते हैं। नॉर्थ वेस्ट स्पेशल स्टॉफ ने ऐसे ही एक इंटरस्टेट गैंग का पर्दाफाश किया है। गैंग के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी टेलिकॉम कंपनियों से जुड़े हुए हैं। उनमें से एक डिस्ट्रिब्यूटर है। जबकि एक ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन कर रखी है। आरोपियों की पहचान मो.शकील, रामजी पटेल रूचित उर्फ पिंटू, विशाल, पंकज मनीष दाईमा और प्रिंस हिंदुजा के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से 203 फर्जी सिमकार्ड, 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कुछ फर्जी दस्तावेज, जिनसे सिमकार्ड दिये जाते थे। मो.शकील कन्नोज यूपी में एयरटेल कंपनी में मार्केट एसोसिएट के पद पर कार्यरत है। गैंग में दर्जनभर सदस्य हैं। सभी किसी न किसी टेलिकॉम में काम करते हैं। पिछले साल इटावा के विशाल और राहुल पंकज के सम्पर्क में आए थे किसी न किसी टेलिकॉम कंपनी के लिए काम करते हैं। इन्होंने यूपी में गैरकानूनी तरीके से सिमकार्ड का काम करने की योजना बनाई। विशाल ने रूचित को गैंग में शामिल किया। जिसको पैसों की काफी जरूरत थी। रूचित ने रामजी को संपर्क में लिया। रामजी कन्नोज में टेलिकॉम दुकान चलाया करता है। रामजी भोले-भाले लोगों को बेवकूफ बनाया करता था। जो उसके पास सिमकार्ड लेने आते थे। उनकी आईडी से चालाकी से मल्टीपल सिमकार्ड इशू कर लिया करता था। मो.शकील मल्टीपल कार्ड को इशू ही नहीं करने बल्कि कार्ड को बेचने में भी सहायता करता था। दिल्ली में इन कार्ड को रूचित महंगे दामों पर बेचा करता था। इस तरह से गैंग हर महीने ढाई से ज्यादा से ज्यादा सिमकार्ड बेचा करता था। अभी तक गैंग पिछले छह महीने में 15 सौ से ज्यादा सिमकार्ड बेच दिये हैं। दिल्ली आसपास के इलाके में पंकज,विशाल और मनीष सिमकार्ड को उन लोगों को दिया करता था। जो फर्जी कॉलसेंटर,वसूली करने वाले बदमाश व अन्य गैरकानूनी हरकतों में शामिल रहा करते थे। निर्माण विहार इलाके में फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाला प्रिंस भी गैंग के संपर्क में था। जिसको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके ऑफिस से 11 सिमकार्ड और चार मोबाइल फोन जब्त किये। प्रिंस से गैंग के कुछ और सदस्यों के बारे में भी पता चला है। जिसमें से एक उत्तम नगर इलाके में वसूली की वारदात में शामिल रहा है। जिसके खिलाफ मामला भी दर्ज हैं। वसूली के लिए वहीं सिमकार्ड इस्तेमाल में लाया गया था। पकड़ा गया आरोपी रूचित उर्फ मिंटू दसवीं कक्षा पास है। वह कन्नोज यूपी में रहता है। रूचित रामजी और शकील से फर्जी सिमकार्ड एक सौ तीस रुपये में लेता है। जबकि उसको दिल्ली में चार हजार रुपये तक में बेच दिया करता है। जबकि पंकज विशाल से करीब पांच सौ सिमकार्ड फर्जी तरीके से तीन सौ रुपये प्रति सिमकार्ड के हिसाब से खरीद चुका है। इन्हीं फर्जी सिमकार्ड को प्रिंस निर्माण विहार में कॉल सेंटर में इस्तेमाल करता था। प्रिंस गाजियाबाद के एक अजीत नामक युवक के संपर्क में आया था। जिसने उसका कॉल सेंटर की योजना बताई थी। प्रिंस लोन और इंश्योरेंस पॉलिसी आदि के लिए फोन कर लोगों से लाखों रुपये ठग चुका है। उत्तरी पश्चिम जिला की पुलिस उपायुक्त विजयंता आर्या ने बताया कि पिछले कुछ समय से स्पेशल स्टॉफ के सामने ऐसी बातें सामने आ रही थी। जिसमें फर्जी सिमकार्ड का इस्तेमाल कर वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था। इस बीच पता चला कि कन्नोज यूपी में रहने वाला व्यक्ति कुछ संदिगध नंबरों का इस्तेमाल भी कर रहा था। स्पेशल स्टॉफ इंस्पेक्टर की देखरेख में सब इंस्पेक्टर आनंद सिंह हेड कांस्टेबल सतेन्द्र,जोगेन्द्र कांस्टेबल सोमवीर,राहुल आदी को आरोपियों को पकडऩे का जिम्मा सौंपा गया। जांच में पता चला कि बीते जनवरी महीने में एक मोबाइल फोन वारदात के कुछ दिन बाद दोबारा से शुरू हुआ था। जांच टीम ने मामले में मो.शकील को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन जब्त किया था। जिसके बाद एक के बाद एक गैंग के बदमाश पकड़े गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टेलिकॉम कंपनियों के डिस्ट्रिब्यूटर पर महीने का टारगेट पूरा करने का दबाव होता है। वह अपने अंडर में काम करने वाले सेल्समैन पर दबाव बनाते हैं। जो गैरकानूनी तरीके से किसी का भी थोड़े ज्यादा रुपये लेकर सिमकार्ड दे दिया करते हैं। सेल्समैन अगर टारगेट पूरा नहीं कर पाता है तो उसको सैलरी पर भी असर पड़ता है साथ ही उसकी टेलिकॉम मार्केट में इमेज भी खराब होती है। अधिकतर सिमकार्ड बिहार,झारखंड,वेस्ट बंगाल से दिल्ली में काम करने आते लोगों के बनाए जाते हैं। जिनके पास उनकी कोई आईडी नहीं होती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी नाम और पते से सिमकार्ड क्रिमिनल इस्तेमाल करते हैं। जो एक बाद सिमकार्ड इस्तेमाल करने के बाद सिम को तोडक़र फैंक दिया करते हैं। जिसके बाद पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए गैंग पर शक है कि इन्होंने बिहार,झारखंड,यूपी आदि कई जगहों पर क्रिमिनलों को सिमकार्ड हजारों रूपये के लालच में मौहय्या कराएं हैं। जिनका इस्तेमाल सफेदपोश वसूली,हवाला का पैसा इधर से उधर करने आदि के लिए इस्तेमाल करते या फिर कर भी रहे हैं। आरोपियों से उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल में भी कई हैरान करने वाली बातें सामने आई है। फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी अपनी योजना को अंजाम देने या फिर अपने साथियों से संपर्क करने में इस्तेमाल किया करते हैं। कई बार सुरक्षा एजेसियों के हत्थे चढ़ आंतकवादियों से फर्जी सिमकार्ड खरीदने के बारे में पता चला है। जम्मू कश्मीर में साइबर क्रॉइम टीमें इसको लेकर काफी सर्तक रहती है। फिर भी आतंकवादी अपनी योजना को कई बार अंजाम दे बैठते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अनूप
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