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सात बार विधायक रहे सुन्दर लाल ने राजनीति को किया गुडबाय

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 28 2018 9:03PM
सात बार विधायक रहे सुन्दर लाल ने राजनीति को किया गुडबाय

रमेश सर्राफ

झुंझुनू,। राजस्थान में झुंझुनू जिले की सूरजगढ़ व पिलानी सुरक्षित सीट से सात बार विधायक का चुनाव जीत चुके जिले के सबसे वरिष्ठ नेता सुन्दरलाल ने अगला विधानसभा चुनाव नहीं लडऩे की घोषण कर दी है। सुन्दरलाल ने कहा कि उनकी उम्र 85 साल से अधिक हो गयी है वो बढ़ती उम्र के कारण निरन्तर सक्रिय नहीं रह पाते हैं। इस कारण उन्होने आगे कोई भी चुनाव नहीं लडऩे का फैसला कर लिया है। अब उनका पुत्र कैलाश मेघवाल उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ायेगा। वे अब अपना समय भजन गाने में लगायेगें।

विधायक सुन्दर लाल अब तक 10 विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। जिसमें तीन बार वो हारे जबकि सात चुनावों में जीत हासिल की। झुंझुनू जिले के बुहाना क्षेत्र के कलवा गांव में 1933 में एक गरीब अनुसूचित जाति के घर जन्मे सुन्दरलाल को मात्र अक्षर ज्ञान ही है। बचपन में ही इनको भजन गाने का शोक लग गया था। ये गांवो में जाकर भजन गाते थे। 1965 में सुन्दरलाल झंाझा ग्राम पंचायत में पंच बने। इसी दौरान सुन्दरलाल बुहाना से कांग्रेस के प्रधान व बड़े नेता प्रहलाद सिंह यादव के पास काम करने लगे। 1972 के विधानसभा चुनाव में प्रहलादसिंह यादव खेतड़ी से कांग्रेस प्रत्याशी बने व सुन्दरलाल को सूरजगढ़ सुरक्षित सीट से कांग्रेस टिकट दिला दिया। 1972 में प्रहलाद सिंह यादव तो चुनाव हार गये मगर सुन्दरलाल पहली बार विधायक बनने में सफल हो गये। सुन्दरलाल ने उसके बाद 1980 में निर्दलीय, 1985 में कांग्रेस, 1993 में निर्दलिय, 2003 में भाजपा से सूरजगढ़ से विधायक बनते रहे। 2008 के परिसीमन में सूरजगढ़ सामान्य सीट हो गयी व जिले की पिलानी को सुरक्षित कर दिया गया। सुन्दरलाल 2008 व 2013 में वो पिलानी से भाजपा टिकट पर जीतते रहे हैं।

सुन्दरलाल 1985 से 1990 तक राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष रहे। वे 1989 से 1990 तक राज्य में संसदीय सचिव रहे। 1993 में कांग्रेस से टिकट कटने पर इन्होने भाजपा की भैंरोसिंह शेखावत सरकार को समर्थन दिया व सरकार में उर्जा, मोटर गैराज विभाग में राज्य मंत्री बने। 1998 में वो भाजपा में शामिल हो गये व 1998 से 2000 तक भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे। 2000 से लगातार भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य हैं। सुन्दरलाल 2004 से 2008 व 2015 से अब तक राजस्थान अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पद पर रहें हैं। इनको राजस्थान सरकार द्वारा केबीनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है।

राजस्थान में काका के नाम से मशहूर सुन्दरलाल ने अपने सियासी मैदान में तीन बार रिटायर्ड आईएएस को हराया तो वहीं तीन बार राजस्थान लेखा सेवा के पूर्व अधिकारी को और एक बार वाणिज्य सेवा के आला अधिकारी को चुनाव में पटकनी दे चुके हैं। सुन्दरलाल ने विधानसभा चुनावों में अब तक जिन अधिकारियों को धूल चटाई है उनमें बाबूलाल खांडा का नाम सबसे उपर है। राजस्थान लेखा सर्विस के अधिकारी रहे बाबूलाल खांडा को विधायक सुन्दरलाल ने साल 1993 और 1998 के विधानसभा चुनावों में हराया। इसके बाद सुन्दरलाल से चुनाव हारने वाले अधिकारियों में सेवानिवृत आईएएस हनुमान प्रसाद का नाम शामिल है। सेवानिवृत आईएएस हनुमान प्रसाद को साल 2003 और 2008 के विधानसभा चुनावों में सुन्दरलाल ने सियासी पटकनी दी। इसी तरह साल 2008 में ही सुन्दरलाल के सामने चुनाव मैदान में उतरे राजस्थान वाणिज्य सेवा के अधिकारी हनुमान सिंह को भी सुंदरलाल काका ने ऐसी सियासी पटकनी दी कि हनुमान सिंह की इस चुनाव में जमानत तक जप्त हो गई। वहीं साल 2013 के विधानसभा चुनाव में पिलानी सीट से सुन्दरलाल ने सेवानिवृत आईएएस अधिकारी जे पी चंदेलिया को करारी शिकस्त दी थी।

दरअसल सुन्दरलाल की उम्र 85 के पार हो चुकी है। हाल ही में बीजेपी में भी उम्रदराज नेताओं को टिकट नहीं देने का मामला उठा था और चुनावों के समय यह मामला फिर उठ सकता है। ऐसे में अपनी सीट किसी ओर के लिए खाली छोडऩे का उनका मूड़ नहीं है। अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने बेटे का नाम आगे कर दिया है। सुन्दरलाल का पुत्र कैलाश मेघवाल पहले से ही राजनीति में सक्रिय है। वह वर्तमान में झुंझुनू के चिड़ावा पंचायत समिति में प्रधान है। हालांकि सुंदर लाल काका के इस बयान के बाद उन स्थानीय बीजेपी नेताओं को धक्का लगा होगा जो काका के बाद इस सीट से भाजपा का टिकट लेने की दावेदारी में जुटे हैं।
सुन्दरलाल ने राजनीति की बारीकियां कांग्रेस के केन्द्रीय मंत्री रहे शीशराम ओला के सानिध्य में रह कर सीखी थी। मगर शीशराम ओला से बिगड़ जाने के बाद वो भाजपा में शामिल हो गये व राजनीति की बुलन्दियो पर चढ़ते गये। एक गरीब अनुसूचित जाति के घर जन्में सुन्दरलाल ने राजनीति के मैदान में कभी हार नहीं मानी व जिले में अपनी पकड़ बनाये रखी है। जिले की राजनीति में आज भी उनकी धमक बरकरार है।



 

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