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परमार्थ को समर्पित होता है संतों का जीवन: श्यामसुन्दर दास

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 15 2019 7:03PM
परमार्थ को समर्पित होता है संतों का जीवन: श्यामसुन्दर दास
हरिद्वार, 15 अप्रैल (हि.स.)। श्री जगदीश आश्रम के वार्षिकोत्सव एवं संस्थापक स्वामी शम्भुदेव महाराज के 44वें निर्वाण दिवस सोमवार को मनाया गया। इस अवसर पर स्वामी श्यामसुन्दर दास शास्त्री ने कहा कि संतों का जीवन परमार्थ को समर्पित होता है। स्वामी शम्भुदेव महाराज उच्च कोटि के संत होने के साथ-साथ संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान भी थे। उन्होंने जगदीश आश्रम की स्थापना कर धर्म प्रचार के साथ-साथ अनेक सेवा प्रकल्पों को भी प्रारम्भ किया। उनकी परम्पराओं को आगे बढ़ाते हुए उनके शिष्य स्वामी शांतानन्द शास्त्री महाराज ने अपने गुरूदेव की पुण्य स्मृति में स्वामी शम्भुदेव संस्कृत विद्यालय की स्थापना कर संस्कृत के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर स्वामी हरिचेतनानन्द महाराज ने कहा कि नश्वर संसार में प्राणी चोला बदलता है। महापुरुष अपने जीवनकाल में किये गये महान कार्यों सदैव हमारी स्मृतियों में जीवन्त रहते हैं। स्वामी सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि जगदीश आश्रम प्रकाण्ड विद्वानों व महान संतों की तपस्थली रही है। पार्षद अनिरूद्ध भाटी ने कहा कि संतों के तप व धर्म प्रचार के बदौलत ही हमारी संस्कृति और संस्कारों की रक्षा हो रही है। जगदीश आश्रम तीर्थनगरी की पहचान है। समारोह का संचालन स्वामी योगेन्द्रानन्द शास्त्री व अध्यक्षता डॉ. स्वामी श्यामसुन्दर दास शास्त्री की अध्यक्षता ने की। इस अवसर पर आचार्य गरीबदास महाराज की पवित्र वाणी का अखण्ड पाठ, सत्संग-भजन कीर्तिन भव्यतापूर्वक आयोजित हुआ। इस मौके पर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, स्वामी अनन्तानन्द, स्वामी सच्चिदानन्द, स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि, शिवम महंत, ऋषभ वशिष्ठ, स्वामी रविदेव शास्त्री, आचार्य हरिहरानन्द, महंत दिनेश दास, स्वामी सुरेश मुनि, महन्त मोहन सिंह, महन्त जगदीशानन्द, स्वामी परमानन्द, स्वामी केशवानन्द, भजोराम बाबा, पार्षद अनिरूद्ध भाटी व विनित जौली आदि उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/राजेश/पवन
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