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'अर्थ' फेस्टिवल में युवा पीढ़ी भारतीय कला एवं संस्कृति से हो रही रूबरू

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 10 2019 2:33PM
'अर्थ' फेस्टिवल में युवा पीढ़ी भारतीय कला एवं संस्कृति से हो रही रूबरू
नई दिल्ली, 10 फऱवरी (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र(आईजीएनसीए) में चल रहा ''अर्थ फेस्टिवल'' भारतीय कला एवं संस्कृति का सबसे बड़ा महोत्सव बन चुका है। महोत्सव में युवाओं को भारतीय कला संस्कृति, इतिहास, रीति रिवाज से परिचित कराने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। युवाओं को प्राचीन और आधुनिक युग से कनेक्ट करने के लिए कई सेमिनारों, कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। फेस्टिवल में उत्तर प्रदेश का सांझी पेपर कटिंग, हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा मिनिएचर, राजस्थान का पॉटरी, कर्नाटक से चित्र पेंटिंग की वर्कशॉप आयोजित की गई है, जिसमें महोत्सव में भाग लेने वाले दर्शक वर्कशॉप के माध्यम से इसके गुर भी सीख रहे हैं। वर्कशॉप में बच्चे और बूढ़े सभी खुले मन से हिस्सा ले रहें हैं और बारीकियों को जान रहे हैं। इसके अलावा तीन दिवसीय इस फेस्टिवल मे देशभर के लेखक, बुद्धिजीवी, डिप्लोमेट, राजनेता, पत्रकार, कलाकार सेमिनारों में हिस्सा ले रहे हैं ताकि भारतीय संस्कृति से देश की युवा पीढ़ी रूबरू करा सकें। इसी कड़ी में ‘नारीवाद और परंपरा संगत या बाधा’ विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, अभिनेत्री रवीना टंडन और लावन्या वेसमानी ने हिस्सा लिया। नारीवाद और उसकी सक्रियता पर पैनल में बात करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं की क्षमता पर कभी भी सवाल नहीं उठाए जा सकते। इतिहास गवाह है कि जब-जब पुरुषों पर मुसीबत आई है महिलाएं बहन, पत्नी और एक मां के रूप में उनके साथ खड़ी रही हैं। रानी लक्ष्मीबाई अपने पुत्र को सीने से बांधकर युद्ध भूमि में कूद गई थीं। उनका यह साहस महिलाओं की क्षमता को दर्शाता है। साथ ही स्मृति ने अपने टीवी कलाकार के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि आपके बच्चे क्या करेंगे और क्या बनेंगे यह टीवी नहीं, बल्कि आप तय करेंगे। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अपने बच्चों के लिए समय जरूर निकालने के लिए भी कहा। अभिनेत्री रवीना टंडन ने चर्चा के दौरान नारीवाद और उनकी क्षमता पर बोलते हुए कहा कि आज के दौर में महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होने में समर्थ हैं और खड़ी भी हैं। अपने संघर्षों के बल पर खुद को साबित करतीं महिलाएं सभी परंपराओं का सम्मान भी करती हैं। अर्थ फेस्टिवल की संस्थापक श्रेयसी गोयनका ने अर्थ फेस्टिवल के बारे में बात करते हुए कहा, ''मैं कार्य़क्रम की भारी सफलता से खुश हूं। दर्शकों के बीच संस्कृति और कला के प्रति जुनून और प्यार को देखना अद्भुत है। मैं उन सभी वक्ताओं और कलाकारों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने हमारे साथ हाथ मिलाया और इस महोत्सव के पीछे के उद्देश्य को समझा।'' हिन्दुस्थान समाचार/सुभाषिनी/आकाश
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