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''अकबर 97 वकील करें या 970, पीड़ित महिलाएं नहीं झुकेंगी''

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 21 2018 4:57PM
'अकबर 97 वकील करें या 970, पीड़ित महिलाएं नहीं झुकेंगी'
कृष्णमोहन
नई दिल्ली। मोबाशर जावेद अकबर उर्फ एम.जे. अकबर को प्रिया रमानी सहित 20 महिला पत्रकारों द्वारा (संख्या और बढ़ने की संभावना है) यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। सत्ता व संगठन की भद्द होने के चलते न चाहते हुए भी उन्हें मंत्री पद से हटाना पड़ा। इसके पहले आका से उर्जा पाकर अकबर ने कहा था कि लोकसभा चुनाव के कुछ माह पहले उनके विरुद्ध यह आरोप लगाये गये हैं। इसके पीछे कोई एजेंडा है और उन्होंने एक ला फर्म के माध्यम से प्रिया रमानी पर पटियाला हाउस कोर्ट में मानहानि का मुकदमा किया है, लेकिन एआईसीसी सदस्य अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि एमजे अकबर चाहे 97 वकील करें या 970, उससे मुकदमे की सुनवाई में कोई फर्क नहीं पड़ना है।
 
कहा जाता है कि ला फर्म के 97 वकील अकबर की तरफ से लगे हैं। इसकी एक सुनवाई हो गई है। अगली तारीख पर अकबर का बयान लिया जाना है, लेकिन इससे बिना डरे प्रिया रमानी सहित पांच महिला पत्रकारों ने कहा है कि वे मुकदमा लड़ने के लिए तैयार हैं। अन्य सभी ने अकबर के विरुद्ध गवाही देने की बात कही है। इससे लगता है कि जिन महिलाओं ने एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाये हैं उनमें से कई ऐसी हैं जो खुलकर अपनी पूरी क्षमता के साथ अकबर से हर तरह से लड़ने को तैयार हैं। इन तीन महिलाओं में इस समय संपादक हैं।
 
सर्वोच्च न्यायालय के वकील बीएस बिल्लौरिया का इस बारे में कहना है कि किसी भी मुकदमे में अपना बचाव करना सबका अधिकार है। यदि इस मामले में नार्को टेस्ट, लाई डिक्टेटर टेस्ट होता है तो वह एमजे अकबर का भी होगा। आरोप लगाने वाली महिलाएं यदि यौन शोषण करने वाले आरोपित को सजा दिलाने के लिए तैयार हैं तो किसी के यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि कुछ माह बाद लोकसभा चुनाव हो रहा है, इसलिए उन पर इस तरह के आरोप लगाये गए हैं। क्योंकि अमेरिका से शुरू हुआ “मी टू” अभियान भारत में बीते कुछ माह में परवान चढ़ा है।
 
उन्होंने कहा कि और किसी ने भी किसी महिला का उसकी किसी मजबूरी का फायदा उठाकर यौन शोषण किया है, उस मामले में मुकदमा होता है, तो न्यायालय उस पर विचार करेगा। रही बात यह कि ये महिलाएं अब तक चुप क्यों थीं, इतने वर्ष बाद ये आरोप क्यों लगा रही हैं? क्योंकि तब “मी टू” अभियान नहीं था। तब उनको यौन शोषण करने वाले पावरफुल व्यक्ति से कई तरह से नुकसान पहुंचने का डर होगा। अब “मी टू” अभियान में बहुत-सी महिलाओं को समाज का सहयोग मिला है तो वे खुलकर सामने आ गई हैं।
 
इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के एक अन्य वकील विनयप्रित सिंह का कहना है कि न्याय के लिए कोई भी व्यक्ति कभी भी न्यायालय की शरण में जा सकता है। अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार, यौन उत्पीड़न का कोई भी पुरुष या महिला कभी भी खुलासा कर सकता है। आरोपी अपने व अपने पद के बचाव के लिए कोई भी तर्क देने को स्वतंत्र है। लेकिन कई देशों में यह भी कानून है कि यौन उत्पीड़ित व्यक्ति 15 वर्ष या उसके बाद भी शिकायत कर सकता है और न्यायालय तो कई मामलों में मानवीय आधार पर समाज के हित के लिए ऐसे मामलों में कभी भी मुकदमा दर्ज कर सकता है।
 
जहां तक सत्ताधारी पार्टी भाजपा व उसकी जननी संघ की बात है, तो आपसी बातचीत में इसके ऊंचे पदों पर बैठे लोग इस मुद्दे पर असहज महसूस कर रहे हैं। संघ के एक बुजुर्ग ने कहा कि इससे सरकार व पार्टी की नैतिकता और शुचिता की धार भोथरी हो रही है। इस बारे में एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। राम जेठमलानी कानून मंत्री थे। उन पर कुछ आरोप लगा। वह एक विश्वविद्यालय में किसी समारोह में भाषण देने कार से मुंबई से पूणे जा रहे थे। उनको केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह ने फोन किया। कहा कि भारी मन से एक बात कहना चाहता हूं। प्रधानमंत्री (वाजपेयी) आपका अभी इस्तीफा चाहते हैं। जेठमलानी ने कहा कि ठीक है, भेज देता हूं। उसके लगभग 21 मिनट बाद जसवंत सिंह ने फिर जेठमलानी को फोन किया। कहा कि बास आपके इस्तीफे का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद जेठमलानी किसी साइबर कैफे में गये। एक सादे कागज पर हाथ से लिखकर इस्तीफा फैक्स कर दिया।
 
एआईसीसी सदस्य अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि एमजे अकबर चाहे 97 वकील करें या 970, उससे मुकदमे की सुनवाई में कोई फर्क नहीं पड़ना है। क्योंकि अभी तक जिन 20 महिलाओं ने उन पर यौन शोषण के आरोप लगाये हैं, वे पत्रकारिता क्षेत्र की महिलाएं हैं और उनमें से बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जो दबने या डरने वाली नहीं हैं। इस समय संपादक पद पर हैं। उनको उनके परिवार, संस्थान, कार्यक्षेत्र की महिलाओं व समाज का समर्थन मिल रहा है। इसलिए जब तक यह मुकदमा चलेगा, भाजपा सांसद एम.जे. अकबर सरकार, पार्टी और संघ के लिए किरकिरी का एक प्रमुख कारण बने रहेंगे।
 
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