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श्रेष्ठ आचरण से श्रेष्ण व्यक्ति का निर्माण: विवेकानंद सरस्वती

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 15 2019 4:29PM
श्रेष्ठ आचरण से श्रेष्ण व्यक्ति का निर्माण: विवेकानंद सरस्वती
ऋषिकेश, 15 अप्रैल (हि.स.)। स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने सोमवार को कहा कि श्रेष्ठ व्यक्ति वही होता है, जिसका आचरण भी श्रेष्ठ हो। इसलिए सच्चे ज्ञान की प्राप्ति के लिए मनुष्य को साधना, संयम और अच्छे कर्म की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल तथा मानवीय चेतना संघ के संस्थापक वक्ता स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने यहां आर्य समाज वैदिक आश्रम ऋषिकेश में सोमवार को आयोजित संत सम्मेलन के दौरान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में आर्य समाज पद्धति है। इसमें वैदिक मंत्रों का महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद हमारे प्रेरणा स्रोत रहे हैं उनके बताए मार्ग पर चलने का हम सभी आर्य जनों को चलने की जरूरत है। उनका कहना था कि आर्य समाज एक वैचारिक क्रांति के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है, इसका उद्देश्य समाज में पवित्रता को लाया जाना है। इस अवसर पर सतीश कुमार माखनलाल सूरी अभय आर्य भी उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/विक्रम/राजेश/पवन
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