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आसींद में सामाजिक जन चेतना एवं एकता महासम्मेलन के आयोजन ने भाजपा व कांग्रेस की उड़ायी नींद

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 2 2018 8:30PM
आसींद में सामाजिक जन चेतना एवं एकता महासम्मेलन के आयोजन ने भाजपा व कांग्रेस की उड़ायी नींद
भीलवाड़ा, 02 नवम्बर (हि.स.)। जिले के आसींद विधानसभा क्षेत्र के शंभुगढ़ में शुक्रवार को क्षेत्र के अनुसूचित जाति व जनजाति (एससी एसटी) वर्ग का सामाजिक जन चेतना एवं एकता महासम्मेलन जयनगर सगसजी के मंदिर परिसर में आयोजित किया गया। महासम्मेलन में मुख्य रूप से आसींद विधानसभा चुनाव में समाज के मतदाताओं की संख्या को देखते हुए दोनो प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा व कांग्रेस की ओर से उपेक्षा करने पर नाराजगी व्यक्त कर समाज का ही प्रत्याशी चुनाव में खड़ा करने का निर्णय लिया गया। क्षेत्र के जानकार लोगों का कहना है कि अनुसूचित जनजाति की ओर से सामाजिक एकजुटता दिखाकर अगर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा जाता है तो चुनाव में दोनो दलों की गणित को बिगड़ने में समय नहीं लगेगा। इस महासम्मेलन के आयोजन को लेकर दिन भर भाजपा व कांग्रेस के सिपहसालार मंदिर के आस पास मंडराते रहे और इसमें होने वाले निर्णय की जानकारी अपने आकाओं को देते रहे। सम्मेलन के आयोजन के बाद क्षेत्र में भाजपा व कांग्रेस से दावेदारी करने वालों की नींद उड़ गयी है। आसींद-हुरडा विधानसभा मे कुल मतदाताओ की संख्या 2 लाख 72 हजार 735 है। इसमें एससी एसटी मतदाताओं की संख्या करीब 90 हजार बतायी है। आज के महासम्मेलन में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के साथ अनुसूचित जाति वर्ग के पदाधिकारियों ने भी शिरकत की। इससे इनकी एकता साफ तौर पर भी दिखी। महासम्मेलन में करीब चार घंटों से ज्यादा समय तक मंथन चला। इसमें आसींद के साथ निकटवर्ती ब्यावर क्षेत्र के भी कुछ लोगों ने भाग लिया। अनुसूचित जाति व जनजाति के प्रतिनिधियों ने विधानसभा चुनाव में दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व न मिलने पर नाराजगी जताते हुए इस बार आर पार की लड़ाई लड़कर चुनाव में प्रत्याशी उतारने की बात कही। मंथन के दौरान भीम सेना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमल कुमार ने कहा कि हर बार चुनाव में भाजपा व कांग्रेस की ओर से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं को बहला फुसलाकर उनके मतों का प्रयोग किया जाता है। चुनाव के बाद निर्वाचित प्रतिनिधि उनके समाज की समस्याओं के समाधान के लिए भी आगे नहीं आते है। बार बार उनको आरक्षण के नाम पर बरगलाया जाता है। विगत दिनों अप्रेल माह के बाद के जो हालात बन रहे है उससे लगता है कि धीरे धीरे माहौल बनाया जाकर आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर दलित वर्ग को ही समाप्त कर दिया जायेगा। अभी चुनावी समर में समाज को एकजुटता से अपनी ताकत का प्रदर्शन करना होगा। कमलकुमार ने जोर देकर कहा कि आसींद क्षेत्र में अजा जजा वर्ग के मतदाताओं की संख्या को देखते हुए समाज को एकजुट होकर अपना निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतारना चाहिए जिससे भाजपा व कांग्रेस को अपना चरित्र आईने में दिख सके। सेवानिवृत शिक्षक नानूराम भील ने कहा कि वो लंबे समय से सामाजिक जागृति के लिए कार्य कर रहे है। समाज में जागृति आने का नाम ही नहीं ले रही है। चुनाव में प्रलोभनों से जाति के नेता मतदाताओं की ठेकेदारी कर अपना काम करा लेते है। इस बार ऐसा नहीं होने देगें। भील समाज एकजुटता से अपना निर्णय लेगा। संपूर्ण एसटी वर्ग जागृत होकर अपने नोट की ताकत से राजनीतिक दलों को अपनी शक्ति का अहसास नहीं करायेगा तब तक हमारा दलित वर्ग निर्णायक भूमिका में नहीं आ सकता है। लंबी चर्चा व मंथन के बाद सामाजिक एकता दिखाते हुए भाजपा व कांग्रेस को छोड़कर इस बार समाज का ही प्रत्याशी मैदान में उतारने का निर्णय लिया गया। इसके लिए समाज के मोतबीर लोगों को अधिकृत किया गया और नामाकंन से पूर्व इसकी रणनीति व कार्य योजना बनाकर प्रत्याशी खड़ा किया जायेगा। हिन्दुस्थान समाचार/मूलचन्द / ईश्वर
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