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शिक्षा बढ़ी, मगर संस्कार घटेः विजय कौशल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 7 2019 3:57PM
शिक्षा बढ़ी, मगर संस्कार घटेः विजय कौशल
हरिद्वार, 07 अप्रैल (हि.स.)। मंगलमय परिवार हरिद्वार के हिन्दू नववर्ष के शुभारम्भ पर आयोजित कार्यक्रम में कथावाचक संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि भजन हम सैद्धान्तिक कानों से सुनते हैं जो हमारे हृदय में बैठ जाता है और जैसा हम होठों से बोलते हैं वैसा ही हमारा हृदय हो जाता है, यह वैज्ञानिक सिद्धान्त है। श्री प्रेमनगर आश्रम घाट पर आयोजित शनिवार को भजन संध्या में उन्होंने कहा कि हमें शुरूआत परिवार से ही करनी पड़ती है। परिवार संस्कारी होगा तो समाज भी संस्कारी होगा। आज व्यक्ति की वाणी और आचरण में भारी अन्तर दिखाई देता है। आज शिक्षा तो बढ़ी है, लेकिन संस्कार घटे हैं। भौतिक उन्नति तो हुई है, लेकिन मन छोटे हो गये हैं। उन्होंने मंगलमय परिवार की अवधारणा को बताते हुए कहा कि यह एक विचार है जो समाज में भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन की दिशा में समाज को जागरूक करेगा। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत/राजेश/रामानुज
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