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निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 9 2019 5:17PM
निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान
देहरादून, 09 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे कितना भी प्रयास कर लें लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी के आगे सरकार व शिक्षा विभाग लाचार नजर आ रहा है। आम आदमी इन स्कूलों के उत्पीड़न और शोषण से बच नहीं पा रहा है। राजधानी देहरादून के इन विद्यालयों में अब प्रवेश शुल्क 25 से 50 हजार तक पहुंच गया है, जबकि मासिक शुल्क में भारी बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा मंत्री व विभागीय अधिकारियों द्वारा पुनः प्रवेश शुल्क नहीं लिये जाने का निर्णय लिया गया था लेकिन कोई भी ऐसा स्कूल नहीं है, जो बिना प्रवेश शुल्क के बच्चों को प्रवेश दे रहा हो। सच कहें तो राजधानी के और प्रदेश के निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित की जाने वाले शुल्क पर शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है और लगातार मनमानी जारी है। प्रदेश में फीस एक्ट बनाने से लेकर नियामक आयोग बनाने तक की तमाम बातों का आज तक कोई परिणाम नहीं निकल सका है। प्रदेश के निजी स्कूल सेवा के नाम पर भी मेवा खा रहे हैं। इन स्कूलों द्वारा लाखों करोड़ों की कमाई किये जाने के बावजूद आयकर के नाम पर दो रुपये नहीं दिये जाते हैं। इन स्कूलों के खिलाफ कहीं कोई सुनवाई भी नहीं होती है। अधिकारी तो इन स्कूलों में घुसने की हिम्मत तक नहीं रखते। यदि कभी सामूहिक रूप से अभिभावक दबाव डालते हैं तो उनकी कार्रवाई सिर्फ स्कूलों को नोटिस देने तक ही सीमित रहती है। ऐसी स्थिति में एक सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति के लिए जिसकी आय 10-15 या 20 हजार रुपये मासिक है वह इन स्कूलों में अपने बच्चों को भला कैसे पढ़ा सकता है? निजी स्कूलों में जब प्रवेश शुल्क ही 25 से 50 हजार और मासिक शुल्क 5-6 हजार तक होगी। अभिभावक सुरेन्द्र खन्ना का कहना है कि राजपुर रोड के एक नामी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन अब लगता है कि उन्हें बच्चों को वहां से निकालना पड़ेगा। इसका कारण स्कूलों की मनमानी तथा बढ़ता शुल्क है। इस संदर्भ में शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन चुनावी ड्यूटी पर होने का बहाना कर विभाग की ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया, जो इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं जानने के बावजूद जिम्मेदार लोग कुछ नहीं करना चाहते। हिन्दुस्थान सामचार/साकेती/अमर/पवन
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