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चुनाव पूर्व वायदा करके स्वामीनाथन को भूलीं सरकारें

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 22 2018 9:35PM
चुनाव पूर्व वायदा करके स्वामीनाथन को भूलीं सरकारें

नरसिंहपुर, 22 अक्‍टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा 15 अगस्त को मंदसौर से आरंभ  की गयी अन्नदाता अधिकार यात्रा का सोमवार को दोपहर बाद नरसिंहपुर आगमन हुआ। जिसमें महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रविदत्त सिंह, युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल राज, दक्षिण भारत के संगठन मंत्री केव्ही बीजू, प्रदेश मंत्री मनमोहन रघुवंशी, पूर्व पुलिस अधिकारी सुबोध शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागृत करते हुए नरसिंहपुर पहुंचे। बताया गया कि महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी यात्रा का नेतृत्व करते हुए साथ चल रहे थे, लेकिन छिंदवाड़ा मे उनका स्वास्थ्य खराब होने के चलते चिकित्सकों ने उन्हें आराम का मशवरा दिया तो वे वापस लौट गये। अब वे स्वस्थ्य हैं और 28 अक्टूबर को यात्रा के समापन पर भोपाल में आयोजित सभा को संबोधित करेंगे। 

 
नरसिंहपुर में महासंघ के जिला उपाध्यक्ष ऋषिराज सिंह पटैल के निवास पर एक पत्रकारवार्ता का आयोजन भी किया गया। जिसे संबोधित करते हुए युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल राज ने कहा कि 15 अगस्त से इस यात्रा का आगाज करने के पीछे संगठन की सोच यह थी कि 15 अगस्त को देश आजाद हुआ, लेकिन किसानों को आज तक खुद की फसल का दाम तय करने की आजादी नही मिली। इन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी आम सभाओं में 400 बार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों का जिक्र करके किसानों को लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी समर्थन मूल्य देने का वचन दिया था। भाजपा के घोषणा पत्र में भी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का वायदा था, किंतु  जनवरी 2015 में मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालयों मे शपथ पत्र देकर लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य देने से स्पष्ट तौर पर मना कर दिया। यह किसानों के साथ सरासर वायदा खिलाफी साबित हुई। 
 
... किसानों का मामूली कर्जा क्यों नही किया माफ? 
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि हमारी यह यात्रा मप्र के 51 जिलों में 7000 किलोमीटर का सफर तय कर 28 अक्टूबर को भोपाल पहुंचेगी। हमारी मांग है कि सरकार स्वामीनाथन की सिफारिशों को लागू करे। सभी फसलों को निर्धारित दर पर क्रय करने की गारंटी दी जाये। जब देश के उद्योगपतियों का का तीन वर्ष का 17 लाख 72 हजार करोड़ रूपये का कर्ज एवं 18 उद्योगपतियों का 2 लाख 72 हजार करोड़ रूपये का कर्ज माफ किया जा सकता है तो किसानों का महज 6 लाख 35 हजार करोड़ रूपये का कर्ज माफ क्यों नही होता? कम उपज के कारण जो किसान मंडी तक नही पहुंच पाते, ऐसे किसानों को कम से कम 18 हजार रूपये प्रतिमाह की पेंशन दी जाये। फल, दूध व सब्जी आदि की भी लागत के आधार पर डेढ़ गुने लाभकारी मूल्य पर खरीदी की जाये।  इस मौके पर महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रविदत्त सिंह ने कहा कि  मोदी जी प्रधानमंत्री बनने के बाद न जाने कितने संगठनों के लोगों से मुलाकात कर चुके हैं किंतु वे आज तक किसी किसान संगठन से नही मिले। इन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर भी निशाना साधा और कहा कि मंदसौर मे हुई किसानों की निर्मम हत्याओं का दाग भी शिवराज सिंह पर है। हद तो यह है कि इन हत्याओं की जांच वही कर रहा है जो खुद आरोपी है। यदि अब भी सरकार नही चेती तो 28 अक्टूबर को ऐसे आंदोलन की घोषणा होगी जिसे ये सरकारें पचा नही पायेंगी। 
 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार/संजय/राजू
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