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ऐन मौके पर कांग्रेस ने बदला सिरोंज का प्रत्याशी, बढ़ेंगी भाजपा की मुश्किलें

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 9 2018 5:35PM
ऐन मौके पर कांग्रेस ने बदला सिरोंज का प्रत्याशी, बढ़ेंगी भाजपा की मुश्किलें
भोपाल/विदिशा, 09 नवंबर (हि.स.)। कांग्रेस ने नामांकन भरने के आखिरी दिन विदिशा जिले की सिरोंज विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बदलकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मसर्रत शाहिद को कांग्रेस उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इस सीट पर चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। विधानसभा चुनाव में अब कम ही वक्त बचा है। दोनों दलों भाजपा-कांग्रेस ने 230 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है और बड़े ही दमखम से मैदान में उतरने को तैयार हैं। ऐसे में नामांकन भरने के आखिरी दिन शुक्रवार को कांग्रेस ने सिरोंज सीट से अपना प्रत्याशी बदल दिया है। कांग्रेस ने यहां से मसर्रत शाहिद को चुनाव लड़ाने की घोषणा की है। कांग्रेस ने तीन दिन पहले जारी सूची में पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष अशोक त्यागी को प्रत्याशी बनाया था। उनके नाम की घोषणा होते ही नगर कांग्रेस और ब्लाक कांग्रेस के नेताओं ने खुलकर विरोध जताया था। क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल पहुंचकर वरिष्ठ नेताओं से टिकट बदलने की मांग की थी। इसी के चलते कांग्रेस ने प्रत्याशी बदलते हुए मसर्रत शाहिद को उम्मीदवार बनाया। मसर्रत इसके पूर्व भी 2003 में इस क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। जिसमें उन्हें पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से शिकस्त मिली थी। मसर्रत शाहिद ने 1982 में कांग्रेस संगठन से जुड़ कर राजनीति सफर की शुरूआत की थी। वे महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष, दिग्विजयसिंह सिंह सरकार में महिला वित्त एवं विकास निगम की अध्यक्ष, बैंक आफ बड़ौदा की डायरेक्टर एवं मनमोहनसिंह सरकार में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। कांग्रेस की राजनीति में वे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की समर्थक मानी जाती है। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा ने सिरोंज विधानसभा की सीट पर पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है। लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापमं घोटाले के आरोप में लंबे समय तक जेल में रहे हैं। पार्टी ने इस कारण उन्हें टिकट नहीं दिया। सिरोंज, विदिशा जिले में आता है, यह जिला मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत प्रभाव वाला क्षेत्र है। ऐसे में लक्ष्मीकांत शर्मा के परिवार से बाहर किसी को टिकट देकर पार्टी रिस्क नहीं लेना चाहती थी, इसलिए भाई उमाकांत शर्मा को मैदान मे उतारा है। अब देखना होगा कि क्या उमाकांत अपने भाई की तरह मसर्रत को मात दे पाते हैं या नहीं। हिन्दुस्थान समाचार/केशव
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