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जीवन के कष्टों का संहार करता है अनुष्ठान: चिन्मय पंड्या

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 8 2019 9:28PM
जीवन के कष्टों का संहार करता है अनुष्ठान:  चिन्मय पंड्या
हरिद्वार, 08 अप्रैल (हि.स.)। देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने सोमवार को कहा कि अनुष्ठान जीवन के कष्टों का संहार करता है। अनुष्ठान-साधना भौतिक जीवन से लेकर परलौकिक जीवन को भी सुधारने में सहायक है। साधनाकाल में प्रयोग होने वाला गायत्री महामंत्र में सर्वे भवन्तु सुखिनः का भाव समाहित है। इस महामंत्र के सामूहिक जप से वातावरण में ऐसी ऊर्जा उत्पन्न होती है। इससे सम्पूर्ण पर्यावरण, जीव जगत में सकारात्मक परिवर्तन होने लगता है। चिन्मय सोमवार को शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग में ‘मंत्र शक्ति का प्रभाव व उसका ज्ञान-विज्ञान’ विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इन दिनों ज्योतिषीय, खगोलीय व पर्यावरण आदि की दृष्टि से जो ऊर्जा वातावरण में उत्पन्न होती है। इसे साधना-अनुष्ठान के माध्यम से ही अवशोषित कर सकते हैं और यही ऊर्जा साधक को सफलता की उच्चतम स्तर पर पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मंत्र के चार भाग बताते हुए प्रतिकुलपति चिन्मय ने कहा कि पहला उद्देश्य का आधार उपचार मूलक मंत्र, अभिचार मूलक मंत्र व परिष्कार मूलक मंत्र होता है। दूसरा उत्पत्ति का आधार यानि वैदिक मंत्र, पौराणिक मंत्र, साबर मंत्र, लौकिक मंत्र है। तीसरा लिंग का आधार पुर्लि्लंग, स्त्रीलिंग व उभयलिंग है और चौथा पिण्ड मंत्र, करतरि मंत्र, माला मंत्र आदि हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थ परिसर में निर्मल एवं श्रद्धासिक्त भाव से किये गये अनुष्ठान का लाभ अनेक गुणा मिलता है। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता सहित रूस, कनाडा, युक्रेन, बेलारुस, अमेरिका, यूके तथा देश भर से आये गायत्री साधकगण उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/अमर/पवन
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