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भाजपा ने पीडीपी सरकार से लिया समर्थन वापस, महबूबा ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jun 19 2018 5:59PM
भाजपा ने पीडीपी सरकार से लिया समर्थन वापस, महबूबा ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा
नई दिल्ली, 19 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू कश्मीर की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और राज्यपाल एनएन वोहरा को इस फैसले से अवगत कराते हुए सूबे में राज्यपाल शासन लागू करने की मांग की है। भाजपा के इस फैसले के कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। भाजपा के समर्थन वापसी के बाद महबूबा सरकार अल्पमत में आ गई थी। मंगलवार को भाजपा महासचिव व जम्मू कश्मीर के प्रभारी राम माधव ने राज्य की गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी ने राज्य के हालात और परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया है। भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जम्मू कश्मीर की महबूबा सरकार में उपमुख्यमंत्री कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसके साथ ही हमने राज्यपाल को अपने फैसले से अवगत कराते हुए सूबे में राज्यपाल शासन लगाने की मांग की है। इससे पूर्व, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ जम्मू कश्मीर भाजपा इकाई के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। बैठक में राज्य के हालात और दूसरे पहलुओं पर व्यापक चर्चा के बाद ये निर्णय लिया गया है। जम्मू कश्मीर के भाजपा नेताओं से बातचीत से पहले शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के भी चर्चा की। भाजपा महासचिव राम माधव ने समर्थन वापसी के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात पर चर्चा हुई उसके बाद पार्टी ने यह फैसला लिया। राम माधव ने कहा कि ताजा हालात के बाद गठबंधन में काम करना पार्टी के लिए मुश्किल हो गया था। भाजपा महासचिव ने समर्थन वापसी के लिए महबूबा मुफ्ती को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने लगातार राज्य सरकार को समर्थन दिया। सूबे को 80 हजार करोड़ का पैकेज भी दिया, लेकिन राज्य सरकार हालात संभालने में नाकाम रही। राम माधव ने कहा कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कश्मीर घाटी में परिस्थितियों को संभाल नहीं पाईं। ऐसे में तीन साल की सरकार चलाने के बाद भाजपा ने पीडीपी से अलग होने का फैसला किया है। भाजपा महासचिव ने कहा कि जिस मकसद से उन्होंने पीडीपी के साथ सरकार बनाई थी, उसमें कामयाबी न मिलने पर सरकार से समर्थन वापस ले लिया गया। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा हमेशा से ही शांति और घाटी में अमन लाने के लिए कोशिश करती रही है। लेकिन विभिन्न कारणों से जम्मू-कश्मीर की सरकार नहीं कर पाई। जिस तरीके से घाटी में आतंकी घटनाएं बढ़ी है उससे राज्य के हालात और बिगड़ते गए। राम माधव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो जाता है तो भी आतंकियों के खिलाफ सेना की कार्रवाई सतत जारी रहेगी। जम्मू कश्मीर का अलग विधान दूसरे राज्यों की अपेक्षा जम्मू कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है। चुनी हुई सरकार का शासन न होने की स्थिति में यहां राष्ट्रपति शासन नहीं अपितु राज्यपाल शासन लागू होता है। राष्ट्रपति जम्मू कश्मीर के राज्यपाल अथवा अन्य (केंद्रीय सुरक्षा बल) की सिफारिश पर भी सूबे में राज्यपाल शासन को मंजूरी प्रदान कर सकता है। इसके साथ जम्मू-कश्मीर भारत का एकमात्र राज्य है, जिसे अपना ध्वज फहराने का अधिकार प्राप्त है। इस राज्य को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के अंतर्गत विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है । यह कुछ ऐसे तथ्य हैं जो जम्मू कश्मीर को दूसरे राज्यों से अलग श्रेणी में खड़ा करते हैं।
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