Hindusthan Samachar
Banner 2 सोमवार, नवम्बर 19, 2018 | समय 09:23 Hrs(IST) Sonali Sonali Sonali Singh Bisht

बागी हिला सकते हैं भाजपा व कांग्रेस की सियासी जमीन

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 25 2018 5:47PM
बागी हिला सकते हैं भाजपा व कांग्रेस की सियासी जमीन

रोहित पारीक
पाली। एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस के मिथक को तोडऩे के लिए राजस्थान में सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी वसुंधरा सरकार का राजनीतिक खेल इस बार बागी बिगाड़ सकते हैं। टिकट वितरण से पहले दो दौर की रायशुमारी कर चुकी भाजपा में दो सौ सीटों के लिए करीब दस हजार दावेदार है, जबकि कांग्रेस में यह आंकड़ा पांच हजार को पार कर चुका है। कांग्रेस के पास इस समय खोने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए उसे इस बात की चिंता नहीं है। लेकिन, भाजपा में बगावत का इतिहास काफी पुराना है, इसलिए उसे टिकट वितरण में फूंक-फूंककर कदम रखना पड़ रहा है।

राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव से पहले 200 विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस करीब पांच हजार संभावित दावेदारों से जूझ रही है, जो बागी होकर राज्य में गणित बिगाड़ सकते हैं। कांग्रेस से बीजेपी में जाने का मन बना रहे कांग्रेस नेता बीजेपी के लिए भी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि उन्हें टिकट देकर बीजेपी अपने आधिकारिक उम्मीदवार को किनारे करने का रिस्क नहीं लेना चाह रही। ऐसी स्थिति में बागी उम्मीदवार नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों की टिकट मिलने की संभावनाएं कम कर रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि सत्तारूढ़ बीजेपी में भी कई उम्मीदवार टिकट न मिलने पर बागी होंगे, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजस्थान में दोनों दल कड़ी टक्कर के लिए तैयार हैं, इसलिए दोनों पार्टियां अपनी हिस्सेदारी और उम्मीदवारों को सर्वश्रेष्ठ रखेंगी। ऐसे में टिकट न मिलने पर नाराजगी होगी, जिसके परिणामस्वरूप बागी होकर कई उम्मीदवार अपनी पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। दरअसल, पांच साल तक सत्ता से बाहर रही कांग्रेस में बीजेपी की तुलना में ज्यादा बागी उम्मीदवारों के सामने आने की संभावना है। वरिष्ठ नेता इस चुनौती के लिए पार्टी को तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत सभाओं में कह भी रहे हैं कि, हर कोई टिकट नहीं ले सकता है, लेकिन पार्टी के लिए काम करने वाले लोगों को हम उचित रूप से समायोजित करेंगे। वर्ष 2013 में कांग्रेस को बगावत के चलते 17 नेताओं को निष्कासित करना पड़ा था, जबकि बीजेपी ने 16 को बाहर किया था। इन बागी उम्मीदवारों ने न केवल कुछ सीटें जीतीं, बल्कि कई अन्य सीटों में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को भी नुकसान पहुंचाया था। 2013 के चुनाव में 26 ऐसी सीटें थीं जहां जीत का मार्जिन पांच हजार वोटों से कम का था। ऐसी सीटों पर बागी नेता इस बार परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

जो बागियों को साधेगा वो जीतेगा: राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस एवं भाजपा सहित प्रमुख पार्टियों में टिकटों की दावेदारियां पेश हो चुकी है। बड़ी तादाद में दावेदारों के सामने आने से दोनों ही पार्टियों के नेताओं में उत्साह है, लेकिन अंदर ही अंदर बागियों के उतरने का भी अंदेशा है। माना जा रहा है कि टिकट से वंचित बड़ी संख्या में पार्टी नेता बगावत कर सकते हैं। ऐसे में जो पार्टी बागियों को काबू में कर लेगी चुनाव में वह ज्यादा फायदे में रहेगी।
 

image