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राजस्थान चुनाव: तीसरे मोर्चे का हिस्सा बन बसपा बिगाड़ेगी कांग्रेस-भाजपा का खेल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 6 2018 2:59PM
राजस्थान चुनाव: तीसरे मोर्चे का हिस्सा बन बसपा बिगाड़ेगी कांग्रेस-भाजपा का खेल
जयपुर, 06 नवम्बर (हि.स.)। दीपपर्व दीवाली के बाद राजस्थान विधानसभा का चुनाव दिलचस्प मोड़ ले लेगा। तब तक सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के उम्मीदवारों की न केवल सूची जारी हो जाएगी बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मंशा भी स्पष्ट हो जाएगी। मायावती के नजदीकी एक नेता की मानें तो अगले एक सप्ताह के अंदर बसपा तीसरे मोर्चे का हिस्सा बन सकती है। बसपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर हिन्दुस्थान समाचार को मंगलवार को बताया कि राज्य में चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 12 नवम्बर से प्रारम्भ हो रही है। तब तक बसपा का स्टैंड स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने बताया कि तीसरे मोर्चे के नेता बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ लगातार सम्पर्क में हैं। हफ्ते-दस दिन के अंदर सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है और बसपा तीसरे मोर्चे का हिस्सा बन सकती है। तीसरे मोर्चे के नेता हनुमान बेनीवाल ने अभी हाल ही में दावा किया था कि बसपा भी मोर्चे में शामिल होगी। हालांकि, बसपा ने अपने प्रभाव वाले जिलों के 11 उम्मीदवारों की सूची पहले ही जारी कर दी है, लेकिन बेनीवाल का कहना है कि वह मायावती के संपर्क में हैं। कई सीटों पर गठबंधन के लिए बात चल रही है। बेनीवाल के नेतृत्व में गठित तीसरे मोर्चे में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और भारत वाहिनी पार्टी के अलावा राष्ट्रीय लोकदल, समाजवादी पार्टी और राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा भी शामिल हैं। सीपीआईएम, सीपीआईएमएल और जदयू ने हाल ही में राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा का गठन किया है। चुनावी समीक्षकों का कहना है कि तीसरे मोर्चे की सक्रियता ने कांग्रेस और भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यह भी माना जा रहा है कि अगर मोर्चे में बसपा शामिल हो जाती है तो चुनाव का समीकरण काफी बदल सकता है। हालांकि राज्य के दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। भाजपा चुनाव समिति के सह संयोजक सतीष पुनिया कहते हैं कि तीसरे मोर्चे से चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। वह कहते हैं कि राजस्थान में सदैव ही भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट भी कुछ इसी तरह की बात करते हैं। गौरतलब है कि बसपा का राजस्थान के चुनाव में उत्तर प्रदेश की तरह प्रभाव नहीं है, लेकिन पार्टी ने यहां अपनी पकड़ बना ली है। वैसे इस दल का राजस्थान में अनुभव अच्छा नहीं रहा है। बसपा ने पहली बार 1990 में राजस्थान में चुनाव लड़ा था। उस समय इसे कोई सीट नहीं मिली थी लेकिन वर्ष 1998 के चुनाव इसने उप्र के सटे जिले भरतपुर की नगर सीट और अलवर की बानसूर सीट से दो विधायक जिता लिये थे। वर्ष 2008 के चुनाव में तो बसपा ने छह सीटें जीती थीं लेकिन बाद में इसके सभी विधायक सत्ता सुख भोगने के लिय कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्ष 2013 के चुनाव में बसपा तीन सीटों पर जीती थी। इस बार उसने राज्य की सभी 200 सीटों से प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है और 11 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। बसपा को राजस्थान के करीब 18 प्रतिशत दलित मतदाताओं पर नजर है। ऐसे में यदि बसपा तीसरे मोर्चे में शामिल होती है तो राज्य का चुनावी समीकरण बदल सकता है। उधर बेनीवाल पहले से ही दावा कर रहे हैं कि तीसरा मोर्चा राज्य की कुल 200 विधानसभा सीटों में से करीब 125 पर त्रिकोणीय संघर्ष करेगा। चुनावी समीक्षक मानते हैं कि यदि ऐसा होता है तो मतों के बंटवारे का लाभ लेकर भाजपा फायदे में आ सकती है। राजस्थान चुनाव के लिए 12 नवम्बर से नामांकन पत्रों का दाखिला प्रारम्भ होगा। राज्य में एक ही चरण में सात दिसंबर को मतदान होंगे और मतगणना 11 दिसम्बर को है। हिन्दुस्थान समाचार / पीएन द्विवेदी/राधा रमण
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