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एक-दूसरे की लकीर काटने में जुटे दावेदार !

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 24 2018 8:17PM
एक-दूसरे की लकीर काटने में जुटे दावेदार !
भोपाल/उज्जैन, 24 अक्‍टूबर (हि.स.)। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस सातों विधानसभा सीट से किसे प्रत्याशी बनाएगी, यह आने वाला समय बताएगा। इधर टिकट पाने की दौड़ में लगे कुछ दावेदार अपनी उपलब्धियों का बखान करने की जगह अन्य दावेदारों के खिलाफ शिकायतें करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। तैयारी भी ऐसी कर रखी है कि कोई सीडी लेकर राजधानी में घूम रहा है तो कोई प्रिंटेड सामग्री लेकर। सामग्री दिखाकर दावा किया जा रहा है कि फलां दावेदार ने इतना घोटाला किया और फलां दावेदार का व्यक्त्वि इस प्रकार का है? 
 
मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस से सातों सीटों से कुल जमा 14 लोगों को प्रत्याशी बनाया जाएगा। 
यदि इस समय दोनों पार्टियों से दावेदारों की संख्या का अनुमान लगाया जाए तो सात सीटों पर करीब 200 लोग अपनी दावेदारी जता रहे हैं। इनमें करीब 50 ऐसे हैं जो मानकर चल रहे हैं कि उनका टिकट तो पक्का ही है। ऐसे ही कुछ दावेदार खुद को टिकट का सही प्रत्याशी सिद्ध करने की होड़ में आरोप-प्रत्यारोप की दौड़ में शामिल हो गए हैं। हालात यह हैं कि ऐसे दावेदारों ने अपने प्रतिस्पर्धी दावेदारों को लेकर जहां सामग्री तैयार करवा ली है वहीं उनकी नजर में जहां उचित लग रहा है, वहां ऐसी सामग्री पहुंचा भी रहे हैं। 
सामान्य रूप से दावेदार अपनी दावेदारी जताने के लिए पार्टी में किए गए कार्यों और स्वयं के द्वारा समाज को दिए गए समय का लेखा-जोखा अपने बायोडाटा में देते हैं। कोई न कोई आका जरूर होता है जो ऐसे दावेदारों को दो-चार सीढिय़ां आगे चढऩे में मदद भी कर देता है। इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा से टिकट की मांग कर रहे कुछ दावेदारों ने पुरानी सारी मर्यादाओं को ताक में रख दिया है। 
 
राजनीति के पुराने चावल बताते हैं कि व्यक्ति स्वयं के लिए टिकट मांगता था लेकिन किसी दूसरे के खिलाफ इस तरह प्रचार नहीं करता था जो वर्तमान में देखने में आ रहा है। ऐसे बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पास भी कुछ दावेदार आए और अपनी उपलब्धियों का बायोडाटा देकर एक बंडल सामग्री प्रतिस्पर्धी दावेदारों की भी दे गए। साथ ही बखान कर गए कि किस प्रतिस्पर्धी ने कब, क्या किया था? किस प्रतिस्पर्धी का व्यक्तित्व कैसा है? 
 
सूत्र बताते हैं कि ऐसे दावेदार जिले से बाहर भोपाल और दिल्ली तक फेरी लगा आए हैं। साथ ही वे यह तय कर चुके हैं कि उनका कुर्ता बाकी सभी के कुर्ते से ज्यादा उजला और बेदाग है, इसलिए उनकी टिकट पक्की समझो। बात-बात में नकारात्मक पहलू आने पर उत्तेजित होकर कह देते हैं- यदि गलत व्यक्ति को टिकट मिला तो समझो सारा मामला ही ऊपर तक गड़बड़ है? जब उनसे इस प्रतिनिधि ने प्रश्न किया कि एक ओर आप ऊपर के सभी लोगों को सही बताते हुए स्वयं को भी सही साबित कर रहे हो, दूसरी ओर प्रतिस्पर्धी को टिकट मिलने पर ऊपर तक आक्षेप लगा रहे हो, ऐसे में आपका अपना व्यक्तित्व क्या..? वे हंसकर कहते हैं- भैया यह तो राजनीति है। इसमें सबकुछ जायज है। यदि मैंने दूसरों की कमियां उजागर करने में मेहनत की है तो वो भी पार्टी हित में ही काम किया है...? 
 
यह स्थितियां बताती हैं कि आने वाले समय में यदि दोनों पार्टियां सिद्धांतों से हटकर टिकटें बांट देंगी और कथित रूप से गलत लोग चुनकर विधानसभा में पहुंच जाएंगे तो प्रदेश का भविष्य कितना सुरक्षित रह पाएगा, शोध का विषय है। 
 
पार्टियां के पास अभी भी काफी समय है। सर्वे और नेताओं की सिफारिशों के साथ कर्णधारों को देखना होगा कि जिसे टिकट दिया जा रहा है वह समाज के प्रति कितना जवाबदेह है। उसका व्यक्तिगत स्वार्थ कितना है तथा उसकी पसंद, नापसंद का समाज पर क्या असर गिरता है? गलत व्यक्ति चुनकर आने में मतदाता को पूरा दोष नहीं दिया जा सकता, विकल्प न रहने पर मतदाता पार्टी को वोट देता है न कि व्यक्ति को। 
 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार/ललित/राजू 
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