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मेवाड़ की एक मात्र आरक्षित सीट कपासन में सबसे ज्यादा दावेदार

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 20 2018 7:12PM
मेवाड़ की एक मात्र आरक्षित सीट कपासन में सबसे ज्यादा दावेदार

अखिल तिवाड़ी

चित्तौडग़ढ़. प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही एक तरफ जहां निर्वाचन आयोग मशक्कत कर रहा है तो दूसरी तरफ दोनों ही राजनीतिक दलों से दावेदार भी टिकट के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। वैसे तो चित्तौडग़ढ़ जिले में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां जिला मुख्यालय पर विधायक चन्द्रभानसिंह तो निम्बाहेड़ा से सरकार के यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी की साख दांव पर है। लेकिन जिले का एक विधानसभा क्षेत्र ऐसा भी जहां, दावेदारों में सबसे ज्यादा कशमकश देखने को मिल रहा है। कपासन विधानसभा क्षेत्र में दोनों ही राजनीतिक दलों में प्रत्येक में दो दर्जन से भी अधिक दावेदार अपनी ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के आला पदाधिकारी भी सोच में पड़े हुए हैं कि एक को टिकट दिया तो दूसरे चुनाव में नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जिले की कपासन विधानसभा क्षेत्र में टिकटों को लेकर दोनों ही प्रमुख दल भाजपा व कांग्रेस में भारी कशमकश है। हर जगह गांवों एवं कस्बों में संभावित उम्मीदवारों के नाम की चर्चा है तो उनके पोस्टर भी लगे हुए हैं। यहां क्षेत्रीय विधायक अर्जुनलाल जीनगर की साख दांव पर लगी हुई है। आए दिन सोशल मीडिया कभी किसी के तो कभी किसी को टिकट मिलने की चर्चा से सत्तारूढ़ विधायकों की नींद उड़ी हुई है। दोनों ही दलों की ओर से कई सर्वे के दौर हो चुके हैं तो संभावित उम्मीदवार देवी-देवताओं के देवरे धोक मिन्नतें मांग रहे हैं। दूसरी और कांग्रेस में दावेदारों की लिस्ट द्रोपदी के चीर की तरह बढ़ी हुई है। दोनों ही दलों के संभावित दावेदार जयपुर, दिल्ली में आला कमान के सामने अपनी दावेदारी जता रहे हैं। कांग्रेस में मुख्य रूप से पूर्व विधायक शंकरलाल बैरवा, सफाई आयोग के पूर्व अध्यक्ष आरडी जावा, शांतिलाल धोबी, विपिन यादव, आनंदीराम खटीक, मांगीलाल रेगर, कैलाश सालवी, शांतिलाल खटीक आदि दावेदारी जता रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा से प्रमुख दावेदारों में विधायक अर्जुनलाल जीनगर, सुशीला जीनगर, भागीरथ चंदेल, विश्वनाथ टांक, ताराचंद मेघवाल, भवानीशंकर जीनगर, बाबूलाल खटीक, रमेश बोरीवाल के नाम प्रमुखता से आ रहे हैं। इनके अलावा भी कई दावेदार दोनों ही दलों में हैं। यहां तक चित्तौडग़ढ़ जिले से बाहर से एससी उम्मीदार भी यहां नजरें गड़ाए बैंठे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी एवं सफाई आयोग के अध्यक्ष आरडी जावा को 2013 के विधानसभा चुनावों में कपासन से टिकट दे दिया था। लेकिन जावा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसी प्रकार 2008 में बाहरी प्रत्याशी अंजना पवार को भी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा से अंजना पवार तथा कांग्रेस से शंकर लाल बैरवा को टिकट मिला था। उस दौरान वर्तमान विधायक अर्जुनलाल जीनगर निर्दलीय खड़े हुए थे, जिसके कारण कांग्रेस के शंकरलाल बैरवा विजयी हुए थे। ऐसे में 2018 के चुनावों में कपासन सीट पर स्थानीयता का नारा परवान पर है। स्थानीय उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने की मांग मुखर हो रही है। यह सीट परंपरागत जाट बाहुल्य सीट है लेकिन मेवाड़ की एक मात्र एससी आरक्षित सीट भी है। ऐसे में यहां भाजपा सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए नए चेहरे पर दांव खेल सकती है। भाजपा में जहां वर्तमान विधायक जीनगर स्वयं ताल ठोंक रहे हैं। वहीं विरोध अधिक होने की स्थिति में जीनगर के स्थान पर पूर्व जिला प्रमुख एवं अर्जुनलाल जीनगर के छोटे भाई की पत्नी सुशीला जीनगर को भी टिकट दिलाने के प्रयास हैं। इससे कि महिला कोटा भी पूरा हो जाए व अर्जुनलाल जीनगर के विरोधियों को भी शांत कराया जा सके। भाजपा में नए चेहरे के रूप में पूर्व विधायक डॉ शंकर भानुदा तथा बद्रीलाल जाट के सहयोगी भागीरथ चंदेल की दावेदारी प्रमुखता से है। समाजसेवी के साथ ही स्थानीय के रूप में पहचान है। इसके अलावा एससी मोर्चा के जिलाध्यक्ष रमेश बोरीवाल भी प्रमुखता से दांव ठोक रहे हैं। बोरीवाल पूर्व में हिंदूवादी संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा बाबूलाल खटीक भी इसी विधानसभा क्षेत्र से होकर भादसोड़ा निवासी है तथा पूर्व में एससी मोर्चा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। विश्वनाथ टांक भी प्रमुखता से दावेदारी जता रहे हैं। इधर, कांग्रेस में भी पूर्व विधायक शंकरलाल बैरवा व पूर्व सफाई आयोग के अध्यक्ष आरडी जावा इस सीट पर अपना दावा जता रहे हैं। वहीं लोकसभाध्यक्ष आंनदीराम खटीक, कांग्रेस आईटी सेल के संयोजक वीपिन यादव भी दावेदारों की दौड़ में आगे हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि दोनों ही राजनीतिक दलों से टिकट किसको मिलता है। टिकट के लिए अपनी ही पार्टी के पदाधिकारियों से नूरा कुश्ती में कौन आगे बढ़ता है। कपासन विधानसभा क्षेत्र में जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा यह तो बाद की बात है लेकिन सबसे पहले इतने दावेदारों के बीच टिकट लाना प्राथमिकता है।

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