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नोटा से अब भी अंजान हैं युवा और बुजुर्ग

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 9 2019 4:09PM
नोटा से अब भी अंजान हैं युवा और बुजुर्ग
हरिद्वार, 09 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा चुनाव चरम पर है। 11 अप्रैल को उत्तराखंड में मतदान होना है। इसी को लेकर सभी उम्मीदवार जनता को लुभाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और किसे नापसंद करती है, ये चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा। कई मतदाता ऐसे भी हैं जो किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं कर नोटा का इस्तेमाल करेंगे। अधिकांश लोग ऐसे भी हैं, इन्हें नोटा के संबंध में जानकारी ही नहीं है। कई लोगों ने तो नोटा पहली बार ही सुना है। अधिकतर युवाओं को नोटा के बारे में ज्यादा जानकारी थी, बल्कि वयस्क और बुजुर्ग मतदाता इस बटन के बारे जानकारी देने वाले काफी कम पाए गए। उनका कहना है कि उन्हें नोटा के बारे में किसी ने जानकारी नहीं दी है। युवाओं का कहना है कि उम्मीदवार पसंद नहीं आने पर वो इसका इस्तेमाल करते हैं। कुछ का कहना है कि इससे कमजोर उम्मीदवार का फायदा होता है और मजबूत उम्मीदवार का नुकसान होता है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में सभी उम्मीदवारों की सूची के बाद अंत में एक बटन होता है। इसके सामने नोटा लिखा होता है। किसी मतदाता को सभी उम्मीदवारों में से कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वो उस स्थिति में नोटा का बटन दबा सकता है। नोटा के मतों को गिना तो जाता है, लेकिन इसे रद्द मतों की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं, सभी उम्मीदवारों से ज्यादा मत नोटा पर पड़ने की स्थिति में दोबारा चुनाव होते हैं। नोटा की हरिद्वार में मुहिम चला रहे शक्तिधर शर्मा को कहना है कि हालांकि नोटा दबाने से जीत-हार का फैसला नहीं रूकता, लेकिन लोग नोटा अपना विरोध दर्ज कराने का उचित माध्यम है। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/अमर/पवन
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