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भीलवाड़ा : चुनावी प्रबंधन में भाजपा आगे, कांग्रेस सुस्त

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 29 2018 11:56AM
भीलवाड़ा : चुनावी प्रबंधन में भाजपा आगे, कांग्रेस सुस्त

मूलचन्द पेसवानी 

भीलवाड़ा। प्रदेश की राजनीति में अपना अलग वर्चस्व रखने वाले वस्त्र नगरी भीलवाड़ा जिले में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा व कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा तो नहीं की है परंतु प्रत्याशियों के चयन प्रक्रिया के बीच ही चुनावी सत्ता संघर्ष अब बढ़ गया है। चुनावी तैयारियों के लिहाज से अभी प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा कांग्रेस से आगे दिख रही है। प्रदेश सरकार के खिलाफ माहौल होने के अंदेशे को लेकर भाजपा ने बूथ मेनजमेंट अभी से प्रारंभ कर दिया है|

कहने को तो कांग्रेस की तैयारियां भी संगठन में चल रही हैं पर वो अभी प्रत्याशियों की ऊहापोह में ही चल रही है। जिले की कुछ सीटों पर भाजपा व कांग्रेस बदलाव की बात कह रही है। अगर ऐसा होता है तो वहां बगावत के संकेत अभी से साफ दिखने लगे हैं। अभी भाजपा जिले की सात में से पांच सीटों पर काबिज है। कांग्रेस के केवल जहाजपुर व मांडलगढ़ में विधायक हैं। शेष पांच सीटों भीलवाड़ा, शाहपुरा, सहाड़ा, आसींद व मांडल में भाजपा के विधायक हैं। मांडल के विधायक कालूलाल गुर्जर राजस्थान सरकार में मुख्य सचेतक तो शाहपुरा विधायक कैलाश मेघवाल विधानसभा अध्यक्ष के ओहदे पर हैं। वैसे भीलवाड़ा जिले में वसुंधरा राजे के कार्यकाल में आम आदमी खुश नजर नहीं आ रहा है।

इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रेज या उनका जादू आज भी जनता पर साफ दिख रहा है। जिले में लगातार कांग्रेस ने ब्लाॅक से लेकर जिला स्तर पर सरकार के खिलाफ खूब प्रदर्शन कर लोगों की सहानुभूति बटोरी है। दूसरी ओर, भाजपा हमेशा गुटबाजी का शिकार होती रही है। इसी कारण अभी 20 दिन पूर्व ही भाजपा को जिला अध्यक्ष पद पर दामोदर अग्रवाल को हटाकर पूर्व न्यास अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड को पदस्थापित करना पड़ा। डाड की प्राथमिकता ही यह दिख रही है कि गुटबाजी को समाप्त कर रूठे भाजपाईयों को मनाकर पार्टी की मुख्यधारा में जोड़ें। भारतीय जनता पार्टी द्वारा कराये गये सर्वे में शाहपुरा से विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल और माण्डल में वर्तमान विधायक कालूलाल गुर्जर की दुबारा जीत के प्रति संशय जताया गया है। इस कारण पार्टी यहां पर टिकट बदलने के मूड में है।

भाजपा के पास यहां फिलहाल इनका कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा है। अगर इन्हें टिकिट नहीं दिया गया तो ये यहां भाजपा का समीकरण बिगाड़ सकने की स्थिति में तो हैं ही। भाजपा हाईकमान सहाडा के विधायक बालूराम चौधरी और आसींद के विधायक रामलाल गुर्जर का टिकिट रोकना चाह रहा है। दोनों विधायकों के कारण पार्टी की मीडिया में बहुत किरकिरी हुई थी| संगठन ने भी इनके खिलाफ रिपोर्ट दी है पर पार्टी जातिगत वोट की बहुसंख्या के चलते इनको रिप्लेस करने का रिस्क नहीं उठाना चाह रही है। भाजपा भीलवाड़ा में संघनिष्ठ सुभाष बहेडिया के साथ आसींद में विट्ठल शंकर अवस्थी तथा माण्डलगढ़ में भगवान सिंह या अविजीत सिंह बदनोर को चुनाव लड़ाने पर भी मशक्कत कर रहा है ताकि एंटी इनकम्बेंसी के बावजूद सीटें बचाई जा सके।

भीलवाड़ा विस क्षेत्र

जिला मुख्यालय वाली भीलवाड़ा में अधिकांश मतदाताओं के शहरी होने के कारण यहां भाजपा का प्रभाव है। विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी के कामकाज से भी लोगों में संतोष है। परंतु पिछले दिनों नगर परिषद सभापति ललिता समदानी को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते भाजपा से निकालने व सरकार द्वारा उसे निलंबित करने के मामले को लेकर कांग्रेस इसे लेकर मुखर है। इसका नुकसान भाजपा को होगा। यहां विट्ठलशंकर अवस्थी दोबारा प्रत्याशी की दौड़ में सबसे आगे हैं| ब्राह्मण होने के कारण स्वजाति के वोटों व अपने संपर्क और संघ कार्यकर्ता की बदौलत वह अपना दावा जता रहे हैं। यहां भाजपा वर्तमान सांसद सुभाष बहेड़िया को भी एनवक्त पर उतार सकती है।

भीलवाड़ा विधानसभा सीट पर वर्तमान भाजपा विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी को तीसरी बार मौका देने के मामले में पार्टी में कोई दो राय नहीं है। आरएसएस खाते की इस सीट को सरकार विरोधी लहर से बचाने के लिये पार्टी अपने वर्तमान सांसद सुभाष बहेडिया की तरफ देख रही है जो वर्तमान हालत में चुनाव लड़ने में बेहद इच्छुक नहीं हैं। उधर,कांग्रेस में पिछले चुनाव में पराजित होने वाले नगर परिषद के पूर्व सभापति ओम नाराणीवाल दावेदारी में अव्वल हैं परंतु जिले की पार्टी की रणनीति के तहत यहां ब्राह्मण प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस जिला अध्यक्ष रामपाल शर्मा को भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है। उद्योगपति रिझु झुंझनुवाला के नाम पर भी विचार हो रहा है।

शाहपुरा विस क्षेत्र

जिले में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित शाहपुरा सीट के वर्तमान विधायक कैलाश मेघवाल के दोबारा शाहपुरा से ही चुनाव लड़ने का दावा करने के कारण यहां अभी असमंजस की स्थिति बनी है। मेघावाल के राजनीतिक इतिहास को देखें तो वह दोबारा एक सीट से कहीं से भी चुनाव नहीं लड़े हैं। शाहपुरा से पूर्व में एक बार वह जीते तो दूसरी बार लड़ने पर हार गए थे। उनकी उम्र भी 85 पार हो चुकी है। भाजपा के नीतिगत निर्णय के अनुसार अभी उनके टिकट के बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं है। हालांकि शाहपुरा में मेघवाल के समकक्ष दावेदारी करने वाला कोई नहीं है। परंतु पिछले चार सालों में कैलाश मेघवाल से शाहपुरा क्षेत्र में नाराजगी रखने वाले नेताओं ने 'मेघवाल हटाओ शाहपुरा बचाओ' का नारा देकर सियासी राजनीति को तेज कर दिया है। शाहपुरा व बनेड़ा पंचायत समिति के दोनों प्रधानों के साथ ही क्षेत्र के वरिष्ठ नेता उनके नाम पर राजी नहीं हैं। इस कारण यहां एनवक्त पर प्रत्याशी बदला जा सकता है। इसमें बनेड़ा के प्रधान राजमल खिंची, शाहपुरा के अविनाश जीनगर, भीलवाड़ा के शिवलाल डिडवानिया का नाम आ सकता है। कांग्रेस में गत चुनाव में पराजित होने वाले राजकुमार बैरवा अभी दौड़ में अव्वल हैं। बैरवा को गत चुनाव में वरिष्ठ नेता डा. सीपी जोशी ही नौकरी छुड़ा कर राजनीति में लाये थे| उसके बाद से बैरवा क्षेत्र में रहकर ही पार्टी की सेवा कर रहे हैं। बैरवा व बलाई और रेगर समाज के मतदाताओं के बाहुल्य होने से बैरवा प्रत्याशी ही पार्टी की प्राथमिकता है। इसके अलावा यहां दौड़ में पूर्व विधायक महावीर जीनगर, घुमंतु बोर्ड के पूर्व चेयरमैन गोपाल केसावत, इंजीनियर धर्मराज बैरवा, गैस एजेंसी संचालक रामेश्वर सोलंकी, दुर्गा देवी बैरवा के नाम प्रमुखता से लिये जा रहे हैं।

जहाजपुर विस क्षेत्र

मीणा बाहुल्य जहाजपुर में अभी कांग्रेस के धीरज गुर्जर विधायक हैं। गत चुनाव में समूचे मेवाड़ में पार्टी के वे इकलौते विधायक रहे। इस बार भी उनका प्रत्याशी बनना तय है। राहुल गांधी से सीधा संपर्क होने के कारण तथा अभी प्रदेश महामंत्री होने से उन्होंने अपना चुनावी कैंपेन भी चालू कर दिया है। यहां उनको क्षेत्र में गुर्जरवाद को बढ़ावा देने के आरोप के चलते इस बार कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। विगत दिनों उनके द्वारा किये गये अनशन व आंदोलन तथा उनके भाई की कोटड़ी क्षेत्र में कार्यशैली की नाराजगी उनको झेलनी पड़ सकती है। भाजपा से यहां गत चुनाव में वर्तमान प्रधान शिवजीराम मीणा पराजित हुए थे। जहाजपुर विधानसभा में पार्टी की गत चुनाव में हार को प्रत्याशी शिवजी राम मीणा का अति उत्साही होना और संघ का उन पर अविश्वास बड़ा कारण माना गया है पर हार के बाद लगातार पांच साल तक उनके सतही संघर्ष के कारण उन्हें एक और मौका दिये जाने की संभावना साफ दिख रही है। इस बार भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनकी नजदीकियों के कारण वे अभी दौड़ में आगे हैं परंतु मीणा समुदाय के ही सेवानिवृत कस्टम कलेक्टर शिवजीराम व सेवानिवृत आईएएस शिवजीराम प्रतिहार की दावेदारी करने से ऊहापोह की स्थिति बन गयी है।

आसींद विस क्षेत्र

गुर्जर समाज के अराध्य सवाईभोज मंदिर वाली आसींद विधानसभा से अभी भाजपा के रामलाल गुर्जर विधायक हैं। यों तो उन पर कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं है तथा मुख्यमंत्री के नजदीक होने से वे अपना टिकट पक्का मान कर चल रहे हैं। हालांकि पार्टी द्वारा कराए गए एक सर्वे में विधायक रामलाल गुर्जर को क्षेत्र में कमजोर बताया गया है और गुर्जर मतदाताओं का कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट प्रति रुझान के चलते पार्टी को प्रत्याशी बदलने की सलाह दी गयी है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यहां बदलाव भी हो सकता है। भाजपा यहां गुलाबपुरा के पूर्व पालिका अध्यक्ष करतार सिंह और दौलतगढ़ के तेज सिंह एडवोकेट में से किसी एक पर दांव आजमाना चाहती है।

आसींद में पहले कांग्रेस के खिलाफ पांच बार चुनाव में राजपूत प्रत्याशी विजयी रहे हैं जबकि एक बार कांग्रेस के गुर्जर प्रत्याशी छोगालाल जमानत भी गंवा चुके हैं। गुलाबपुरा के पालिका अध्यक्ष धनराज गुर्जर के गत दो सालों से क्षेत्र में दावेदारी कर संपर्क करने के कारण एक वर्ग उन्हें युवा विधायक के तौर पर देख रहा है। गुर्जर बाहुल्य होने से यहां गुर्जर जाति का प्रत्याशी बनना तय है। पंजाब के राज्यपाल महामहिम वीपी सिंह का गृह क्षेत्र होने के कारण उनके पुत्र अविजित सिंह भी चुनाव लड़ने की चाह तो रखते हैं पर बिना किसी विवाद में चुनाव लड़ना चाहते हैं।

जिले में किसी राजपूत को भाजपा के प्रत्याशी बनाने की रणनीति के तहत उनके नाम पर विचार हो सकता है। कांग्रेस में पूर्व मंत्री रामलाल जाट के अलावा पूर्व विधायक हगामीलाल मेवाड़ा ताल ठोंक रहे हैं| गत चुनाव में मेवाड़ा को बगावत करनी पड़ी थी। इस बार भी जाट के पूरा दमखम लगाने से यहां कांग्रेस में बगावत से इनकार नहीं किया जा सकता है। आसींद में गुर्जर के बजाय भाजपा राजपूत जाति के प्रत्याशी पर अपना दांव लगाना चाहती है| यह जिले में राजपूत मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए भी जरूरी बताया गया है।

मांडलगढ़ विस क्षेत्र

जिले की बूंदी-चित्तौड़गढ़ सीमा पर स्थित मांडलगढ़ विधानसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की कर्मस्थली रहने से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। यहां गत चुनाव में भाजपा की कीर्ति बाईसा चुनाव जीती थीं| पर उनके निधन से यहां उपचुनाव कराया गया जिसमें भाजपा की बुरी हार हुई। वह भी तब जब कांग्रेस से बागी प्रत्याशी मैदान में था। उपचुनाव में यहां कांग्रेस के विवेक धाकड़ जीते। वे दोबारा अपनी दावेदारी कर रहे हैं। माण्डलगढ़ में हाल ही हुए उपचुनाव में हार के लिए प्रत्याशी चयन को सर्वे में कसूरवार ठहराया गया है और राजपूत की जगह ब्राह्मण प्रत्याशी को उम्मीदवारी देने की सलाह दी गयी है।

वर्तमान में पूर्व विधायक संघ के बद्रीप्रसाद गुरुजी और हरीश भट्ट बिगोद को बेहतर प्रत्याशी बताया गया है। यहां कांग्रेस अभी बहुत ज्यादा उत्साहित है पर अभी प्रत्याशी तय करने में पार्टी को दिक्कत हो रही है। उपचुनाव में भाजपा के जिला प्रमुख शक्ति सिंह चुनाव हार गये थे| वे पुनः दावेदारों में अग्रणी हैं पर स्थानीय के मुद्दे पर मांडलगढ़ की प्रधान घनश्याम कंवर पुरावत ने ताल ठोंक रखी है। इसके अलावा संघ पृष्ठभूमि के विवेकानंद केंद्र के प्रांतीय पदाधिकारी भगवान सिंह भी यहां दावेदारी कर रहे हैं। यहां उपचुनाव में कांग्रेस से बगावत करने वाले गोपाल मालवीय के 40 हजार मत लेने के कारण तथा इस बार पुन दावेदारी करने के कारण भी दोनों दल अभी उनके कदम का इंतजार कर रहे हैं। मालवीय दोनों दलों के संपर्क में बताये जा रहे हैं।

सहाड़ा विस क्षेत्र

जाट व ब्राह्मण वर्ग के प्रभुत्व वाले सहाड़ा सीट से पूर्व शिक्षा मंत्री डा. रतनलाल जाट के भाई डा. बालूराम जाट अभी विधायक हैं। उनके लंबे समय से बीमार होकर संगठन दृष्टि से निष्क्रिय होने व भाजपा के एक बड़े वर्ग के जाट परिवार के खिलाफ होने से यहां भाजपा टिकट बदलने का मानस कर रही है। सहाडा में पूर्वमंत्री डा. रतन लाल जाट अपने भाई को रिप्लेस कर सकते हैं। यहां रूपलाल जाट की लाॅटरी खुल सकती है। कांग्रेस में यहां पूर्व विधायक व गत चुनाव में पराजित कैलाश त्रिवेदी अपना टिकट पक्का मान रहे हैं। इनके अलावा उद्योगपति चेतन डिडवानिया व पूर्व मंत्री रामलाल जाट भी यहां दावेदारी कर रहे हैं।

मांडल विस क्षेत्र

राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर अभी यहां से विधायक हैं। इस बार भी वे अपनी दावेदारी कर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। प्रदेश भाजपा ने उनसे इस बार चुनाव न लड़ने का भी अनुरोध किया जिससे वे इनकार कर चुके हैं। माण्डल में विधायक कालूलाल गुर्जर के स्थान पर उनकी पत्नी और सुवाणा की प्रधान सरोज गुर्जर को महिला कोटे से सीट देने की सलाह दी गयी है पर गुर्जर द्वारा स्वयं चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करने के बाद इस पर और चर्चा करने पर पूर्ण विराम लगना माना जा रहा है। इस बार के कार्यकाल में यहां भाजपा में गुटबाजी के चलते एक बड़ा वर्ग उनसे नाराज है। इस वर्ग की तरफ से यहां उदयलाल भड़ाणा (गुर्जर) जोरदार तरीके से दावेदारी कर रहे हैं।

पिछले दो सालों से क्षेत्र में उनके जीवंत संपर्क से यह नहीं लगता है कि उनको प्रत्याशी नहीं बनाया तो वो निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ेंगे| उनका व कालूलाल गुर्जर का व्यक्तिगत संघर्ष भी साफ जाहिर है। यहां कांग्रेस से जिला अध्यक्ष रामपाल शर्मा की दावेदारी दम रख रही है। उनका इकबालिया बयान है कि वे इस बार चुनाव में कालूलाल गुर्जर को पटकनी देंगे| गत चुनाव में वे हार गये थे। हालांकि यहां पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष कु. देवेंद्र सिंह के पौत्र प्रद्युमन सिंह के अलावा पूर्व मंत्री रामलाल जाट भी दावेदारी कर रहे हैं परंतु रामपाल शर्मा के डा. सीपी जोशी के निकटस्थ होने के कारण वे अपनी दावेदारी को मजबूत मानकर चल रहे हैं।

17 लाख 8 हजार 400 मतदाता तय करेंगे उम्मीदवारों का भाग्य

जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में 17 लाख 8 हजार 400 मतदाता है तथा 1931 मतदान केन्द्र है। आसींद विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 72 हजार 877 मतदाता, मांडल में 2 लाख 45 हजार 445 मतदाता, सहाड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 2 लाख 36 हजार 895 मतदाता, भीलवाड़ा में 2 लाख 55 हजार 807 मतदाता, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित शाहपुरा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में 2 लाख 34 हजार 702 मतदाता, जहाजपुर में 2 लाख 29 हजार 739 मतदाता, मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 32 हजार 935 मतदाता हैं।

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