Hindusthan Samachar
Banner 2 सोमवार, नवम्बर 19, 2018 | समय 09:08 Hrs(IST) Sonali Sonali Sonali Singh Bisht

मारवाड़ जंक्शन में पिछली बार 4496 मतदाताओं को पसंद नहीं आया ‘प्रत्याशी’

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 26 2018 3:17PM
मारवाड़ जंक्शन में पिछली बार 4496 मतदाताओं को पसंद नहीं आया ‘प्रत्याशी’

रोहित

पाली। चुनावी तिथि के नजदीक आते-आते न सिर्फ पार्टियों से दावेदारी करने वाले दावेदारों की धडक़नें तेज हो रही है। बल्कि, मतदाता भी संभावित दावेदार को लेकर चर्चा में मशगूल है। पाली जिले की छह विधानसभा सीटों पर किस पार्टी से कौन उम्मीदवार होगा, इसे लेकर चटकारों का दौर शुरू हो चुका है। राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा के चुनाव है। इस बार प्रमुख पार्टियों के दावेदारों को सर्वाधिक चिंता नोटा की सता रही है।

एट्रोसिटी एक्ट को लेकर पिछले दिनों जो माहौल बना और सोशल मीडिया पर सवर्ण समाज ने जिस तरह से एससी-एसटी एक्ट को लेकर मुहिम छेड़ रखी है, उससे प्रमुख दावेदारों में अपना वोट प्रतिशत गिरने की आशंका बढ़ रही है। वर्ष 2013 के चुनावों में जिले की 6 विधानसभा सीटों पर 55 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था और इस दौरान 18 हजार 753 मतदाताओं को किसी भी पार्टी का प्रत्याशी पसंद नहीं आया। छह विधानसभाओं में इन मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया था। यानी इन सबने किसी भी प्रत्याशी या पार्टी को वोट नहीं दिया था। इसमें सबसे अधिक मारवाड़ विधानसभा के 4496 मतदाताओं ने अपने प्रत्याशियों को पसंद नहीं किया था।

पाली में सबसे कम एक हजार 925 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। मारवाड़ में सबसे अधिक तो पाली में सबसे कम पिछले चुनाव में जिले में 66.94 फीसदी वोटिंग हुई थी। इसमें जैतारण विधानसभा सीट पर 2038 (1.22 फीसदी), सोजत विधानसभा सीट पर 3485 (2.54 फीसदी), पाली विधानसभा सीट पर 1925 (1.27 फीसदी), मारवाड़ जंक्शन सीट पर 4496 (3 फीसदी), बाली विधानसभा सीट पर 3623 (2.01 फीसदी) और सुमेरपुर विधानसभा सीट पर 3186 (2.09 फीसदी) मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया।

इस बार जैतारण सीट पर 277147, सोजत सीट पर 222105, पाली सीट पर 246401, मारवाड़ जंक्शन सीट पर 269659, बाली सीट पर 303501, सुमेरपुर सीट पर 283013 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। क्या है नोटाः ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में नन ऑफ द अबाओ यानी नोटा का विकल्प दिया गया है। अगर वोटर किसी प्रत्याशी को वोट नहीं देना चाहता तो वह नोटा का बटन दबा सकता है। 2013 में 11 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में हुए विधानसभा चुनाव में पहली बार नोटा का विकल्प रखा गया था। पहली बार मतदाताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ईवीएम में नोटा का विकल्प देखा था।

image