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जोधपुर की राजनीति में दिग्गजों की भरमार

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 1 2018 4:36PM
जोधपुर की राजनीति में दिग्गजों की भरमार
जोधपुर, 01 नवम्बर (हि.स.)। राजस्थान को तीन-तीन मुख्यमंत्री देने वाले जोधपुर की राजनीति पर पूरी प्रदेश की नजर रहती है। हर बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ऐडी से चोटी का जोर लगाकर अधिक से अधिक सीटें निकालने के लिए लगा देते है यहां कई ऐसे भी दिग्गज रहे है जो सात- सात बार जीत की पताका फहराते हुए विधानसभा पहुंचे हैं तो कई दिग्गजों को हार का मुंह भी देखना पड़ा है। राजस्थान में चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही राजनीति के गढ़ समझे जाने वाले जोधपुर की सियासत भी गर्म होने लगी है। राजनीतिक पार्टियों में जहां टिकट पाने वालों की होड़ मची हुई है तो दूसरी ओर प्रचार की रणनीति भी बन रही है। जोधपुर की सियासत के वर्तमान परिदृश्य पर तो सब की नजर है ही, राजनीतिक इतिहास भी कई दिग्गजों से भरा हुआ है। जिले में ऐसे कई नेता हुए जो पांच बार से भी अधिक बार जीत कर विधानसभा में पहुंचे है। साथ ही कई नेता ऐसे भी हैं जो जीत नहीं पाए लेकिन अनुभव पांच चुनाव से भी अधिक है। कई विधानसभा सीटें तो उन दिग्गज नेताओं के कारण ही जानी जाती रही है। दिग्गज कांग्रेस नेता परसराम मदेरणा नौ बार जीत कर रिकॉर्ड अपने नाम रखे हुए हैं। खेतसिंह राठौड़ और रामसिंह विश्नोई जैसे कई नाम हैं जो सात बार जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं। हालांकि इन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर में हार का भी स्वाद चखा है।कांग्रेस के खेतसिंह राठौड़ प्रदेश में पहले चुनाव से ही शेरगढ़ विधानसभा सीट से मैदान में उतरने वाले दिग्गज नेता रहे। वे सात बार चुनाव जीते और मंत्री भी बने। हालांकि इन्हें भी 3 बार हार का सामना करना पड़ा। वे 1951-52 से लेकर 2003 तक कुल 10 बार चुनाव मैदान में उतरे। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे परसराम मदेरणा कुल नौ बार चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं। 1957 में पहली बार ओसियां से जीते। यहां से दो बार जीतने के बाद भोपालगढ़ सीट से चुनाव लडऩे लगे। यहां से छह बार जीते। हालांकि एक बार 1985 में नारायणराम बेड़ा के सामने उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। 1993 में एक बार गुडामालानी से भी जीते। विधानसभा अध्यक्ष भी रहे।कांग्रेस के रामसिंह विश्नोई जोधपुर जिले में सात बार चुनाव जीत कर रिकॉर्ड बनाने वाले विश्नोई तीसरे नेता हैं। 1972 में पहली बार जीत कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2003 के चुनाव तक सक्रिय रहे। हालांकि इन्होंने भी 1993 में जसवंतसिंह विश्नोई के सामने हार का स्वाद चखा। कांग्रेस के पूनमचंद विश्नोई पहले लूणी और इसके बाद फलोदी सीट से मैदान में उतरने वाले ये दिग्गज नेता पांच बार चुनाव जीते हैं। इनमें दो बार लूणी से और तीन बार फलोदी से जीत कर विधानसभा पहुंचे। विधानसभा अध्यक्ष भी रहे। हालांकि इन्हें भी 2 बार हार का सामना भी करना पड़ा। भाजपा की सूर्यकांता व्यास सूरसागर से वर्तमान विधायक हैं। अब तक पांच बार जीत चुकी हैं। तीन बार शहर विधानसभा क्षेत्र से जीती। इसके बाद परिसीमन हुआ तो सीट बदल कर सूरसागर से चुनाव लड़ा। पिछले दो चुनाव यहीं से जीती। 1998 में एक बार शहर विधानसभा क्षेत्र से ही जुगल काबरा के सामने हार का सामना किया। भाजपा के मोहनलाल मेघवाल सूरसागर सीट से चुनावी अनुभव सात चुनावों का है। तीन बार जीत कर विधानसभा पहुंचे तो चार बार हारे हैं। कांग्रेस के नरपतराम बरवड़ सूरसागर से पांच चुनावों का अनुभव रहा है। तीन बार जीते हैं और दो बार हारे। कांग्रेस के नरेन्द्र सिंह भाटी ओसियां से छह चुनावों का अनुभव है, चार बार जीते हैं और दो बार हारे भी हैं,कांग्रेस से भाजपा में आये रामनारायण डूडी का अनुभव भी छह चुनावों का है, तीन बार जीते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ सतीश/संदीप
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