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ज्ञान ही नहीं समाज सुधार के लिए प्रौद्योगिकी आवश्यक: पूर्व न्यायाधीश नागेश्वर

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 13 2019 7:28PM
ज्ञान ही नहीं समाज सुधार के लिए प्रौद्योगिकी आवश्यक: पूर्व न्यायाधीश नागेश्वर
देहरादून, 13 अप्रैल (हि.स.)। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एल नागेश्वर राव ने शनिवार को कहा कि कानून को जानना कानून के छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग और तकनीकी विकास का ज्ञान ही समाज की मदद के लिए महत्वपूर्ण है। छात्रों को यह समझने में रुचि लेनी चाहिए कि प्रौद्योगिकी कैसे अदालत में उनके काम और प्रदर्शन की दक्षता में सुधार करती है। आईसीएफएआई विश्व विद्यालय में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार में ‘तकनीकी विकास और कानून के बदलते आयाम’ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एल नागेश्वर राव ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जांच के तरीकों में तकनीकि विकास हो या रिकार्ड रखने के काम के क्षेत्र में हो प्रौद्योगिकी हमारे गतिशील न्याय प्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल रही है। न्याय पालिका पेपरलेस कोर्ट बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और नागरिकों के लिए कई अदालतों में अब ई-फाइलिंग जैसी सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि विभिन्न मामलों में जांच के लिए ब्रेन मैपिंग और नार्को एनालिसिस का भी उपयोग किया जाता है। एक तरफ मोबाइल फोन रिकॉर्ड और अभियुक्तों के कंप्यूटर में जानकारी का उपयोग पूछताछ के लिए अदालतों में किया जाता है, वहीं मोबाइल फोन के दूसरे उपयोग पर भी व्यक्तियों की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए प्रमुख चिंताएं हैं। इस मौके पर गेस्ट ऑफ ऑनर एंड की-नोट स्पीकर के रूप में प्रो. आरके मुरली फैकल्टी ऑफ लॉ बीएचयू वाराणसी उपस्थित रहे। अन्य अतिथियों के रूप में स्कूल फॉर लीगल स्टडीज बीबीएयू केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ से प्रो. प्रीति सक्सेना, प्रो. डॉ राजेश बहुगुणा, प्रधानाचार्य लॉ कॉलेज देहरादून, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी कटक ओडिशा के डॉ योगेश पी सिंह, शामिल हुए। प्रो. डॉ पवन के अग्रवाल, कुलपति आईसीएफएआई विश्वविद्यालय देहरादून, प्रमुख संरक्षक वाइस चांसलर प्रो. डॉ मुड्डू विनय, प्रो. डॉ युगल किशोर, मोनिका खारोला, निदेशक, डॉ सागर के जायसवाल सहित छात्र शामिल रहे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, नलसार विश्वविद्यालय, यूपीईएस लॉ कालेज देहरादून, लोयड, एमिटी, यूआईटी के 65 से अधिक विश्वविद्यालयों के छात्रों, शोधकर्ताओं और विद्वानों सहित करीब तीन सौ तीस प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश/पवन
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