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गरीब एवं मध्यम वर्ग के साथ है मोदी सरकार: जेटली

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jan 11 2019 8:46PM
गरीब एवं मध्यम वर्ग के साथ है मोदी सरकार: जेटली

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नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकार की कोशिश देश के गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों की जिंदगी को बेहतर करने की रही है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण प्रदान करने वाला संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया है। यह जल्द ही भारत के संविधान का एक हिस्सा बन जाएगा। मोदी सरकार ने हर ग्रामीण गरीब को घर देने का वादा किया है। वर्तमान में ग्रामीण भारत में प्रति वर्ष लगभग 50 लाख घर बनाए जा रहे हैं। 2022 तक, हर गरीब परिवार के सिर पर छत होगी। अधिकांश भारतीय गांवों को पक्की सड़क द्वारा जोड़ा गया है। भारत के मध्यम वर्ग के लिए, पिछले पांच वर्षों में, एक भी कर नहीं बढ़ाया गया है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सोशल मीडिया पर लिखी अपनी एक लंबी पोस्ट में मोदी सरकार के गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अबतक के कार्यों, योजनाओं का जिक्र किया।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने लिखा कि भारत में जाति को सामाजिक या ऐतिहासिक उत्पीड़न के प्रमुख निर्धारक के रूप में माना जाता था। हालांकि, गरीबी एक धर्मनिरपेक्ष मानदंड है। 10 प्रतिशत गरीबों के लिए किसी भी तरह से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रखे गए 50 प्रतिशत आरक्षण को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इंद्रा साहनी मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि 50 प्रतिशत मानदंड संविधान के अनुच्छेद-16(4) में परिकल्पित जाति आधारित आरक्षणों पर ही लागू होता है। बहरहाल, गरीबी आधारित आरक्षण के एजेंडे को लागू करने का प्रधानमंत्री का निर्णय सामान्य श्रेणियों में गरीबों के लिए सबसे बड़ी चिंता है और गरीबी को समाप्त करने की आवश्यकता है। प्रमुख विपक्षी दल ने इस मुद्दे पर झूठी सहानुभूति दिखाई।

एनडीए के दौरान राज्य के वित्त पोषण को प्रति वर्ष 9,000 करोड़ रुपये (पूर्व यूपीए) से बढ़ाकर 7,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। प्रत्येक गांव का विद्युतीकरण किया गया है और सभी इच्छुक आवास परिवारों को, जिनमें बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है, को प्रदान किया गया है। ग्रामीण स्वच्छता 39फीसदी से बढ़कर 98फीसदी हो गई है। कोयले और लकड़ी से रसोई गैस में खाना पकाने के तरीके को बदल दिया गया है। गरीबों को उज्जवला योजना के तहत समान उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपीए द्वारा खर्च किए जा रहे खर्च से लगभग दोगुना मनरेगा का खर्च 6000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत' को भारत की 40% आबादी पर लक्षिताता है, जो आर्थिक सीढ़ी के सबसे निचले बिंदु पर हैं। उनमें से प्रत्येक को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की कवरेज के साथ अस्पताल में इलाज मुफ्त मिल सकता है। किसानों के लिए, ब्याज अधिरचना पर खर्च को दोगुना करने के अलावा, 99 अधूरी सिंचाई योजनाओं को पूरा करना, किसान को फसल बीमा योजना देना, सरकार ने अधिसूचित फसलों के लिए 50% पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करके किसान की मदद करने का इरादा व्यक्त किया है। मैंने हालिया लेख में, सरकार द्वारा लेबर, ग्रेच्युटी, बोनस, न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, ईएसआई, सामाजिक क्षेत्र पेंशन, आंगनबाड़ियों और आशा कार्यकर्ता आदि के प्रावधानों को सुधारने/उदार बनाने के संदर्भ में उठाए गए श्रम-विरोधी कदमों पर प्रकाश डाला है। वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) एवं अन्य करों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लिखा कि अप्रत्यक्ष करों को जीएसटी में एक में मिला दिया गया है। जीएसटी भारत में सबसे महत्वपूर्ण ‘उपभोक्ता अनुकूल उपाय’ है। अधिकांश वस्तुओं के करों में कमी लाई गई है। तीन लाख रुपये तक की आय वालों को कोई टैक्स नहीं देना होता है। सभी कर्मचारियों को रुपये 40,000/- मानक कटौती दी गई है। इसी तरह, आवास, बीमा और अन्य बचत साधनों में सभी निवेश पिछले चार वर्षों में बढ़ाए गए हैं। मध्यम वर्ग के लिए आवास के लिए सब्सिडी को उदार बनाया गया है। सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के त्वरित कार्यान्वयन से लाभ हुआ है, सेवाओं को ओआरओपी के कार्यान्वयन से लाभ हुआ है, पेंशनरों को नई पेंशन योजना से लाभ हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार

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