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भारत का एक मात्र योग विश्वविद्यालय ''एस-व्यासा'' आश्रम से बन गया पांच सितारा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jun 18 2018 10:33AM
भारत का एक मात्र योग विश्वविद्यालय 'एस-व्यासा' आश्रम से बन गया पांच सितारा
नई दिल्ली, 18 जून (हि.स.)। “स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान” (एस-व्यासा) डीम्ड विश्व विद्यालय,बेंगलुरु एक निजी विश्वविद्यालय है। इसको “विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान” (विवेकानंद योग रिसर्च फाउंडेशन) सोसायटी संचालित करती है, जिसके अध्यक्ष डॉ एचआर नागेन्द्र हैं। डॉ नागेन्द्र 'एस-व्यासा' के चांसलर भी हैं। 1981 में जब यह सामाजिक संस्था शुरू की गई तो इसका नाम 'विवेकानंद केन्द्र चिकित्सा तथा अनुसंधान समिति' था। 1986 में इसका नाम बदलकर 'विवेकानंद केन्द्र योग अनुसंधान संस्थान' कर दिया गया। उसके बाद फरवरी,2000 में इसका नाम बदलकर 'विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान' किया गया। इसकी शुरुआत करने वालों में प्रमुख हैं मोहन जी, जो अब भी संस्थान में हैं लेकिन विरक्त भाव से। आश्रम की तरह शुरू किये इस संस्थान को सत्ता की छांव में सात सितारा राह पकड़ते देख, वह विरक्त हो गये हैं। डॉ एच.आर. नागेन्द्र इस परिसर में रहने 1986 में आये। डॉ नागेन्द्र ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस,बैंगलुरु से 1968 में मैकेनिकल इंजिनियरिंग में पीएचडी करने के बाद पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च 1969 में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलम्बिया,कनाडा से किया था। वहां से वह नासा,अमेरिका चले गये थे और कई साल, कई संस्थाओं में रहे। उसके बाद सब छोड़कर 1975 में विवेकानंद केन्द्र कन्या कुमारी में पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गये। वह वहां उसके संस्थापक एकनाथ रानाडे के सहयोगी और संस्था के अवैतनिक निदेशक हो गये। इस दौरान वह विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी में विभिन्न पदों पर रहे। एकनाथ रामकृष्ण रानाडे का देहावसान 1802 में होने के बाद डॉ नागेन्द्र कन्याकुमारी में और 3 वर्ष रहे। वह वहां से 1986 में बंगलौर में आ गये। उसी वर्ष सोसायटी का नाम बदला गया। फिर 2000 में बदलकर 'विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान' किया गया और उसके अध्यक्ष डॉ एच.आर. नागेन्द्र हो गये, वह तबसे उस संस्था के अध्यक्ष हैं। मई 2001 में उस सोसायटी ने कर्नाटक सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 'स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान”'एस-व्यासा) डीम्ड विश्वविद्यालय, बंगलुरु खोला, जिसके कुलपति डॉ नागेन्द्र बने और 2012 तक इस पद पर रहे। कहा जाता है कि सामाजिक संस्था का अध्यक्ष व उसके द्वारा संचालित विश्वविद्यालय का कुलपति एक ही व्यक्ति नहीं होना चाहिए के कानूनी व्यवधान के कारण डॉ नागेन्द्र 2013 में कुलपति पद छोड़कर विश्वविद्यालय का चांसलर बन गये। यह संस्था बेंगलुरु से 32 किलोमीटर दक्षिण में जिगनी के पास है। यह पहाड़ी व जंगल वाले क्षेत्र में लगभग 100 एकड़ में है, जिसमें कुछ हिस्सा 'विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान' का है। इसमें डॉ नागेन्द्र समेत संस्था के अन्य कई पदाधिकारियों के आवास हैं। एस-व्यासा के अरोग्य धाम में डॉ एच.आर. नागेन्द्र की बहन डॉ नागरत्ना निदेशक हैं। उनके और उनकी बहन नागरत्ना की देखरेख में यहां योग से संबंधित शोध हो रहे हैं। डॉ नागेन्द्र का दावा है कि आज दुनिया में योग पर जो भी शोध कार्य हुए हैं, उनमें से लगभग 75 प्रतिशत इस विश्वविद्यालय में किए गये हैं, जिसके कारण विश्व में योग को वैज्ञानिक मान्यता मिलने में मदद मिली है। संघ के बड़े नेता रहे शेषाद्री जी डॉ एच.आर. नागेन्द्र के चाचा थे। वह 'विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान' परिसर यानि प्रशांति में ही रहते थे। उनसे मिलने नरेन्द्र मोदी जाते रहते थे। उस समय डॉ एच.आर. नागेन्द्र वहां योग कराते थे। वहीं 1986 में डॉ नागेन्द्र से उनका परिचय हुआ। मोदी ात के मुख्यमंत्री बन गये, तो डॉ नागेन्द्र उनके यहां गये और उनसे विधायकों, अफसरों को कुछ दिन का योग शिविर कराने का आग्रह किये। उसके बाद मोदी प्रतिवर्ष वहां डॉ नागेन्द्र से योग शिविर कराने लगे थे। मई 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बन गये। संघ के बड़े नेता मदनदास देवी हर कुछ माह बाद एस-व्यासा,बेंगलुरु जाते रहते हैं। डॉ नागेन्द्र ने उनसे आग्रह करके संघ प्रमुख मोहन भागवत को प्रशांति में आमंत्रित किया। संघ प्रमुख आये तो उनसे आग्रह किया किया गया कि योग को देश व विश्वस्तर पर बढ़ाने के लिए 21 जून को योग दिवस घोषित करने का सुझाव मोदी के दे दें, कह दें। जिस पर संघ प्रमुख ने भैयाजी जोशी से मिलने के लिए कहा। ये लोग भैया जी जोशी से मिले और उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कह दिया। इसके बाद जब डॉ एच.आर. नागेन्द्र और डॉ नागरत्ना प्रधानमंत्री मोदी से मिले, तो मोदी ने हंसते हुए कहा था कि अब तो गणेश जी दूध पीयेंगे। इस तरह मोदी ने संकेत कर दिया कि जिस तरह गणेश की प्रतिमाओं के दूध पीने की बात देश-विदेश में चर्चा का विषय बन गई थी। उसी तरह अब योग भी पूरे विश्व में लोगों की जुबान पर होगा। उसके बाद नागेन्द्र व अन्य योग गुरुओं ने मोदी को देश-विदेश में 21 जून को, योग दिवस के रूप में मनाने का उपक्रम करने के लिए पत्र लिखा, मिलकर आग्रह किये। जिसके बाद भारत सरकार ने 127 देशों को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे अपने देश में तो 21 जून को योग दिवस मनाये हीं, संयुक्त राष्ट्र संघ को भी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने की मांग करें, पत्र लिखें। इस तरह योजनाबद्ध कोशिश के बाद 21 जून को,अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। जिसके बाद आयुष विभाग को एक अलग मंत्रालय बना दिया गया। डॉ एच.आर.नागेन्द्र को देश व विदेश में योग दिवस मनाने की तैयारी वाली कमेटी का प्रमुख बना दिया गया। आयुष, स्वास्थ्य, शिक्षा की बहुत सी समितियों का अध्यक्ष बना दिया गया। पद्मश्री समिति का प्रमुख बना दिया गया। डॉ एच.आर.नागेन्द्र खुद पद्मश्री उपाधि पा गये। यूजीसी सेलेक्शन कमेटी का चेयर बना दिया गया। अपने घनिष्ठ पंडित को तो यूजीसी चेयरमैन नहीं बनवा पाये लेकिन नैक का प्रमुख रहने के दौरान बंगलुरु रहते जिस प्रो. डीपी सिंह ने उनसे परिचय प्रगाढ़ कर था, उसको चेयरमैन बनने में मदद कर दिये। मोदी सरकार बनने के बाद से ही 'स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान' डीम्ड विश्वविद्यालय को तरह-तरह के ग्रांट मिलने लगे थे। पेट्रोलियम, मानव संसाधन, आयुष, स्वास्थ्य आदि मंत्रालयों से अलग-अलग परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये के फंड आने लगे। मधुमेय मुक्त भारत योजना शुरू करने के लिए करोड़ों रुपये वार्षिक मिलने लगा। इसी तरह करोड़ों की बजट वाला कैंसर का एक प्रोजेक्ट इस वर्ष शुरू हुआ है। यूजीसी से इस निजी विश्वविद्यालय के लगभग सभी विभाग के अध्यापकों को लाखों-करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट मिल गये। विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय समन्वित शोध योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का ग्रांट मिल गया। इस सबके चलते हालत यह हो गई है कि पहले जिन मारवाड़ी, गुजराती, सिंधी व अन्य उद्यमियों ने करोड़ों रुपये डोनेशन देकर, भवन बनवाकर कई एकड़ जमीन खरीद कर दें। इस संस्थान को खड़ा करने में मदद करने वाले अब 2014 के बाद से यहां या तो नहीं आते हैं या आने से कतराने लगे हैं। एक उद्योगपति जिसने इस संस्थान को 10 एकड़ से अधिक जमीन खरीद कर दी है, जिस पर इस समय विश्वविद्यालय के कई भवन बने हैं, के परिवार के बुजुर्ग लोग वर्ष में एक या दोबार यहां आते, रुकते थे। जितने दिन रुकते थे उसका किराया आदि तो देते ही थे, ऊपर से संस्था को कई लाख और दे जाते थे। आश्रम पद्धति की सोच पर बने इस संस्था का अरोग्यधाम पहले गरीब जनों में उपचार के लिए प्रसिद्ध था। विश्वविद्यालय भी गुरुकुल व आश्रम वातावरण में पढ़ने, बढ़ने के लिए मशहूर था। इसमें अधिकतर गरीब छात्र आते थे। जबसे इसमें सैकड़ों करोड़ की परियोजनाएं शुरू हुई, हर विभाग के आचार्यों को यूजीसी आदि की करोड़ों की योजनाएं मिल गईं हैं, तबसे इसका आश्रम रूप बदलकर सात सितारा होने लगा है। आश्रम पद्धति की शिक्षा की सोच व योजना पर बना यह निजी योग विश्वविद्यालय अब अमेरिका के सात सितारा मंहगे शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में आना चाहता है। जिसके लिए अरोग्यधाम, गेस्ट हाउस से लगायत सब का फीस, किराया आदि बढ़ा दिया गया है। बीएससी-योग, एमएससी-योग की फीस बढ़ाकर लाखों रुपये कर दिया गया है, जिसके चलते अब मध्यमवर्गीय परिवार के छात्रों को यहां पढ़ाई करने के लिए परिवार पर बोझ बनना पड़ रहा है। लोगों को अपने बच्चों को यहां पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। कर्ज लेना पड़ रहा है। एक तरफ यह हालत है, दूसरी तरफ यहां योग, प्राणायाम, आवर्तन ध्यान आदि के मार्फत तनाव दूर करने, बीमारी दूर करने, स्वास्थ्य ठीक रखने, बेहतर प्रबंधन करने का दावा किया जाता है। स्थिति यह है कि इस विश्वविद्यालय , संस्थान के आधे से अधिक पदाधिकारी, कर्मचारी हृदय की बीमारी, तनाव, डिप्रेशन आदि से पीड़ित हैं। डॉ एच.आर.नागेन्द्र को ही कुछ माह पहले ऑपरेशन कराना पड़ा है। उनके भाई की भी तबियत बहुत खराब हो गई थी। विश्वविद्यालय के एक उच्च पदाधिकारी ने गुस्से में एक छात्र को तमाचा मार दिया था, जिसके विरोध में छात्रों ने कक्षा बहिष्कार किया था। छात्रावास में एक छात्रा की करेंट लगने से मौत हो गई तो छात्रों ने हड़ताल कर दिया। जिसके बाद 3 के माह लिए छात्रावास खाली करा लिया गया था। उस दौरान वहां नये स्वीच लगाये गये। किसी अध्यापक के व्यवहार या पढ़ाने में कमी को लेकर ऊपर शिकायत करने पर वह अध्यापक, शिकायत करने वाले छात्र को प्रैक्टिकल में नम्बर कम देता है, तरह-तरह से परेशान करता है। यहां अध्यापकों व पदाधिकारियों में जाति विशेष को प्रश्रय देने का आरोप लगता है। यहां चल रही तमाम योजनाओं में डाटा व खर्च की गड़बड़ी के भी आरोप लगने लगे हैं। इन सबके चलते मेहनती छात्र कम खर्च में योग की सटीक, संवृद्ध जानकारी पाने के लिए, मैसूर में 3 वर्ष में एडवांस अष्टांग योग सीखकर, अच्छे वेतन पर विदेश जाने को प्राथमिकता देने लगे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्णमोहन
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