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सदन में पीआरसी रिपोर्ट पर सिर्फ चर्चा होनी थी, कानून नहीं बनाया जाना था: मुख्यमंत्री खांडू

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 23 2019 4:09PM
सदन में पीआरसी रिपोर्ट पर सिर्फ चर्चा होनी थी, कानून नहीं बनाया जाना था: मुख्यमंत्री खांडू
इटानगर, 23 फरवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को कहा कि विधानसभा में पर्मानेंट रेसिडेंसियल सर्टिफिकेट (पीआरसी) रिपोर्ट पर सिर्फ चर्चा होनी थी, अभी इसको लेकर कानून नहीं बनाया जाना था, लेकिन राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर उत्पन्न स्थिति को देखते हुए इसको सदन में पेश नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने निजी आवास पर शनिवार को एक संवददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पीआरसी के मुद्दे के समाधान के लिए मंत्री नाबाम रेबिया के नेतृत्व में गठित संयुक्त उच्चस्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। रिपोर्ट पर कैबिनेट में चर्चा हुई थी। इसके मद्देनजर रिपोर्ट को सदन में पेश कर सिर्फ उस पर चर्चा की जानी थी। इसको अभी कानूनी रूप देने के लिए सदन में नहीं लाया गया था, लेकिन राज्य में इसको लेकर उपजे हालात को देखते हुए सरकार ने रिपोर्ट को सदन में पेश नहीं करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि पीआरसी का यह मुद्दा नया नहीं है। यह काफी पुराना मामला है। इसको लेकर अब तक तीन कमेटियां गठित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पहले की दो कमेटियों ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी थी। नबाम रेबिया कमेटी ने ही अपनी पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता व संगठनों से चर्चा व रजामंदी के बाद ही कमेटी की रिपोर्ट को सदन में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चांग्लांग जिले के बरडूमसा व विजय नगर तथा नामसाई जिले के लेकंग इलाके में रहने वाले गैर अरुणाचलियों को पीआरसी देने की बात कमेटी के रिपोर्ट में शामिल है। इसलिए इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी बातों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने व कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश को देश में शांतिप्रिय राज्य के रूप में जाना जाता है, इसलिए राज्य की इस गरिमा को सभी को मिल-जुलकर कायम रखना होगा। उल्लेखनीय है कि पीआरसी के मुद्दे पर राज्य के 16 छात्र संगठनों ने गुरुवार से 48 घंटे के इटानगर व नाहरलगून बंद का आह्वान किया था। बीती रात को आंदोलनकारियों द्वारा 30 से अधिक वाहनों को जलाने की घटना के बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। आंदोलनकारी बेकाबू हो गए, जिसके चलते बीती रात 09 बजे के असपास पुलिस के द्वारा की गई हवाई फायरिंग में एक आंदोलनकारी की मौत व एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसके चलते बंद को 72 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा कमेटी की रिपोर्ट को सदन में पेश नहीं किए जाने के आश्वासन के बाद बंद वाले इलाकों में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। सड़कों पर छिटपुट गाड़ियां चलती दिख रही हैं। राजधानी इलाके में अर्धसैनिक बलों की 07 कंपनियों को तैनात किया गया है। राजधानी इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं शुक्रवार से ही बंद हैं। हिन्दुस्थान समाचार/तागू/अरविंद/बच्चन
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