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आदर्शों को स्थापित करने धरती पर आते हैं भगवान: डॉ पण्ड्या

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 7 2019 3:54PM
आदर्शों को स्थापित करने धरती पर आते हैं भगवान: डॉ पण्ड्या
हरिद्वार, 07 अप्रैल (हि.स.)। देव संस्कृति विवि कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब धर्म एवं आदर्शों की स्थापना के लिए भगवान आते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम धरती पर मर्यादाओं को स्थापित करने आए। उन्होंने मनुष्य का जीवन, लक्ष्य, उद्देश्य आदि को जीवन में जीकर दिखाते हुए स्थापित किया। वे रविवार को देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में नवरात्रि साधना में जुटे युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने श्रीरामचरित मानस में उल्लेखित भगवान के अवतार प्रर्क्रिया को विस्तारपूर्वक समझाया। कहा कि अवतार विशेष समय में धरती पर अवतरित होते हैं, जब भगवान आते हैं, तो संसार में निर्मल रस फैलाते है। उन्होंने कहा कि जब कोई जीव भगवान के कार्यों में सहयोगी बनता है, तब उसका जीवन सार्थक है और यहीं मानव का लक्ष्य भी है। कहा कि रामकथा मनुष्य जीवन, संघर्षों एवं आदर्शों की कथा है। तुलसीदास ने आधुनिक काल में फिर से राम का अवतरण किया। ऐसे समय में जब आक्रांतों द्वारा मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, मर्यादा तार-तार हो रही थी, बहुपत्नी विवाह का प्रचलन था तब तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस के माध्यम से राम के आदर्श को मानवता के सामने रखा। कहाकि एक अवतार त्रेता में हुआ और एक अवतार तुलसीदास ने आधुनिक युग में कर के दिखाया। उन्होंने कहा कि भगवान के अवतार की कथा सुनने का लाभ तभी है जब हमारे अंदर आदर्शों का अवतरण हो, हमारे मन में बैठे रावण की लंका जले एवं हृदय में भगवान श्रीराम स्थपित हो। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव बलदाऊ देवांगन, शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्तागण, देश-विदेश से नवरात्रि साधना करने आये साधकगण सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर्स एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/राजेश/रामानुज
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