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एक लाख जवान संभालेंगे नक्सल प्रभावित बस्तर विधानसभा चुनाव की कमान

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 5 2018 4:23PM
एक लाख जवान संभालेंगे नक्सल प्रभावित बस्तर विधानसभा चुनाव की कमान
जगदलपुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। आगामी 12 नंवबर को होने जा रहे विधानसभा चुनाव, सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। चुनाव प्रक्रिया के प्रारंभ से ही नक्सली बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। अब तक नक्सलियों ने दो बड़े हमले किए हैं, जिसमें कुल 7 जवान शहीद हुए हैं, जबकि दूरदर्शन के एक कैमरामैन की मौत हो चुकी है। केंद्र सरकार ने बस्तर में नक्सलियों का उन्मूलन करने के लिए राज्य के 25,000 पुलिस कर्मियों के अलावा अर्धसैनिक बल के करीब 55,000 जवानों को तैनात किया है। आसन्न चुनाव के निर्विघ्न संपादन के लिए 1 लाख अतिरिक्त फोर्स की तैनाती हुई है। नक्सलियों ने 2018 के चुनाव को लेकर बहिष्कार का ऐलान किया है। जगह-जगह बैनर पोस्टर के माध्यम से चुनाव का बहिष्कार करते हुए मतदाताओं को चुनाव में शामिल नहीं होने चेतावनी दी है। बस्तर में चुनाव आयोग तथा सुरक्षा बलों के लिए चुनाव संपन्न कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। करीब 40,000 वर्ग किलोमीटर में फैले बस्तर इलाके में लौह-अयस्क का प्रचुर भंडार है। जनजाति बहुल इस इलाके में 12 विधानसभा क्षेत्र हैं। 1980 के दशक के आखिर से यह बड़े नक्सलियों का पनाहगाह रहा है। बस्तर में नक्सली अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके प्रभाव का क्षेत्र काफी सिमटकर रह गया है, इसीलिए बौखलाहट में चुनाव की गहमागहमी के दौरान वे कुछ बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं। वे राजनेता, नौकरशाह, सुरक्षाकर्मी, मतदानकर्मियों या आम लोगों को बड़ा शिकार बनाना चाहते हैं, क्योंकि चुनाव को लेकर इलाके में इनकी आवाजाही शुरू हो गई है। बस्तर संभाग में चुनाव के दौरान नक्सली गतिविधियां तेज हो जाती हैं। चुनाव बहिष्कार के साथ-साथ कई संगीन घटनाओं को अंजाम देते हैं। यहां तक कि विगत चुनाव के दौरान हेलिकॉप्टर को भी अपना निशाना बना चुके हैं, जिसमें एक इंजीनियर की मौत हो गई थी। हालांकि अब धीरे-धीरे घटनाएं कम होती जा रही हैं, परन्तु बारूदी सुरंग का सबसे ज्यादा खतरा बना रहता है। 2003 में हुए सर्वाधिक 85 हमले अधिकारिक जानकारी के अनुसार 2003 विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने जमकर उत्पात फैलाया। आंकड़े बताते हैं कि 2003 के विधानसभा चुनाव में संभाग के सातों नक्सल प्रभावित जिलों में 85 हमले किए गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कांकेर जिले में 18, बीजापुर में 40, नारायणपुर में 13, कोंडागांव में 3 और सुकमा में 13 बड़े हमलों को नक्सलियों ने अंजाम दिया है। वर्ष 2003 के चुनाव में 16 विस्फोट, 27 मतदान दल पर फायरिंग, 47 ईवीएम मशीनों की लूट और 2 थानों में हमला किया गया, जबकि इस वर्ष सुरक्षाबलों के 6 जवान शहीद हुए और 1 घायल। नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार के मद्देनजर राजनैतिक दलों के 2 नेताओं सहित 1 आम नागरिक की हत्या कर दी गई, नक्सलियों ने 4 वाहनों में आग लगाई। सर्चिंग के दौरान 2 आईईडी और 2 डेटोनेटर जप्त किए गए, जबकि फोर्स और नक्सलियों के बीच 13 मुठभेड़ें हुईं। 2008 में 10 जवानों की हुई थी शहादत 2003 के मुकाबले नक्सलियों ने 2008 में अपनी गतिविधियां तेज कर दीं। आंकड़े बताते हैं कि चुनाव को प्रभावित करने संभाग के सातों जिलों में नक्सली हमले हुए। आकड़ों के अनुसार बस्तर में 5, दंतेवाड़ा में 9, कांकेर जिले में 20 ,बीजापुर में 12, नारायणपुर में 11, कोंडागांव में 17 और सुकमा में 18 नक्सली हमले हुए। इस दौरान नक्सलियों ने 20 बारूदी विस्फोट किए। पुलिस व मतदान पार्टी पर कुल 57 हमले हुए। सुकमा के पोड़िया में हेलीकॉप्टर में भी नक्सलियों ने फोयरिंग की थी, जिसमें एक इंजीनियर की मौत हुई थी। इसी प्रकार 22 ईवीएम मशीनें लूटी गईं। इस वर्ष 4 चौकी-थानों पर हमले किए गए, जिसमें सुरक्षा बलों के 10 जवान शहीद हुए, जबकि घायलों की संख्या 16 थी, एक मतदान कर्मी भी घायल हुआ था। 2008 के विधानसभा चुनाव में 3 राजनीतिक दलों के नेताओं की हत्या कर दी गई थी, जबकि एक एंटी लैंडमाइन व्हीकल को उड़ा दिया गया था तथा एक वाहन में आग लगा दी गई थी, साथ ही साथ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से लूट व उनके वाहनों पर आगजनी जैसी घटना को अंजाम दिया गया। इस वर्ष पुलिस और नक्सलियों के बीच 55 मुठभेड़ें हुईं, जिसमें 3 नक्सली मारे गए थे तथा 16 नक्सली गिरफ्तार किए गए, 9 हथियार भी इस दौरान जब्त किए गए थे। एक नक्सली कैम्प पर रेड, सुरक्षा बलों ने 18 आईईडी तथा 8 डेटोनेटर सहित तीन कारतूस बरामद किया था। 2013 में आई थी एकाएक नक्सली घटनाओं में गिरावट 2003 और 2008 के मुकाबले 2013 के विधानसभा चुनाव में नक्सली हमलों में गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2013 में संपन्न विधानसभा चुनाव में नक्सलियों ने कुल 35 हमले किए। नक्सलियों द्वारा 21 मतदान दल पर 8 विस्फोट किए गए थे। इस वर्ष 3 सुरक्षा बलों के जवान शहीद हुए, जबकि 8 घायल हुए थे। 1 आम नागरिक की हत्या और 1 घायल के मामले दर्ज हैं। एक वाहन में आगजनी तथा एक स्थान पर राजनीतिक कार्यकर्ता से लूट की घटना हुई थी। कुल 19 नक्सली मुठभेड़ में 3 नक्सलियों की गिरफ्तारी तथा एक हथियार जप्त किया गया, जबकि 13 आईईडी व 3 डेटोनेटर बरामद किए गए थे। हिन्दुस्थान समाचार/सुधीर/चंद्र नारायण/बच्चन
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