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चुनावी शोरगुल से सर्वथा अछूता है नक्सलगढ़ अबूझमाढ़

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 22 2018 2:19PM
चुनावी शोरगुल से सर्वथा अछूता है नक्सलगढ़ अबूझमाढ़

सुधीर

नारायणपुर। अबूझमाड़ में चुनावी शोरगुल नहीं है वरन् पूरे क्षेत्र में एक रहस्यमयी खामोशी विद्यमान है। जिससे मतदाताओं के रूझान का पता नहीं चल रहा है। एक ओर अबूझमाड़ को अपना गढ़ बनाने वाले नक्सली हैं और दूसरी ओर उनके किले को भेदते हुए सुरक्षा बलों के जवान हैं। इस क्षेत्र में इसीलिए राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता जाने में हिचकते हैं, जिसका परिणाम है कि क्षेत्र में रहस्यमयी शांति बनी हुई है।

बस्तर संभाग का अबूझमाड़ एक ऐसा अंचल है जहां नक्सलियों ने लंबे अरसे से कार्य करते हुए अपने प्रभाव व अपने आतंक को स्थापित किया है। यह अंचल ऐसा है जो दुरूह और दुर्गम होते हुए सुरक्षाबलों के लिए भी इसमें प्रवेश करना चुनोती भरा कार्य है। नक्सली आतंक यहां इतना अधिक है कि गत सप्ताह माड के कोहकामेटा में लगने वाले साप्ताहिक बाजार का हाल बेहाल रहा और नक्सलियों के फरमान से खरीददार ग्रामीण इस बाजार में गये ही नहीं।

इसके कारण इस बाजार में पहुंचने वाले व्यापारियों को निराशा हाथ लगी और व्यापारियों को खाली हाथ आना पड़ा। इस स्थिति में यदि इस अबूझमाड़ में चुनाव का प्रतिशत बढ़ता है और ग्रामीण वोट देते हैं तो नक्सली निश्चित ही इसे अपना प्रभाव कम होता देख कर आकेंगे। वैसे इस क्षेत्र के ग्रामीण अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

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