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सियासी क्यारियों में कई दावेदार उगे, टिकट आखिर किसको

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 4 2018 6:34PM
सियासी क्यारियों में कई दावेदार उगे, टिकट आखिर किसको
जोधपुर, 04 नवम्‍बर (हि.स.)। राजस्थान की राजनीति के गढ़ माने जाने वाले जोधपुर संभाग में विधानसभा चुनाव में इस बार भी जातिगत राजनीति का असर देखने को मिलेगा तो वंही जोधपुर संभाग के भाजपा और कांग्रेस के के क्षत्रप अपने अपने रुतबे और प्रभाव के बूते राजनीति करते नजर आयंगे। कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज राजनेताओं की कर्म स्थली रहे जोधपुर संभाग में हर तरफ चर्चा यही है कि क्या भाजपा अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी या कांग्रेस पिछले चुनाव की करारी हार का बदला लेगी। पिछले चुनाव में जोधपुर संभाग में 33 में से कांग्रेस को सिर्फ 3 सीटों पर ही कामयाबी मिल पाई थी। वैसे पश्चिमी राजस्थान में नई सियासी क्यारियां भी इस बार गुल खिलाने को तैयार हैं। पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र और शिव विधायक मानवेंद्र सिंह द्वारा भाजपा से अलग होने और जैसलमेर के पूर्व राजपरिवार की रासेश्वरी राजलक्ष्मी के चुनाव लडऩे के ऐलान से चुनाव नए समीकरण की ओर इशारा भी करते नजर आ रहे हैं। भाजपा से राजपूत सहित कई नाराज, बदलेगी चौसर: आनंदपाल, चतुरसिंह और सामराऊ प्रकरण के कारण सरकार से नाराज चल रहे राजपूतों के वोटों का घु्रवीकरण चुनाव नतीजों में बड़ा बदलाव कर सकता है। बाड़मेर का पचपदरा कस्बा संभाग की राजनीति का नया केंद्र बनकर उभरा है। भाजपा की गौरव, कांग्रेस की संकल्प और मानवेंद्र की स्वाभिमान रैली यहीं पर हुई है। यहां से राजस्व राज्यमंत्री अमराराम चौधरी विधायक है। बाड़मेर-जैसलमेर में सिवाना और जैसलमेर दो सीटें ऐसी हैं, जहां से पिछले दोनों चुनाव भाजपा ने जीते हैं। कांग्रेस के पास केवल एक बाड़मेर सीट ऐसी है, जहां से पिछले दोनों चुनाव में सीट उसके खाते में रही है। पाली, जालोर और सिरोही में सात सीटें ऐसी हैं, जहां से भाजपा लगातार दो बार जीती है। बाली और पाली से तो लगातार चार बार से भाजपा प्रत्याशी विधानसभा पहुंच रहे हैं। बाली विधानसभा क्षेत्र की बात करे तो पहले कांग्रेस और भाजपा में रहे समाजसेवी उम्मेद सिंह चांपावत ने पूर्व में भैरोसिंह शेखावत के सामने चुनाव लडकर हार गए थे अब एनसीपी जॉइन कर ली है तो बाली विधानसभा क्षेत्र से उनका चुनाव लडने का मानस बताया जा रहा है। जबकि कांग्रेस के पास ऐसी एक भी सीट नहीं है जहां से उसे लगाातर दो बार भी जीत मिली हो। पूर्व मुख्यमंत्री पर फिर निगाह: जोधपुर में 10 में से 9 सीट पर भाजपा है, 2013 के चुनाव में कांग्रेस से केवल सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जीते थे। 2008 में गहलोत सरकार बनी थी, लेकिन 6 सीटें भाजपा के खाते में गई थी। भाजपा के पास दो-तीन बार जीतने वाले कई चेहरे हैं।जिले की लोहावट, शेरगढ़, भोपालगढ़, जोधपुर शहर, सूरसागर और बिलाड़ा कुल छह सीटें ऐसी हैं, जहां से भाजपा पिछले दो चुनाव से जीत रही है। कांग्रेस के पास ऐसी सीट केवल एक सरदारपुरा ही है। कांग्रेस जहां वसुंधरा सरकार में जोधपुर की उपेक्षा की बात कर रही है, वहीं सत्ता विरोधी माहौल भाजपा को और गुटबाजी कांग्रेस को परेशान किए हुए है। इस बार भी जोधपुर की जनता पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ निगाह लगाए बैठे है कि उनकी रणनीति क्या गुल खिलाएंगी। हिन्दुस्थान समाचार/ सतीश/ ईश्वर
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