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नवरात्र पर्व: विंध्यवासिनी मंदिर में उमड़ रहे श्रद्धालु

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 13 2019 5:05PM
नवरात्र पर्व: विंध्यवासिनी मंदिर में उमड़ रहे श्रद्धालु
हरिद्वार, 13 अप्रैल (हि.स.)। देश में इन दिनों नवरात्र पर्व की धूम है। देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। राजाजी नेशनल पार्क के जंगल में स्थित मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर में रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ये मंदिर साधना के लिए भी जाना जाता है। मान्यता है कि कंस के वध की भविष्यवाणी के बाद यशोदा की बेटी इसी स्थान पर गिरी थीं। यहां पर गुण चढ़ाने और मां विंध्यवासिनी के दर्शन मात्र करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक मां विंध्यवासिनी को सती का ही रूप माना जाता है। इसलिए उन्हें वन दुर्गा भी कहा जाता है। साथ ही मां विंध्यवासिनी को योग माया भी कहा जाता है। माना जाता है कि द्वापर युग में जेल में बंद कंस की बहन देवकी की आठवीं संतान ही कंस की मौत का कारण बनने की भविष्यवाणी हुई थी। तब कंस ने अपनी ही बहन की पहली सातों संतानों को पैदा होते ही मार दिया था लेकिन जब उनकी आठवीं संतान पैदा हुई थी। तब सबको नींद आ गई थी। साथ ही घनघोर बारिश हो रही थी, इससे यमुना नदी पूरे उफान पर थी। ऐसे में वासुदेव एक टोकरी को सिर पर रख कर अपनी संतान को यमुना पार कर यशोदा के घर ले गए। जहां यशोदा ने भी इसी वक्त एक पुत्री को जन्म दिया था। वासुदेव ने देवकी के पुत्र को यशोदा के पास सुला कर और उनकी पुत्री को लाकर वापस जेल में रख दिया था। जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के पैदा होने की सूचना मिली तो कंस जेल पहुंचा। उस बच्ची को कंस ने पत्थर पर जब उसे पटक कर मारना चाहा तो कन्या उसके हाथों से छिटक कर चली गई। मान्यता है कि कंस के हाथों से छिटक कर कन्या इसी स्थान पर आकर गिरी थी। तब से ये एक सिद्ध स्थान बन गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर में आकर उन्हें अलौकिक अनुभूति प्राप्त होती है। वो इस मंदिर में हर बार नवरात्रि के मौके पर आते हैं। माता से जो भी मुराद मांगते हैं, वो पूरी होती हैं। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/अमर/पवन
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