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भारत ने पाकिस्‍तान से वापस लिया एमएफएन का दर्जा, अभी दोनों के बीच होता है 14 हजार करोड़ का कारोबार

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 15 2019 6:43PM
भारत ने पाकिस्‍तान से वापस लिया एमएफएन का दर्जा,  अभी दोनों के बीच होता है 14 हजार करोड़ का कारोबार
नई दिल्‍ली, 15 फरवरी (हि.स.)। जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद जहां पूरा देश गुस्‍से में है वहीं भारत सरकार ने भी पाकिस्‍तान के खिलाफ सख्‍त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार रणनीतिक तौर पर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के जरिए पाकिस्‍तान पर कूटनीतिक दबाव भी बनाने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ) की बैठक के बाद पाकिस्‍तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस लेने का फैसला किया गया और इस फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। दुनिया के कई देशों ने जिसमें खासतौर पर अमेरिका, चीन, रूस और श्रीलंका ने इस घटना की निंदा की है। आइए जानते हैं कि क्‍या होता है एमएफएन और इस दर्जे को वापस लेने का कितना असर होगा। क्‍या होता है एमएफएन का दर्जा और इसका असर एमएफएन यानी मोस्ट फेवर्ड नेशन एक खास दर्जा होता है। यह दर्जा कारोबार में सहयोगी राष्ट्रों को दिया जाता है। इसमें एमएफएन राष्ट्र को भरोसा दिलाया जाता है कि उसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव रहित कारोबार किया जाएगा। वैसे भी डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार ऐसे दो देश एक-दूसरे से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं कर सकते। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर व्यापार सहयोगी को खास स्टेटस दिया जाता है तो डब्‍ल्‍यूटीओ के सभी सदस्य राष्ट्रों को भी वैसा ही दर्जा दिया जाना चाहिए। भारत ने पाकिस्‍तान को कब दिया यह दर्जा भारत ने डब्‍ल्‍यूटीओ यानि विश्व व्यापार संगठन के बनने के एक साल बाद ही 1996 में पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया था। पाकिस्तान ने भारत को एमएफएन का दर्जा नहीं दिया है, ऐसे में लंबे वक्त से देश में पाकिस्तान से यह दर्जा वापस लिए जाने की मांग उठती रही है। जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने इसे वापस ले लिया है। भारत-पाक के बीच कितने का है होता है कारोबार भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ दो अरब डॉलर (14 हजार करोड़ रुपए) का व्यापार हो रहा है। अगर वर्ल्ड बैंक की 17, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट को देखें तो भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार को 37 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) तक बढ़ाया जा सकता है। दोनों देशों के बीच मुख्य तौर पर जिन चीजों का व्यापार होता है उसमें सीमेंट, चीनी, ऑर्गेनिक कैमिकल्स, कॉटन, मानव निर्मित तत्व, सब्जियां और कई तरह के फल, मिनरल फ्यूल, मिनरल ऑइल, नमक, ड्राइ फ्रूट और स्टील जैसे प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं। यह दर्जा वापस लिए जाने से पाक बड़ा नुकसान होगा। एमएफएन का दर्जा मिलने के क्‍या हैं फायदे दरअसल विकासशील देशों के लिए एमएफएन का दर्जा मिलना फायदे का सौदा है। इससे इन देशों को एक बड़ा बाजार मिलता है, जिससे वे अपने सामान को वैश्विक बाजार में आसानी से पहुंचा सकते हैं और इसमें उनकी एक्पोर्ट की लागत भी कम हो जाती है। साथ ही यहां पर उनके कारोबार के रास्ते में आने वाले रोड़े भी स्वत: ही दूर हो जाते हैं। इससे बाजार में कंपटीशन बढ़ता है। एमएफएन का दर्जा मिलने के क्‍या है नुकसान बता दें कि एमएफएन का दर्जा मिलने का सबसे बड़ा नुकसान तो यही है कि अगर किसी देश को यह दर्जा दिया जाता है तो फिर डब्‍ल्‍यूटीओ के सभी सदस्य देशों को भी यही दर्जा देना पड़ता है। इससे एक तरह की प्राइस वार शुरू हो सकती है और यह स्थिति घरेलू उद्योगों के लिए खतरनाक हो सकती है। ऐसे में कई देश, दुनिया के अन्‍य देशों से आने वाले सस्ते सामान के सामने अपने घरेलू उद्योगों को बचा नहीं पाते हैं। हिन्‍दुस्‍थान समाचार/प्रजेश शंकर \
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