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वीवीपेट मशीन में गडबड़ी की झूठी शिकायत पड़ सकती है भारी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 4 2018 8:57PM
वीवीपेट मशीन में गडबड़ी की झूठी शिकायत पड़ सकती है भारी
पाली, 04 नवम्बर (हि.स.)। राज्य में इस बार सात दिसंबर 2018 को होने वाले विधानसभा चुनाव में पहली बार वीवीपेट मशीन का उपयोग किया जाएगा, लेकिन मतदान के दौरान किसी मतदाता को मशीन में गड़बड़ी को लेकर झूठी शिकायत की तो उसे महंगा पड़ सकता है। चुनाव में इस बार विधानसभा चुनाव में पहली बार वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपेट मशीन का उपयोग किया जाएगा। वीवीपेट मशीन की प्रक्रिया के तहत मतदाता द्वारा अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट डालने की पुष्टि वीवीपेट की छपी हुई पर्ची को देखकर कर सकेंगे। लेकिन, अगर मतदाता शिकायत करता है कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट डाला है उसकी पर्ची नहीं छपी है तो इस पर पीठासीन अधिकारी के द्वारा नियम 49 एमए के तहत शिकायतकर्ता से घोषणा पत्र भरवाया जाएगा। उसी समय टेस्ट वोट (परीक्षण मतदान) की कार्यवाही की जाएगी। टेस्ट वोट की प्रक्रिया बूथ पर तैनात मतदान अभिकर्ताओं की उपस्थिति में संपन्न होगी। टेस्ट वोट में शिकायत सही पाई गई तो निर्वाचन आयोग के प्राप्त निर्देशानुसार अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। मतदाता द्वारा वोट डालने के तुरंत बाद पास में रखी वीवीपेट मशीन में गड़बड़ी को लेकर मतदाता की ओर से की गई शिकायत टेस्ट वोटिंग के दौरान गलत पाई गई तो शिकायतकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 177 के तहत उसे मौके पर ही गिरफ्तार किया जाएगा। चुनाव आयोग के नियमों के तहत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। नियमों के तहत उसे सजा का प्रावधान भी है। कैसे काम करती है वीवीपैट मशीन : वीवीपेट मशीन में मतदाता द्वारा वोट डालने के तुरंत बाद कागज की एक पर्ची प्रिंट होगी। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उसका नाम, क्रम संख्या और चुनाव चिन्ह छपा होगा। कागज की छपी पर्ची वीवीपेट में लगे शीशे की स्क्रीन पर सात सैकेण्ड तक दिखेगी। उसके बाद कट कर मशीन में ही गिर जाएगी। ये मतदाताओं को नहीं दी जाएगी। वीवीपेट मशीन का उपयोग सबसे पहले नागालैण्ड चुनाव में 2013 में हुआ था। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप
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