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श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के रैपुरा गांव में भगवान की तरह होती है बुराई के प्रतीक रावण की पूजा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 19 2018 3:07PM
श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के रैपुरा गांव में भगवान की तरह होती है बुराई के प्रतीक रावण की पूजा
चित्रकूट,19 अक्टूबर (हि.स.)। देश भर में जहाँ बुराई के प्रतीक लंकापति रावण का पुतला दहन कर विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है। वही भगवान श्रीराम की तपोभूमि के नाम से विख्यात धर्म नगरी चित्रकूट में रैपुरा एक ऐसा गांव है जहां अहंकारी रावण को भगवान की तरह पूजा जाता है। यहां स्थाई रूप से रावण की मूर्ति भी स्थापित है। ग्रामीणों का मानना है कि रावण की मूर्ति क्षेत्र के लिए अपशगुन नहीं बल्कि वरदान से कम नहीं है। इस मूर्ति की स्थापना कब हुई थी, इसकी सही जानकारी ग्रामीणों को नहीं है। ग्रामीण इतना जरूर बताते हैं कि रावण के प्रताप के कारण ही आज रैपुरा गांव में दो दर्जन से अधिक आईएएस,आईपीएस और पीसीएस अधिकारी है। मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में जहां जगह-जगह रामलीला का मंचन चल रहा है। वहां आज तैयार किये गये रावण के बड़े.बड़े पुतले दहन करने की तैयारियां चल रही है।वही भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में ही एक ऐसा गांव रैपुरा है, जो इस पुरानी परम्परा से कोसो दूर है। झाँसी -मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग में जिला मुख्यालय कर्वी -मऊ के बीच स्थित रैपुरा गांव में ग्रामीणों द्वारा विजय दशमी के दिन लंकापति रावण की स्थाई रूप से बनी मूर्ति का हर साल रंगरोगन कर पूजन करते हैं। देश के दूसरे इलाको से उलट चली आ रही परम्परा को रैपुरा गांव के लोग इसे कतई अपशगुन नहीं मानते। जिसके चलते विजय दशमी के दिन सुबह से ही ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ रावण की मूर्ति का रंगरोगन कर साफ-सफाई करने में जुटे जाते है। गांव के जय प्रकाश शुक्ल और शिवशंकर सिंह पटेल आदि ग्रामीणों का मानना है कि रावण बहुत बुद्धिमान था और उनकी मूर्ति गांव में होने से यह जनपद का ऐसा पहला गांव है जहां पर शिक्षा का स्तर ऊंचाइयों पर है। गांव के पूर्व प्रधान जगदीश सिंह पटेल ने बताया कि गांव के बच्चे सुबह जब स्कूल जाते समय कई बार तो वहीं खड़े होकर रावण की मूर्ति को निहारते हैं और फिर घर आकर अभिभावकों से रामायण के पाठ के हिसाब से सवाल जवाब भी करते हैं। उन्होंने बताया कि गांव में शिक्षा का स्तर काफी बेहतर है। यहां के सीपी सिंह और अभिजीत सिंह आईएएस अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। तेज स्वरूप सिंह,राजस्वरूप सिंह, राम किशोर शुक्ला और यादवेंद्र शुक्ला पीसीएस अधिकारी हैं। इसके अलावा प्रहलाद सिंह सीडीओ, प्रदीप पांडेय बीडीओ, नाथूराम सिंह रेंजर के अलावा दर्जनों लोग उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि देश के कोने -कोने में प्रशासनिक सेवा के कार्यरत गांव के सभी दशहरे के दिन गांव जरूर आते है और लंकापति रावण की पूजा कर गांव के उज्जवल भविष्य की कामना करते है। गांव में शिक्षा की अलख जला रहे सेवा निवृत प्रधानाचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह पटेल ने एक ग्रामोत्थान ट्रस्ट बनाया है जिसमे गांव के ही लोगो को शामिल किया है और ट्रस्ट सिर्फ गांव के मेधावियों के लिए काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि रैपुरा गांव की भागीदारी राज्य कर्मचारी से लेकर केंद्र सरकार की सेवा तक मे है किंतु गांव जिले के लिए गौरव की बात यह है कि यहां से हर साल मेधावी छोटी से छोटी नौकरी से लेकर सिविल की बड़ी प्रशासनिक सेवाओं तक मे झंडा गाड़ रहे है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष दशहरे के दिन हम अपने गांव के मेधावियों का सम्मान समारोह करते है और उसमें कक्षा 5वी से लेकर इंटर बीए और शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले मेधावियों को किसी विशिष्ट व्यक्ति से सम्मानित कराते है। महेंद्र प्रसाद सिंह ने रैपुरा गांव की इस रामलीला के बाद अच्छाई पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतला का दहन नही किया जाता है। बल्कि यहा रावण को ज्ञान का प्रतीक मानते है। महेंद्र प्रसाद ने बताया कि रामलीला मंचन राम रावण का युद्ध तो होगा किन्तु उसका पुतला दहन नही किया जाता है क्योंकि रावण प्रकांड विद्वान था और उसे गांव में ज्ञान का प्रतीक माना जाता है ।रैपुरा गांव में रावण का स्टेचू भी है जिसकी लोग ज्ञान का प्रतीक मानकर पूजा करते है। हिन्दुस्थान समाचार /रतन/राजेश
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