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कांग्रेस का चुनावी नारा उसी पर पड़ रहा भारी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 17 2018 5:03PM
कांग्रेस का चुनावी नारा उसी पर पड़ रहा भारी
हरीश
कोरबा। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का चुनावी नारा ‘वक्त है बदलाव का’ उसके ही गले की फांस बन गया है। कोरबा जिले में कांग्रेस के इस नारे का उपयोग उसके ही खिलाफ शुरू हो गया है।
 
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव-2018 के लिए ‘वक्त है बदलाव का’ नारा दिया है। इस नारे के पीछे पार्टी का आशय प्रदेश में सत्ता परिवर्तन से है। लेकिन इसका दूसरा पहलू बेहद खतरनाक है। जिले के जिन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक हैं, वहां यह नारा कांग्रेस के खिलाफ ही इस्तेमाल शुरू हो गया है।
कोरबा जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से तीन पर पिछले चुनाव में कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया था। भाजपा को सिर्फ एक सीट कटघोरा में सफलता मिली थी। अब विधानसभा चुनाव फिर सिर पर है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तिथि घोषित कर दी है। इसके साथ ही जिले में कांग्रेस की मुसीबतें शुरू हो गयी हैं। सबसे पहले पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उइके ने पार्टी के चुनावी नारा ‘वक्त है बदलाव का’ को सार्थक करते हुए कांग्रेस से पाला बदलकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। यानि पाली तानाखार में बड़ा बदलाव को मूर्त रूप दे दिया।
 
इधर इस घटनाक्रम के बाद कोरबा और रामपुर विधानसभा क्षेत्र में भी इस नारा का कांग्रेस के खिलाफ उपयोग शुरू हो गया है। विपक्षी कार्यकर्ता इस नारा को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और विधानसभा क्षेत्र में बदलाव की नींव रखने में जुट गये हैं। प्रचार किया जा रहा हैं कि कांग्रेस के नेता स्वयं कोरबा और रामपुर क्षेत्र मेंं बदलाव देखना चाहते हैं। इसके पीछे वे कांग्रेस नेताओं के कथित अर्न्तकलह को मुख्य कारण बता रहे हैं। बहरहाल कांग्रेस का चुनावी नारा उसी पर भारी पड़ जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
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